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बड़ी खबर: सामने आ गई ब्लैक फंगस संक्रमण की असली वजह, सिर्फ स्टेरॉयड का इस्तेमाल ही नहीं है जिम्मेदार

Fri, 21 May 2021 01:27 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ब्लैक फंगस (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Social media
देश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती पैदा कर दी है। पिछले कुछ दिनों से रोजाना संक्रमितों के आंकड़े तीन लाख से कम जरूर हुए हैं लेकिन मौतों की संख्या अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। इन सबके बीच म्यूकोरमाइकोसिस (जिसे ब्लैक फंगस के नाम से भी जाना जाता है) ने लोगों की समस्याओं को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञ इसे कैंसर की तरह ही घातक मान रहे हैं। इससे होने वाली मृत्युदर भी 50-70 फीसदी के करीब बताई जा रही है।
ब्लैक फंगस संक्रमण के तेजी से बढ़ते मामलों के बीच लोगों के मन में सवाल आ रहे हैं कि आखिर दूसरी लहर में यह गंभीर समस्या कहां से आ गई? इसकी क्या मुख्य वजह हो सकती है और इससे किस तरह से बचाव किया जा सकता है? इस लेख में विशेषज्ञों से सभी सवालों के जवाब जानने की कोशिश करेंगे।
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ब्लैक फंगस की प्रकृति - फोटो : Social media
म्यूकोरमाइकोसिस की प्रकृति
ब्लैक फंगस संक्रमण के कारण के बारे में जानने से पहले इस संक्रमण की प्रकृति के बारे में जानना आवश्यक हो जाता है। अमर उजाला से बातचीत में वरिष्ठ श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ आशीष जैन बताते हैं कि ब्लैक फंगस सदियों से हमारे आसपास मौजूद रहा है, हालांकि इंसान की प्रतिरोधक क्षमता इसे शरीर पर हावी नहीं होने देती है। कमजोर इम्यूनिटी वाले मरीजों (जैसे अनियंत्रित ब्लड शुगर, इम्यूनोसप्रेसिव दवाइयों का सेवन करने वाले और कैंसर रोगी) में इस संक्रमण के मामले देखने को मिलते रहे हैं।  म्यूकोरमाइकोसिस एक अत्यंत दुर्लभ बीमारी है, अब तक इसके मामले बहुत ही कम सामने आते थे इसलिए यह कभी ज्यादा चर्चा में नहीं रहा।
 
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ब्लैक फंगस का खतरा कैसे बढ़ गया - फोटो : Amar Ujala
इम्यूनिटी का है सारा खेल
अहमदाबाद में महामारी विशेषज्ञ डॉ दीपक बताते हैं कि पहली की तुलना में कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण का स्तर काफी ज्यादा रहा है। इस लहर में रोगियों के इलाज के लिए स्टेरॉइड जैसी दवाओं का इस्तेमाल ज्यादा किया जा रहा है। कोरोना के मरीजों की इम्यूनिटी पहले से ही कमजोर होती है, उसके बाद उनमें स्टेरॉयड और कई तरह की इम्यूनोसप्रेसिव दवाइयों का उपयोग प्रतिरक्षा को और दबा देते हैं, ऐसे में ब्लैक फंगस को अटैक करने का मौका मिल जाता है।

 

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तमाम तरह की गलत दवाओं के कारम बढ़े मामले - फोटो : iStock
नीम हकीम खतरा-ए-जान
डॉ दीपक बताते हैं, कोरोना की दूसरी लहर का असर ग्रामीण क्षेत्रों में भी ज्यादा देखने को मिल रहा है। इन स्थानों पर अब भी लोगों को कोरोना के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी नहीं है। संभावित लक्षण दिखते ही यहां के लोग झोलाछाप डॉक्टरों से दवाइयां लेना शुरू कर देते हैं। एक से फायदा नहीं हुआ तो दूसरा, दूसरे से नहीं हुआ तो तीसरा, ऐसे-ऐसे कोविड के अस्पताल तक पहुंचने से पहले वह 4-5 डॉक्टरों से अलग-अलग दवा कर चुके होते हैं। इसके अलावा ऐसे डॉक्टर आमतौर पर एक ही पैटर्न की दवाओं को प्रयोग में लाते हैं। 
लिहाजा, यह माना जा सकता है कि दूसरी लहर में तमाम तरह की गलत दवाओं और बिना जरूरत के भी स्टेरॉयड के सेवन के कारण हमने इस फंगस को खुद पर हावी होने का अवसर दे दिया है।
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फंगस हमारे आसपास हमेशा से मौजूद रहा है - फोटो : pixabay
कोरोना की पहली लहर में भी थे म्यूकोरमाइकोसिस के मामले
अमर उजाला से बातचीत में अहमदाबाद में ईएनटी विशेषज्ञ डॉ हार्दिक शाह कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि म्यूकोरमाइकोसिस के मामले सिर्फ दूसरी लहर में ही हैं। पहली लहर में भी इसके केस थे, लेकिन नाम मात्र के। कोविड की दूसरी लहर में यह संक्रमण कोविड होने के 10-15 दिनों में ही सामने आ जा रहा है, जबकि पहली लहर में म्यूकोरमाइकोसिस के मामले कोविड संक्रमण होने के काफी दिनों बाद दिखते थे। पहली लहर में यह आंखों को नुकसान पहुंचाते हुए कम देखा गया था जबकि इस बार इसके गंभीर असर सामने आ रहे हैं। 
 
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लक्षणों को न करें नजरअंदाज - फोटो : iStock
गंभीर सिरदर्द को न करें नजरअंदाज
डॉ हार्दिक शाह बताते हैं कि अब तक जिन लोगों में म्यूकोरमाइकोसिस की पुष्टि हुई है उनमें गंभीर सिरदर्द के मामले सबसे आम रहे हैं। इसके अलावा गाल के एक तरफ सूजन आ जाना, और आंखों में दर्द को इसके शुरुआती संकेतों के रूप में देखा जा सकता है। कुछ लोगों को नाक से खून आने की दिक्कत हो सकती है लेकिन यह उतना आम लक्षण नहीं है। इसके अलावा दांतों में कमजोरी और दर्द को भी हम ब्लैक फंगस संक्रमण के लक्षण के रूप में देख रहे हैं।

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नोट: यह लेख वरिष्ठ श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ आशीष जैन, महामारी विशेषज्ञ डॉ दीपक और ईएनटी विशेषज्ञ डॉ हार्दिक शाह  से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें तथा किसी भी दवा का सेवन बिना डॉक्टरी सलाह के न करें।
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