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सावधान: ये छोटी सी लापरवाही आपको बना सकती है बहरा, बच्चों-युवाओं में देखा गया सबसे ज्यादा खतरा

Fri, 19 Jan 2024 02:30 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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युवाओं में बढ़ रही है बहरेपन की समस्या - फोटो : istock
कम सुनाई देने या बहरेपन की समस्या पिछले एक दशक में काफी तेजी से बढ़ती देखी गई है। आश्चर्यजनक रूप से बच्चों-युवाओं में इसका जोखिम तेजी से बढ़ा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि वैश्विक स्तर पर 34 मिलियन (3.4 करोड़) से अधिक बच्चों में बहरेपन या सुनने की क्षमता में कमी देखी गई है, जिनमें से 60% मामले ऐसे हैं जिन्हें रोका जा सकता था।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, 60 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग 30% लोगों में सुनने की क्षमता कम होने लगती है, हालांकि जिस प्रकार से कम उम्र के लोगों में इसका जोखिम देखा जा रहा है वह काफी चिंताजनक स्थिति है।

बहरेपन की बढ़ती समस्या के लिए विशेषज्ञों ने जिन कारणों को जिम्मेदार पाया है, उनमें बार-बार तेज आवाज के संपर्क में आने से कानों को होने वाली क्षति प्रमुख है। विशेषज्ञ कहते हैं, ईयरफोन-हेडफोन या फिर लाउडस्पीकर-साउंड की तेज आवाज के संपर्क में रहना आपके लिए हानिकारक हो सकता है। युवाओं में ईयरफोन-हेडफोन का इस्तेमाल अधिक देखा जा रहा है जो कानों के लिए गंभीर समस्याकारक हो सकती है।
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कम सुनाई देने की समस्या - फोटो : Pixabay
 ईयरफोन-हेडफोन की तेज ध्वनि नुकसानदायक

अध्ययन की रिपोर्ट से पता चलता है कि ईयरफोन-हेडफोन की ध्वनि जितनी तेज होगी, श्रवण हानि होने का खतरा उतना अधिक हो सकता है। इन उपकरणों का एक्सपोजर जितना लंबा होगा, बहरेपन का जोखिम भी उतना अधिक बढ़ जाता है। इन उपकरणों का इस्तेमाल या तो बहुत कम करें या फिर आवाज को बिल्कुल कम रखें।

ध्वनि को डेसीबल (dB) में मापा जाता है, यह जितना अधिक होगा कानों की नाजुक मांसपेशियों को क्षति पहुंचने का खतरा उतना बढ़ जाता है। तेज शोर के कारण आंतरिक कान की मांसपेशियों को नुकसान हो सकता है।
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तेज आवाज कानों के लिए हानिकारक - फोटो : iStock
कितनी तेज आवाज है खतरनाक?

अध्ययनकर्ता मानते हैं कि 30-50 डीबी की आवाज में कुछ समय के लिए इन उपकरणों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि जैसे-जैसे ये बढ़ता जाता है, दुष्प्रभाव भी बढ़ने लगते हैं। लंबे समय तक 70 डीबी से ऊपर की आवाज आपकी सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचाना शुरू कर सकती है। 120 डीबी से ऊपर का तेज शोर आपके कानों को तत्काल नुकसान पहुंचा सकता है।

हालिया शोध में पाया गया है कि कुछ घंटों तक 80 डीबी तीव्रता वाली आवाज आपको बहरा भी बना सकती है।

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कानों की बढ़ती समस्या - फोटो : Pixabay
अध्ययन में क्या पता चला?

बीएमजे पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित शोधपत्र में 14 अध्ययनों की समीक्षा की गई, जिसमें कुल मिलाकर 50,000 से अधिक लोग शामिल थे। शोधकर्ताओं ने पाया कि जो बच्चे लंबे समय तक हेड फोन्स लगाकर गेम खेलते हैं उनमें बहरेपन का जोखिम अधिक देखा गया है।

शोधकर्ता कहते हैं, जिन लोगों ने 80-90 डीबी की तीव्रता में सप्ताह में तीन घंटे से अधिक समय तक आवाज वाले उपकरणों का इस्तेमाल किया उनमें कम सुनाई देने या बहरेपन का जोखिम अधिक था।
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तेज ध्वनि से करें बचाव - फोटो : istock
बच्चों को हेडफोन्स के अधिक इस्तेमाल से रोकें

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, श्रवण हानि या टिनिटस जैसी कानों की समस्याओं से बचाव के लिए साउंड या अन्य उपकरणों से निकलने वाली ध्वनि को कम रखें। वॉल्यूम हमेशा 50% से कम ही रखें है। कानों को आराम देने के लिए नियमित ब्रेक लें। यदि आप शोर-शराबे वाले वातावरण में रहते हैं तो नॉइस कैंसिलेशन वाले उपकरणों का प्रयोग करें।

वहीं अगर कुछ समय से सुनने में दिक्कत या कानों में दर्द-असहजता बनी हुई है तो समय रहते डॉक्टर से मिलकर जांच जरूर कराएं। बच्चों को हेडफोन्स के अधिक इस्तेमाल से रोकना भी आवश्यक है।


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स्रोत और संदर्भ
Risk of sound-induced hearing loss from exposure to video gaming or esports

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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