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Sleep Quality: नींद में सुधार कर लें तो बुढ़ापे में भी बेहतर रहेगी याददाश्त, इन बीमारियों में भी मिलेगा लाभ

Thu, 02 Nov 2023 06:46 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नींद की गुणवत्ता में कैसे करें सुधार? - फोटो : istock
अच्छी नींद को सेहत का आधार माना जाता है। अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि जिन लोगों की रात की नींद अच्छी होती है उनमें कम नींद लेने वालों की तुलना में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम भी कम होता है। एक रात की भी नींद की समस्या आपको अगले दिन थकान-कमजोरी और चिड़चिड़ेपन का एहसास करा सकती है। वहीं अगर आपको अक्सर ये दिक्कत बनी रहती है यानी आपको अनिद्रा या नींद विकार है तो ये गंभीर रोगों का कारक हो सकती है।

हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि अगर कम उम्र से ही नींद को ठीक रखने के लिए उपाय कर लिया जाएं तो ये आपको बुढ़ापे में याददाश्त जाने की समस्या- डिमेंशिया रोग से बचा सकती है। जिन लोगों की नींद पूरी नहीं होती है उनमें इन विकारों का खतरा अधिक देखा जाता रहा है।

इतना ही नहीं नींद विकारों के कारण आपको कई और भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं जिनको लेकर अलर्ट रहने की सभी लोगों को आवश्यकता है। 
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डिमेंशिया रोग का जोखिम - फोटो : Istock
डिमेंशिया का हो सकता है खतरा

नींद विकारों के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में जानने के लिए किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि 60 साल से अधिक उम्र के व्यक्तियों में हर साल गहरी नींद में अगर एक फीसदी की भी कमी आती है तो इसके कारण डिमेंशिया होने की आशंका 27 फीसदी तक बढ़ सकती है। अध्ययन में कहा गया है कि अगर कम उम्र से ही गहरी नींद लाने के लिए प्रयास कर लिए जाएं तो  बुढ़ापे में याददाश्त जाने वाली इस बीमारी के खतरे को कई गुना तक कम किया जा सकता है। यानी नींद आपके मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए बहुत आवश्यक है।
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वजन कैसे कंट्रोल करें? - फोटो : iStock
वजन को कंट्रोल रखने में ये सहायक

अध्ययनों में हर रात 7 घंटे से कम सोने को नींद की समस्या के तौर पर परिभाषित किया गया है। ये वजन बढ़ने और हाई बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) के जोखिम को बढ़ाने वाली स्थिति हो सकती है। 2020 के एक विश्लेषण में पाया गया कि जो वयस्क प्रतिरात 7 घंटे से कम सोते थे, उनमें मोटापा विकसित होने का जोखिम 41% बढ़ गया था। यानी कि अगर आप वजन को कंट्रोल रखना चाहते हैं तो नींद में सुधार करना बहुत आवश्यक है।

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हृदय का रखें ख्याल - फोटो : istock
दिल रहता है स्वस्थ

नींद की गुणवत्ता और अवधि में कमी को हृदय रोगों के खतरे से जोड़कर देखा जाता रहा है। अध्ययनों के विश्लेषण में पाया गया कि प्रतिदिन 7 घंटे से कम सोने से हृदय रोगों से मृत्यु का जोखिम 13% बढ़ जाता है। यदि आप नींद में सुधार करते हैं और रोजाना रात को 7-9 घंटे की निर्बाध नींद लेते हैं तो ये रक्तचाप को कंट्रोल रखने में सहायक है और इससे गंभीर हृदय रोगों के विकसित होने का जोखिम कम हो सकता है। 
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स्ट्रेस-डिप्रेशन का खतरा - फोटो : istock
आप डिप्रेशन से रह सकते हैं सुरक्षित

मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं जैसे अवसाद और स्ट्रेस के लिए भी खराब नींद की गुणवत्ता और नींद संबंधी विकारों को एक कारण माना जाता रहा है। 2,672 प्रतिभागियों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि रोजाना रात में नींद पूरी न कर पाने वाले लोगों में समय के साथ अवसाद होने का खतरा अधिक हो सकता है। अनिद्रा या ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया जैसी नींद संबंधी विकारों से पीड़ित लोगों में भी अवसाद की दर अधिक होती है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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