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Intermittent Fasting: इंटरमिटेंट फास्टिंग के हो सकते हैं जानलेवा साइड-इफेक्ट्स, अध्ययन में बड़ा खुलासा

Fri, 22 Mar 2024 07:15 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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इंटरमिटेंट फास्टिंग से होने वाले नुकसान - फोटो : istock
Intermittent Fasting: वजन कम करना मौजूदा समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। वैश्विक स्तर पर किए गए कई अध्ययनों में पाया गया है कि लगभग हर उम्र के व्यक्ति में मोटापे की दिक्कत देखी जा रही है। वजन घटाने के लिए कई तरह के डाइट प्लान काफी ट्रेंडिंग हैं- इंटरमिटेंट फास्टिंग भी उनमें से एक है।

इंटरमिटेंट फास्टिंग में 12 से 16 घंटे का फास्ट रखा जाता है, माना जाता रहा है कि ये वजन पर नियंत्रित रखने में मददगार हो सकती है। पर क्या वास्तव में ऐसा है?

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इतने लंबे समय तक उपवास करने से सेहत पर कई प्रकार से नकारात्मक असर होने का जोखिम रहता है। इसी को लेकर हाल ही में किए गए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने अलर्ट करते हुए कहा है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग से फायदे की जगह कई प्रकार के स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं। इतना ही नहीं ये आपमें हृदय रोग की गंभीर समस्याओं का भी कारण बन सकती है।
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ज्यादा देर तक बिना कुछ खाए रहना नुकसानदायक - फोटो : Pixabay
इंटरमिटेंट फास्टिंग से हृदय रोगों का खतरा

अध्ययन के विश्लेषण के अनुसार, इस तरह के फास्टिंग से हृदय रोग और इससे मृत्यु का खतरा अधिक देखा गया है। शिकागो में अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के वैज्ञानिक सत्र में प्रस्तुत किए गए डेटा में कहा गया है कि जो लोग प्रतिदिन 12-15 घंटे तक बिना कुछ खाए रहते हैं, उनमें गंभीर और जानलेवा हार्ट की समस्याओं का जोखिम 91 प्रतिशत अधिक हो सकता है।

शोधकर्ताओं ने कहा, जिन लोगों को पहले से हृदय रोग, डायबिटीज या कैंसर जैसी समस्या रही है उनमें इंटरमिटेंट फास्टिंग के कारण जोखिमों के और भी बढ़ने का खतरा हो सकता है। विशेषतौर पर जिन लोगों को पहले से हृदय संबंधी दिक्कतें रही है उनमें इस तरह की फास्टिंग से हार्ट अटैक-हार्ट फेलियर का खतरा 66 प्रतिशत अधिक देखा गया है। 
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हृदय रोगों का जोखिम - फोटो : istock
अध्ययन में क्या पता चला?

चीन में जिओ टोंग यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने इंटरमिटेंट फास्टिंग के प्रभावों को जानने के लिए अध्ययन किया। इसमें अमेरिका में 2003 से 2018 की अवधि के दौरान 20,000 वयस्कों के डेटा का अध्ययन किया गया। कई स्तर पर किए गए विश्लेषण में पाया गया है कि जो लोग लंबे समय तक बिना कुछ खाए-पिए रहते थे, या फिर इंटरमिटेंट फास्टिंग करते थे उनमें गंभीर हृदय रोगों का जोखिम अधिक देखा गया। 

अध्ययनकर्ताओं ने कहा, शोध ये नहीं कहता है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग सीधे तौर पर हृदय संबंधी मृत्यु का कारण बनती है पर ज्यादा देर बिना कुछ खाए हुए रहने के कारण शरीर के 'बायोलॉजिकल मैकेनिज्म' पर जो असर होता है उसके कारण हृदय स्वास्थ्य जोखिम जरूर बढ़ सकते हैं।

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हार्ट अटैक जैसी गंभीर समस्याओं का जोखिम - फोटो : istock
शोधकर्ता बोले- ज्यादा देर तक भूखे रहना ठीक नहीं

यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और अध्ययन के वरिष्ठ अध्ययन लेखक विक्टर वेन्जे झोंग कहते हैं, रोजाना खाने की अवधि को सीमित करना (जैसे प्रतिदिन केवल 8 घंटे का समय खाने के लिए निर्धारित करना)  हाल के वर्षों में वजन कम करने के लिए लोकप्रिय तरीकों के रूप में उभरा है पर असल में इसके कारण कई अन्य प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ गया है, जिसमें हृदय रोगों की समस्या प्रमुख है।

इस प्रकार के आहार अपने संभावित अल्पकालिक लाभों के कारण जरूर लोकप्रिय रहे हैं लेकिन हमारे शोध से स्पष्ट रूप से पता चलता है कि ज्यादा देर तक भूखे रहने से हृदय की सेहत पर नकारात्मक असर होने का जोखिम बढ़ जाता है।
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इंटरमिटेंट फास्टिंग से हृदय रोगों का जोखिम - फोटो : istock
अध्ययन का निष्कर्ष?

प्रोफेसर झोंग कहते हैं, हमारे निष्कर्ष से पता चलता है कि सभी लोगों को अपने आहार विकल्पों के मामले में अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है। तीन महीने जैसी छोटी अवधि के लिए अगर आप इंटरमिटेंट फास्टिंग जैसे उपाय करते हैं तो ये वजन कम करने और कार्डियोमेटाबोलिक स्वास्थ्य में सुधार करने में लाभकारी हो सकता है। हालांकि लंबे समय तक इस प्रकार की फास्टिंग के कारण कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ता हुआ देखा गया है।



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स्रोत और संदर्भ
Association Between Time-Restricted Eating and All-Cause and Cause-Specific Mortality

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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