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HPV Infection: सावधान- एचपीवी संक्रमण सिर्फ सर्वाइकल कैंसर ही नहीं, हृदय रोगों से भी बढ़ा सकती है मौत का खतरा

Fri, 09 Feb 2024 01:16 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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एचपीवी संक्रमण से हृदय रोगों का खतरा - फोटो : istock
ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी) का संक्रमण कई प्रकार की गंभीर बीमारियों के खतरे को बढ़ाने वाला हो सकता है, इससे सबसे ज्यादा जोखिम महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का देखा गया है। अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि किसी भी महिला को एचपीवी का संक्रमण हो सकता है, गंभीर स्थितियों में इससे जानलेवा कैंसर होने का जोखिम बढ़ जाता है। एचपीवी वैक्सीनेशन की मदद से इस जानलेवा संक्रामक रोग और इसके कारण होने वाली जटिलताओं से बचाव करने में मदद मिल सकती है।

पर क्या आप जानते हैं कि एचपीवी का संक्रमण सर्वाइकल कैंसर के अलावा कई और भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ाने वाला हो सकता है?

एचपीवी वायरस के कारण होने वाली समस्याओं के बारे में जानने के लिए किए गए एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया, सभी महिलाओं के लिए इस गंभीर संक्रमण से बचाव के लिए टीकाकरण कराना जरूरी है। इस संक्रमण की शिकार महिलाओं के हृदय रोगों (सीवीडी) से मरने का खतरा चार गुना अधिक हो सकता है। मतलब एचपीवी संक्रमण सिर्फ कैंसर कारक ही नहीं है, ये हृदय रोगों के जोखिमों को भी बढ़ाने वाली हो सकती है।
 
  • पुरुषों को भी हो सकता है एचपीवी संक्रमण- पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
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एचपीवी का संक्रमण - फोटो : istock
एचपीवी संक्रमण बढ़ा सकती है मौत का जोखिम

यूरोपियन हार्ट जर्नल
में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने एचपीवी संक्रमण के कारण होने वाली समस्याओं को लेकर सभी लोगों को अलर्ट किया है। 17 वर्षों तक 160,000 से अधिक कोरियाई महिलाओं पर किए गए अध्ययन में पाया गया है कि ह्यूमन पेपिलोमावायरस महिलाओं में असमय मृत्यु के कई खतरों को भी बढ़ाने वाला हो सकता है। हाई रिस्क एचपीवी (एचआर-एचपीवी) स्ट्रेन, जो आम तौर पर यौन संचारित होते हैं, इससे सर्वाइकल कैंसर और हृदय रोग दोनों से मृत्यु का खतरा काफी बढ़ सकता है। 
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हृदय रोगों का बढ़ता खतरा और बचाव - फोटो : istock
एचपीवी संक्रमण के कारण हृदय रोगों का जोखिम

सियोल में सुंगक्यंकवान यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने 30 वर्ष और उससे अधिक उम्र की 163,250 महिलाओं को शामिल किया जिनमें हृदय रोगों की कोई समस्या नहीं थी। साल 2004 से 2018 तक उच्च जोखिम वाली महिलाओं की स्क्रीनिंग की गई। औसत 40.2 वर्ष की आयु वाली महिलाओं में जिनमें समय के साथ एचपीवी का संक्रमण हुआ उनमें हृदय रोगों का खतरा विकसित होते देखा गया। 

अध्ययन के लेखकों ने बताया, एचपीवी वाली महिलाओं में दीर्घकालिक हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा अधिक हो सकता है। एचआर-एचपीवी संक्रमण के कारण होने वाली समस्याओं को समझना और इसका समय रहते निदान कराना आवश्यक हो जाता है।

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हृदय रोगों से मौत का खतरा - फोटो : istock
अध्ययन में क्या पता चला?

शोधकर्ताओं ने बताया, फॉलो-अप के दौरान, 134 महिलाओं की मृत्यु हृदय रोगों के कारण हो गई से हुई, उनमें से 16% एचआर-एचपीवी-पॉजिटिव थीं। हृदय रोगों के खतरे को बढ़ाने में मोटापा भी एक कारक हो सकता है। एचआर-एचपीवी संक्रमण और हृदय से मृत्यु के बीच का संबंध स्वस्थ वजन वाली महिलाओं की तुलना में मोटापे से ग्रस्त महिलाओं में अधिक देखा गया।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हम जानते हैं कि इंफ्लामेशन, हृदय रोगों के विकास और इसके कारण होने वाली मौत के खतरे को बढ़ा देती है। इसके साथ ही अगर आप एचपीवी संक्रमित हो जाती हैं तो जोखिम और भी अधिक हो सकता है।
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एचपीवी वैक्सीन से मिल सकता है लाभ - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं शोधकर्ता?

यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी में वैज्ञानिक और अध्ययन के प्रमुख लेखक हे सुक चेओंग कहते हैं, वायरल संक्रमण सूजन को ट्रिगर कर सकती है। वायरस, रक्त वाहिकाओं में सूजन भी पैदा कर सकता है जिसके कारण धमनियों के अवरुद्ध और क्षतिग्रस्त होने का भी खतरा बढ़ जाता है, जो हृदय रोगों का प्रमुख कारक है।

अध्ययन के लेखकों ने शोध के निष्कर्षों के आधार पर सभी को अलर्ट करते हुए समय पर एचपीवी वैक्सीनेशन कराने की सलाह दी है। एचपीवी टीकाकरण, दीर्घकालिक हृदय संबंधी जोखिमों को कम करने के साथ सर्वाइकल कैंसर के खतरे से भी बचाने में मददगार हो सकती है।



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स्रोत और संदर्भ
Human papillomavirus infection and cardiovascular mortality

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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