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Health Risk: गुड कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना भी 'गुड' नहीं, अध्ययन- मस्तिष्क की इस गंभीर बीमारी का हो सकता है खतरा

Mon, 08 Jan 2024 02:09 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डिमेंशिया का खतरा - फोटो : amarujala
बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल को शरीर में कई प्रकार की गंभीर बीमारियों का कारक माना जाता है, इसका सबसे ज्यादा खतरा हृदय स्वास्थ्य पर देखा जाता रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आहार और लाइफस्टाइल में गड़बड़ी, कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ाने का जोखिम हो सकती है, यहां तक कि कम उम्र के लोगों में भी इसका खतरा देखा जा रहा है। ब्लड में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कंट्रोल में रखने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना जरूरी है। 

कोलेस्ट्रॉल दो प्रकार का होता है। गुड (एचडीएल) कोलेस्ट्रॉल और बैड (एलडीएल) कोलेस्ट्रॉल। सेहत को सबसे ज्यादा खतरा एलडीएल कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से होता है। हालांकि एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने सचेत किया है कि गुड कोलेस्ट्रॉल का भी शरीर में बहुत अधिक स्तर समस्याकारक हो सकता है। ये आपमें मस्तिष्क से संबंधित गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ा सकती है।

एचडीएल कोलेस्ट्रॉल की अधिकता वाले लोगों में याददाश्त, परिस्थितियों से डील करने की स्थिति, निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करने वाली बीमारी डिमेंशिया के जोखिमों को बढ़ाती हुई देखी गई है। जिसका मतलब है कि गुड कोलेस्ट्रॉल की अधिकता भी सेहत के लिए गुड नहीं है।
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डिमेंशिया का खतरा - फोटो : Pixabay/Pearvideo.com
एचडीएल कोलेस्ट्रॉल की अधिकता भी समस्याकारक

शोध से पता चलता है कि एचडीएल कोलेस्ट्रॉल के असामान्य रूप से उच्च स्तर वाले लोगों में मनोभ्रंश (डिमेंशिया) विकसित होने की आशंका अधिक हो सकती है। ऑस्ट्रेलिया की मोनाश यूनिवर्सिटी में किए गए एक शोध के अनुसार, अध्ययन वाले प्रतिभागियों के बीच एचडीएल कोलेस्ट्रॉल की अधिकता की स्थिति वैसे तो बहुत सामान्य नहीं थी, हालांकि ऐसे एक समूह वाले लोगों में मनोविकारों का जोखिम अधिक देखा गया है।

65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के 18,000 से अधिक प्रतिभागियों के साथ, एचडीएल कोलेस्ट्रॉल और डिमेंशिया के बीच संभावित संबंधों को समझने के लिए यह शोध किया गया था।
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कोलेस्ट्रॉल का सही स्तर - फोटो : istock
डिमेंशिया का जोखिम

डिमेंशिया ऐसी समस्या है जिसके कारण किसी व्यक्ति की स्मृति, सोच और सामाजिक क्षमताओं में काफी कमी आने लगती है। डिमेंशिया वैसे तो कोई विशिष्ट बीमारी नहीं है, कई मानसिक बीमारियां डिमेंशिया का कारण बन सकती हैं। इसके कारण मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर हो सकता है।

द लैंसेट रीजनल हेल्थ-वेस्टर्न पैसिफिक में अध्ययन की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है। अध्ययन में 80 मिलीग्राम/डीएल से अधिक एचडीएल कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को उच्च माना गया। पुरुषों के लिए 40 से 60 मिलीग्राम/डीएल और महिलाओं के लिए 50 से 60 मिलीग्राम/डीएल एचडीएल कोलेस्ट्रॉल का स्तर स्वस्थ पाया गया है।

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मस्तिष्क विकारों का जोखिम - फोटो : Pixabay
डिमेंशिया विकसित होने का जोखिम

शोधकर्ताओं ने पाया कि 80 मिलीग्राम/डीएल से अधिक स्तर वाले लोगों में डिमेंशिया विकसित होने का जोखिम 27% अधिक हो सकता है। वहीं 75 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोग जिनमें एचडीएल कोलेस्ट्रॉल का स्तर बहुत अधिक था, उनमें यह खतरा 42% तक बढ़ा हुआ पाया गया।

मोनाश स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ एंड प्रिवेंटिव मेडिसिन की वरिष्ठ शोधकर्ता मोनिरा हुसैन कहती हैं, हम जानते हैं कि एचडीएल कोलेस्ट्रॉल हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। इस अध्ययन से पता चलता है कि मस्तिष्क स्वास्थ्य के संदर्भ में इसकी अधिकता समस्याकारक हो सकती है। हालांकि इसको और विस्तृत रूप से समझने के लिए हमें और शोध की आवश्यकता है। 
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कोलेस्ट्रॉल को रखें कंट्रोल - फोटो : istock
हाई एचडीएल कोलेस्ट्रॉल भी हानिकारक

डिमेंशिया के जोखिमों को समझने के लिए एल्गोरिदम में बहुत हाई एचडीएल कोलेस्ट्रॉल स्तर को जानना मददगार हो सकता है। सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के अनुसार, अमेरिका में 5.8 मिलियन से अधिक लोगों को डिमेंशिया है और 2060 तक यह संख्या बढ़कर 14 मिलियन हो जाने का खतरा है। अध्ययन से ये पता चलता है कि कोलेस्ट्रॉल, एचडीएल हो या एलडीएल, दोनों की अधिकता शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकती है, इसके जोखिमों के बारे में सभी लोगों को सचेत रहने की आवश्यकता है।



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स्रोत और संदर्भ
Association of plasma high-density lipoprotein cholesterol level with risk of incident dementia: a cohort study of healthy older adults

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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