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Covid-19: शरीर की इम्युनिटी को चकमा देने में ये वैरिएंट सबसे खतरनाक, कई देशों में बढ़ते संक्रमण कारण भी

Fri, 15 Sep 2023 06:11 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना के नए वैरिएंट्स के जोखिम - फोटो : Istock
कोरोना के नए वैरिएंट्स कई प्रकार से स्वास्थ्य जोखिमों को बढ़ाते हुए देखे जा रहे हैं। यूके और यूएस सहित कई देशों में इन वैरिएंट्स के मामले तेजी से बढ़ते देखे गए हैं, आलम ये है कि हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लगातार आठवें सप्ताह यूएस में अस्पताल में संक्रमितों की संख्या बढ़ती हुई रिपोर्ट की गई है। प्रारंभिक शोध में बताया गया है कि नए वैरिएंट्स में अधिक म्यूटेशन हैं जो शरीर में बनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को आसानी से चकमा देकर संक्रमण के जोखिमों को बढ़ाने वाले हो सकते हैं।

इन दिनों तेजी से बढ़ रहे इन वैरिएंट्स की प्रकृति को समझने के लिए किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं की टीम ने बड़ा दावा किया है। द लैंसेट जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, इन दिनों तेजी से बढ़ रहा सार्स-सीओवी-2 का EG.5.1 (एरिस) वैरिएंट कई प्रकार से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यह अब तक सबसे आसानी से इम्यून स्केप वाला स्ट्रेन हो सकता है, यानी अन्य वैरिएंट्स की तुलना में ये शरीर में बनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को चकमा दे सकता है।

यूएस में इस वैरिएंट के कारण अस्पताल में तेजी से संक्रमितों के मामले तेजी से बढ़ते हुए देखे गए हैं।
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कोरोना के नए वैरिएंट्स के जोखिम - फोटो : pixabay
ये वैरिएंट कितना खतरनाक

जर्मन प्राइमेट सेंटर के शोधकर्ताओं की टीम ने नए वैरिएंट्स की प्रकृति को समझने के लिए किए अध्ययन में बताया कि कोरोना का ये नया वैरिएंट काफी चुनौतीपूर्ण प्रकृति वाला हो सकता है। इस वैरिएंट की एंटीबॉडीज से बचने की क्षमता में वृद्धि मध्यम स्तरीय है हालांकि हाइब्रिड प्रतिरक्षा के माध्यम से स्थापित हमारी प्रतिरक्षा को पूरी तरह से कमजोर करने के लिए इसे पर्याप्त नहीं माना जा सकता है।

हालांकि नए वैरिएंट्स को लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है क्योंकि कई देशों में पिछले दिनों इन वैरिएंट्स के कारण हालात बिगड़े  हैं।
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कोरोना के बढ़ते जोखिम कारक - फोटो : Pixabay
एरिस वैरिएंट के जोखिम कारक

अध्ययनकर्ताओं ने पाया एरिस वैरिएंट के कारण उन लोगों में भी संक्रमण का खतरा बना हुआ है जिनको कोरोना के दोनों टीके लग चुके हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि इस साल मई के महीने से कई देशों में इन नए वैरिएंट्स के कारण संक्रमण के जोखिम को बढ़ते हुए देखा गया है। ईजी.5 और इसके सब-वैरिएंट EG.5.1 के मामले कई देशों में बढ़ रहे हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) इसकी प्रकृति के देखते हुए इसे वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट के रूप में वर्गीकृत किया है। जिसमें इसके कारण संक्रमण और जोखिमों पर गंभीरता से ध्यान रखा जा रहा है।
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नए वैरिएंट्स की एंटीबॉडी से बचने क्षमता - फोटो : pixabay
एरिस के जोखिमों को लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की जरूरत

अध्ययन में इस बात के प्रमाण मिले हैं कि एंटीबॉडी से बचने की क्षमता के कारण पिछले दिनों दुनिया के कई देशों में तेजी से संक्रमण के मामले बढ़े हैं। अध्ययन के प्रमुख लेखक लू झांग कहते हैं, "हमने पाया कि वर्तमान में प्रसारित अन्य कोरोनावायरस की तुलना में, EG.5.1 के कारण अधिक जोखिम हो सकता है। इसकी इम्यून स्केप क्षमता को लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है। एरिस के साथ-साथ बढ़ रहा पिरोला वैरिएंट भी जोखिमों वाला हो सकता है। यूनाइटेड स्टेट्स में इन दिनों बढ़ रहे अधिकतर मामलों के लिए इन्ही वैरिएंट्स को प्रमुख कारण माना जा रहा है।



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स्रोत और संदर्भ
United States COVID-19 Hospitalizations, Deaths, Emergency Department (ED) Visits, and Test Positivity by Geographic Area

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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