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Long Covid Syndrome: अध्ययन में दावा- वैरिएंट्स की प्रकृति पर निर्भर करते हैं पोस्ट कोविड के लक्षण, ऐसे लोगों में खतरा अधिक

Sun, 03 Apr 2022 02:05 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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लॉन्ग कोविड की समस्याओं पर दें ध्यान - फोटो : iStock
दुनियाभर में फैली कोरोना महामारी ने हमारी सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। डेल्टा वैरिएंट से संक्रमण के कारण जहां लोगों को गंभीर लक्षणों का अनुभव हुआ, वहीं ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट्स की संक्रामकता दर चिंता बढ़ाने वाली है। इसके अलावा कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद लॉन्ग कोविड भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। कई लोगों में इससे संबंधित दिक्कतें, संक्रमण से ठीक होने के छह महीने से लेकर एक साल तक भी देखी जा रही हैं। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को कोरोना के दौरान और इससे ठीक होने के बाद भी बचाव के उपाय करते रहने की सलाह देते हैं।

लॉन्ग कोविड और इसके जोखिमों को लेकर अध्ययन कर रही शोधकर्ताओं की एक टीम ने बड़ा खुलासा किया है। शोध में पाया गया है कि अलग-अलग कोविड वैरिएंट से संक्रमण की स्थिति में लोगों में लॉन्ग कोविड के लक्षण भी भिन्न हो सकते हैं। वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, ये लक्षण बीमारी के समय से लेकर ठीक होने के बाद तक बने रह सकते हैं। इन लक्षणों को गंभीरता से लिए जाने की आवश्यकता है। आइए आगे की स्लाइडों में इस अध्ययन के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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कोविड-19 से ठीक होने के बाद की दिक्कतें - फोटो : iStock
लॉन्ग कोविड की समस्या को लेकर अध्ययन
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोविड-19 संक्रमण से रिकवरी के बाद भी कुछ लोगों में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं देखी जा रही हैं, इसे लॉन्ग या पोस्ट कोविड सिंड्रोम के तौर पर जाना जाता है। अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन लोगों को अल्फा या डेल्टा वैरिएंट का संक्रमण रह चुका है, उनमें ओमिक्रॉन संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों से अलग तरह के लॉन्ग कोविड के लक्षण हो सकते हैं। यह लक्षण वैरिएंट की प्रकृति पर निर्भर करते हैं। शोध के निष्कर्ष अगले महीने लिस्बन में यूरोपियन कांग्रेस ऑफ क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजी एंड इंफेक्शियस डिजीज (ECCMID 2022) में प्रस्तुत किए जाएंगे।
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पोस्ट कोविड की समस्याएं - फोटो : iStock
शोध में क्या पता चला?
इतालवी शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन में जून 2020 से लेकर जून 2021 तक केयरगी यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में पोस्ट कोविड का इलाज करा रहे 428 रोगियों के डेटा का अध्ययन किया गया। कोरोना के मूल वैरिएंट से संक्रमितों में लॉन्ग कोविड के रूप में मांसपेशियों में दर्द, अनिद्रा, तनाव-अवसाद जैसी दिक्कतें देखी जा रही थीं। वहीं डेल्टा वैरिएंट से संक्रमितों में लंबे समय तक स्वाद-गंध न आने जैसी दिक्कतें काफी सामान्य देखी गई हैं। वायरस अपनी प्रकृति के आधार पर लोगों के लिए समस्याओं का कारण बनता दिख रहा है।

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लंबे समय तक भी बनी रह सकती हैं दिक्कतें - फोटो : iStock
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
इटली स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ़ फ्लोरेंस के प्रोफेसर और प्रमुख शोधकर्ता डॉ. मिशेल स्पिनिकी कहते हैं, लॉन्ग कोविड की समस्या इस बात का सूचक है कि टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आ जाने का मतलब यह नहीं है कि आप पूरी तरह से ठीक हो गए हैं, आगे भी विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है। कई लोगों में यह दिक्कत एक साल तक बनी देखी गई है। संक्रमितों को ठीक होने के बाद भी लक्षणों की निगरानी करते रहना चाहिए।
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पोस्ट कोविड के जोखिम कारकों को जानिए - फोटो : iStock
लॉन्ग कोविड का जोखिम
अध्ययन के विश्लेषण के अनुसार, जो लोग गंभीर बीमारी से पीड़ित थे और इलाज के दौरान उन्हें इम्यूनोसप्रेसेन्ट दवाओं की आवश्यकता हुई थी, ऐसे लोगों में लॉन्ग कोविड के लक्षणों के रिपोर्ट करने की आशंका 6 गुना अधिक हो सकती है। वहीं जिन लोगों को ऑक्सीजन की आपूर्ति की आवश्यकता थी, उनमें पोस्ट कोविड के लक्षण होने की आशंका 40 प्रतिशत अधिक पाई गई है। 
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कोरोना से ठीक होने के बाद भी सावधानी जरूरी - फोटो : Pixabay
क्या है अध्ययन का निष्कर्ष?
अध्ययन में रोगियों में सबसे अधिक सूचित लॉन्ग कोविड के लक्षणों में से कुछ को सूचीबद्ध किया गया है। इनमें लोगों में सांस की तकलीफ (37%) और क्रोनिक थकान (36%),नींद की समस्या (16%), ब्रेन फॉग (13%) और नेत्र से संबंधित समस्याएं (13%) देखी गई हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना संक्रमण से ठीक हो जाने के बाद भी सेहत को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें। लॉन्ग कोविड लक्षणों का इलाज आवश्यक है। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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