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सावधान: कोल्ड ड्रिंक्स की हर बोतल में तय मात्रा से ज्यादा चीनी, ये हृदय-लिवर सभी के लिए नुकसानदायक

Mon, 17 Jun 2024 01:41 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोल्ड ड्रिंक्स के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : amarujala.com
गर्मियों में शरीर को ठंडक पहुंचाने के लिए अगर आप भी कोल्ड ड्रिंक जैसे मीठे पेय का सेवन करते हैं तो सावधान हो जाइए। जाने-अनजाने कोल्ड ड्रिंक की हर बोतल के साथ आपके शरीर में अधिक मात्रा में चीनी पहुंच रही होती है। इतनी चीनी जो न सिर्फ कुछ दिनों में आपमें मोटापे के जोखिमों को बढ़ा देती है, साथ ही टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग और लिवर में फैट जमा होने जैसी गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकती है।

मीठे पेय, स्पोर्ट्स ड्रिंक्स पीने को लेकर हाल में हुए कई अध्ययनों में लोगों को सावधान किया जाता रहा है। अमर उजाला में हाल ही में प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया था कि अगर आप हफ्ते में दो बार भी कोल्ड ड्रिंक्स पीते हैं तो इससे 50% तक हृदय रोगों का खतरा बढ़ सकता है। 

मीडिया रिपोर्ट्स बताते हैं कि देश में बिकने वाले ज्यादातर कोल्ड-स्पोर्ट्स ड्रिंक्स में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा तय मात्रा से चार-पांच गुना ज्यादा चीनी हो सकती है जबकि चीनी के अलावा हर बोतल में फास्फोरिक एसिड और कैफीन भी होती है, जिसकी अधिकता आपको बीमार, बहुत बीमार कर सकती है।



तो अगली बार कोल्ड ड्रिंक पीने से पहले सेहत के बारे में जरूर सोच लीजिएगा।
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कोल्ड ड्रिंक्स के नुकसान - फोटो : freepik.com
हर बोतल में शरीर के लिए हानिकारक तत्व

साइंस डायरेक्ट जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक ज्यादातर सॉफ्ट ड्रिंक्स के इंग्रेडिएंट्स (मिलाई जाने वाली चीजें) में ऐसे हानिकारक तत्व होते हैं जिनसे अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों प्रकार के दुष्प्रभावों का खतरा रहता है। कोल्ड ड्रिंक्स में पीनी, स्वीटनर (चीनी) कार्बन डाइऑक्साइड,आर्टिफिशियल फ्लेवर, रंग वाले एजेंट, एसिडुलेंट्स (खाद्य पदार्थों को तीखा, खट्टा या अम्लीय स्वाद देने वाले), रासायनिक प्रिजर्वेटिव्स मिलाए जाते हैं।

खास बात ये है कि कई कंपनियां रंगों की गुणवत्ता और कोल्ड ड्रिंक्स में मौजूद रसायनों की जानकारियां भी छिपाती हैं।
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कोल्ड ड्रिंक्स में चीनी की मात्रा - फोटो : istock
कोल्ड ड्रिंक्स में भर-भर के चीनी

अध्ययनकर्ता चीनी को 'व्हाइट पॉइजन' के रूप में वर्गीकृत करते हैं, जिसका अगर ज्यादा सेवन किया जाए तो इससे गंभीर बीमारियों का खतरा हो सकता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में मिलने वाली 750 एमएल की कोल्ड ड्रिंक्स की बोतल में 9-10 ग्राम तक चीनी हो सकती है। जबकि अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के विशेषज्ञ रोजाना 30 ग्राम से अधिक मात्रा में चीनी का सेवन न करने की सलाह देते हैं। यानी कि अगर आप दिन में दो-तीन बार भी कोल्ड ड्रिंक पी लेते हैं तो इससे शरीर में तय मात्रा से अधिक चीनी पहुंच जाती है।

इसके अलावा इनमें न तो फाइबर होता है न ही शरीर के लिए आवश्यक अन्य पोषक तत्व। मसलन हर बोतल के साथ शरीर में बड़ी मात्रा में ऐसे तत्व जा रहे होते हैं जिसके कारण आप कई क्रोनिक बीमारियों के शिकार हो सकते हैं।

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हृदय रोगों की समस्या - फोटो : istock
डायबिटीज-हार्ट सहित लिवर के लिए खतरनाक

कोल्ड ड्रिंक पीने के बाद भले ही कुछ मिनटों तक आप ठंडक महसूस करते हैं पर असल में इसके कई नुकसान हैं। मीठे पेय पदार्थ अत्यधिक मात्रा में फ्रुक्टोज से भरपूर होते हैं जिनका हमारा लिवर ठीक तरीक से ब्रेकडाउन नहीं कर पाता है। लिहाजा समय के साथ ये लिवर में वसा के रूप में एकत्रित होते जाते हैं। दीर्घकालिक रूप में कोल्ड ड्रिंक्स के कारण नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज का खतरा हो सकता है।

अध्ययनों में अत्यधिक फ्रुक्टोज को इंसुलिन प्रतिरोध का कारण बताया जाता रहा है, यही वजह है कि अगर आप अक्सर कोल्ड ड्रिंक्स पीते रहते हैं तो इससे टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम हो सकता है।

इसी तरह अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लीनिकल न्यूट्रिशियन में प्रकाशित अध्ययन की रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने बताया कि कम मात्रा में भी मीठे पेय के सेवन की आदत दिल की बीमारियों के जोखिम को 50 फीसदी तक बढ़ाने वाली हो सकती है। 
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हानिकारक हैं कोल्ड ड्रिंक्स - फोटो : istock
क्या कहती हैं विशेषज्ञ?

कोल्ड ड्रिंक्स और स्पोर्ट्स ड्रिंक्स कितने नुकसानदायक हैं इस बारे में अमर उजाला से बातचीत में लखनऊ स्थित अस्पताल में न्यूट्रिशनिस्ट गरिमा कसौधन बताती हैं, मीठे पेय की हर घूंट के साथ हमारे शरीर में अतिरिक्त चीनी पहुंच रही होती है। बिस्किट, सॉस, चाय-कॉफी आदि से पहले से ही हम जाने-अनजाने ज्यादा चीनी ले रहे होते हैं, ऊपर से कोल्ड ड्रिंक्स इन जोखिमों को और बढ़ा देते हैं। बाजार में जीरा-आम, संतरे के नाम पर बिकने वाले पेय में असल में स्वाद के लिए रासायनिक फ्लेवर अधिक होते हैं जबकि इनकी असली मात्रा बहुत ही कम।

बच्चों में बढ़ते मोटापे और शराब न पीने वाले लोगों में फैटी लिवर की समस्या के लिए ऐसे पेय को प्रमुख कारण माना जा सकता है।


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स्रोत और संदर्भ
Effects of Soft Drink Consumption on Nutrition and Health: A Systematic Review and Meta-Analysis

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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