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Latest Study: कैंसर से होने वाली मौत के लिए ये कारण हैं सबसे ज्यादा जिम्मेदार, अधिकतर भारतीयों में यह समस्याएं

Sat, 20 Aug 2022 02:59 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कैंसर के जोखिम कारकों को लेकर अलर्ट - फोटो : Pixabay
कैंसर वैश्विक स्तर पर मृत्य के प्रमुख कारणों में से एक है, हर साल लाखों लोगों की मौत अलग-अलग प्रकार के कैंसर के कारण हो जाती है। हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने कैंसर से होने वाली मौत के संभावित कारणों के बारे में जानने की कोशिश की। शोधकर्ताओं ने इसके लिए जिन तीन कारणों को प्रमुख रूप से रेखांकित किया है, भारत की बड़ी आबादी में यह समस्याएं अधिक देखी जाती रही हैं।

द लैंसेट जर्नल में प्रकाशित इस शोध में विशेषज्ञों ने बताया कि धूम्रपान, शराब का सेवन और हाई बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) वाले लोगों में कैंसर से संबंधित मौत का खतरा अधिक होता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर वैश्विक स्तर कैंसर के बढ़ती मृत्युदर को नियंत्रित करना है कि इन तीनों कारकों को लेकर लोगों को विशेष रूप से सचेत करने की आवश्यकता है।

2019 ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज, इंजरीज एंड रिस्क फैक्टर्स (जीबीडी) अध्ययन के आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद शोधकर्ता इस निष्कर्ष पर पहुंचे। इसमें कैंसर के तमाम प्रकारों और इसके मृत्यु से संबंधित जोखिम कारकों का अध्ययन किया गया। अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि कैंसर से संबंधित मौत के आंकड़ों को बढ़ाने में दुनियाभर में धूम्रपान, शराब का सेवन और हाई बीएमआई को प्रमुख कारक के तौर पर देखा गया है। आंकड़े बताते हैं कि साल 2019 में दुनियाभर में कैंसर से होने वाली मौतों के करीब 44.4 प्रतिशत मामलों में रोगियों में इन तीनों की प्रमुख भूमिका देखी है। अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि सभी लोगों को इसको लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।
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धूम्रपान के कारण बढ़ता कैंसर का खतरा - फोटो : Pixabay
कैंसर के जोखिम कारकों को जानिए

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) कहता है, एक डीएएलवाई, स्वस्थ जीवन के एक वर्ष कम होने के बराबर होती है। इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने डीएएलवाई यानि कि डिसेबिलिटी एडजेस्टेड लाइफ इयर के संदर्भ में जोखिम कारकों को समझने की कोशिश की। इस आधार पर किए गए अध्ययन के विश्लेषण में शोधकर्ताओं ने  कैंसर से संबंधित डीएएलवाई के लिए पुरुषों में तंबाकू के सेवन को प्रमुख जोखिम कारक के रूप में पाया गया है।

यह साल 2019 में पुरुषों में सभी प्रकार के कैंसर डीएएलवाई का 33.9 प्रतिशत था। इसका मतलब है कि जो पुरुष किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं, उनके अधिक समय तक जीवित रहने की संभावना कम हो जाती है।
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हाई बीएमआई औऱ कैंसर का गंभीर खतरा - फोटो : iStock
क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता?

अमेरिका स्थित वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (IHME) के निदेशक क्रिस्टोफर मरे कहते हैं, यह शोध बताता है कि कैंसर का बोझ वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है जो साल दर साल तेजी से बढ़ती जा रही है। अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि इस तरह के जोखिम को गंभीरता से लेते हुए नीति निर्माताओं को इसके रोकथाम को लेकर प्रयास करने की आवश्यकता है।

धूम्रपान कैंसर के लिए प्रमुख जोखिम कारक है, इसके अलावा शराब का सेवन और हाई बीएमआई भी गंभीर खतरे का कारण बन सकती है।

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कैंसर को जोखिम कारकों को समझें - फोटो : istock
तंबाकू और शराब का सेवन बहुत नुकसानदायक

शोधकर्ताओं ने अध्ययन के विश्लेषण में पाया कि दुनियाभर में बढ़ते कैंसर के खतरे और इसके कारण होने वाली मौत के लिए तंबाकू और शराब का सेवन, असुरक्षित यौन संबंध और आहार संबंधी जोखिम तथा लोगों में बढ़ता मोटापा काफी खतरनाक है, इन सभी कारकों को नियंत्रित करना बहुत आवश्यक है।

विशेषज्ञों ने बताया कि पुरुषों और महिलाओं दोनों में इन जोखिम कारकों की पहचान की गई है। जिन कैंसर पीड़ितों में इस तरह के जोखिम कारक होते हैं, उनकी अन्य रोगियों की तुलना में अधिक समय तक जीवित रहने की संभावना भी कम हो जाती है।
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कैंसर से बचाव के उपाय जरूरी - फोटो : iStock
अध्ययन का निष्कर्ष

अध्ययन के निष्कर्ष में वैज्ञानिकों ने बताया कि तंबाकू-शराब के सेवन और हाई बीएमआई के कारण कैंसर रोगी 15 लाख महिलाओं की तुलना में 28 लाख पुरुषों की मौत के लिए हुई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन तीनों को नियंत्रित कर लिया जाए तो न सिर्फ कैंसर के मामलों, बल्कि इसके कारण होने वाली मौत के आंकड़ों को भी भविष्य में कम किया जा सकता है।


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स्रोत और संदर्भ
The global burden of cancer attributable to risk factors, 2010–19: a systematic analysis for the Global Burden of Disease Study 2019

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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