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Lancet Study: कोरोना से बचाव के लिए वैज्ञानिकों ने पता लगा लिया सबसे प्रभावी तरीका, नए वैरिएंट्स पर भी हो सकता है असरदार

Tue, 26 Apr 2022 02:01 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना संक्रमण से कैसे बचें? - फोटो : Pixabay
वैश्विक स्तर पर जारी कोरोना महामारी इस समय लोगों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। पिछले कुछ समय से भारत सहित दुनिया के कई अन्य देशों में बढ़ते संक्रमण के मामले डराने वाले हैं। ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट्स की जिस तरह से संक्रामकता दर देखी जा रही है, वह निश्चित ही चिंता बढ़ाने वाली है। शोध में वैज्ञानिकों का कहना है कि सभी लोगों को कोरोना संक्रमण से बचाव के उपायों का लगातार पालन करते रहना चाहिए, यही फिलहाल संक्रमण पर काबू पाने में मददगार हो सकता है। इसके साथ ही शोधकर्ता वैक्सीनेशन पर भी लगातार जोर दे रहे हैं। वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके लोगों में संक्रमण की स्थिति में गंभीर रोग और इसके कारण होने वाली मौत का खतरा कम होता है।

इस बीच एक हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने कोविड-19 से बचाव को लेकर सबसे प्रभावी तरीके का दावा किया है। द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि अगर लोगों को मिक्स एंड मैच वैक्सीन का बूस्टर शॉट दिया जाए तो उन्हें कोविड-19 से अधिक सुरक्षित किया जा सकता है। मिक्स एंड मैच वैक्सीनेशन का मतलब, आपको जिस वैक्सीन की पहली दो डोज लगी है, उससे अलग किसी अन्य वैक्सीन का बूस्टर शॉट देने से है। आइए इस अध्ययन के बारे में आगे विस्तार से जानते हैं।
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बूस्टर खुराक से मिलेगी अतिरिक्त सुरक्षा - फोटो : Istock
बूस्टर डोज से मिल सकती है अतिरिक्त सुरक्षा

अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि वैक्सीन की दो डोज की तुलना में अगर तीसरी या बूस्टर डोज लगाई जाए तो इससे अतिरिक्त सुरक्षा मिल सकती है। वहीं शोध में पाया गया है कि इसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए मिक्स एंड मैच वैक्सीन प्रणाली को प्रयोग में लाना कारगर हो सकता है।

शोध में पाया गया कि जिन लोगों को कोरोनावैक वैक्सीन की पहली दो खुराक लगी थी, उन्हें फाइजर या एस्ट्राजेनेका वैक्सीन का बूस्टर शॉट देकर संक्रमण और रोग के खिलाफ अधिक प्रभावी ढंग से सुरक्षा दी जा सकती है। वैज्ञानिकों ने पाया कि ऐसा करके कोरोना के अत्याधिक संक्रामक वैरिएंट्स से भी अतिरिक्त सुरक्षा पाई जा सकती है।
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मिक्स एंड मैच वैक्सीन बूस्टर शॉट - फोटो : पीटीआई
अध्ययन में क्या पता चला?

चिली के विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर चिली के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत किए गए इस सर्वे में मिक्स एंड मैच वैक्सीन बूस्टर शॉट की प्रभाविकता के बारे में पता चलता है। इस शोध के लिए 11,174,257 लोगों को शामिल किया गया, जिनमें से 41 लाख से अधिक लोगों को कोरोनावैक वैक्सीन की दो डोज लग चुकी थी।

अध्ययन अवधि के दौरान इन लोगों को वैक्सीन की बूस्टर खुराक देकर इसके प्रभावों को जानने की कोशिश की गई। इनमें से 1,921,340 प्रतिभागियों को एस्ट्राजेनेका, 2,019,260 को फाइजर और 1,86,946 को कोरोनावैक का ही तीसरा शॉट दिया गया।

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बूस्टर शॉट की प्रभाविकता - फोटो : पीटीआई
गंभीर मामलों से बचाव में मददगार है  मिक्स एंड मैच बूस्टर शॉट

अलग-अलग वैक्सीन के बूस्टर शॉट के प्रभाव के इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों को कोरोनावैक की ही तीसरी खुराक दी गई उनमें कोविड-19 रोगसूचकों को रोकने की प्रभावशीलता 79 प्रतिशत के करीब पाई गई। वहीं जिन लोगों को एस्ट्राजेनेका बूस्टर शॉट दिया गया उन्हें 93 प्रतिशत, जबकि फाइजर बूस्टर शॉट वालों को 97 प्रतिशत तक सुरक्षित पाया गया। इस आधार पर विशेषज्ञों का कहना है कि बूस्टर शॉट में अगर पहले से अलग कंपनी की वैक्सीन दी जाए तो लोगों की रोग के प्रति प्रभावशीलता को बढ़ावा दिया जा सकता है। 
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कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीनेशन जरूरी - फोटो : PTI
बूस्टर शॉट को लेकर जोर

अध्ययन के लेखकों ने बताया कि बूस्टर शॉट के लिए मिक्स एंड मैच वैक्सीन प्रणाली का उपयोग करना, कोविड-19 के कारण अस्पताल में भर्ती होने, वेंटिलेटर पर जाने और मृत्य के जोखिम को काफी हद तक कम करने में सहायक हो सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि कई अध्ययन इस ओर इशारा करते हैं कि वैक्सीन की दो डोज से बनी प्रतिरक्षा प्रणाली कुछ समय के बाद कम होने लगती है, ऐसे में यह तरीका काफी मददगार हो सकता है।
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नए वैरिएंट्स से सुरक्षा देगी वैक्सीन - फोटो : istock
क्या है अध्ययन का निष्कर्ष?

अध्ययन के निष्कर्ष में बूस्टर शॉट के तौर पर  मिक्स एंड मैच वैक्सीन प्रणाली को प्रयोग में लाने के साथ वैज्ञानिकों ने तीसरी डोज की जरूरतों पर भी जोर दिया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि जिस तरह से वैश्विक स्तर पर अत्याधिक संक्रामकता वाले नए वैरिएंट्स के मामले सामने आए हैं, ऐसे में लोगों को सुरक्षित रखने के लिए बूस्टर शॉट काफी जरूरी हो गया है।

बूस्टर शॉट इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ऐसे डेटा प्राप्त हो रहे हैं जिनसे पता चलता है कि फाइजर और मॉडर्न जैसी एमआरएनए तकनीक की वैक्सीन नए वैरिएंट्स के खिलाफ ज्यादा असरदार नहीं पाई गई हैं।



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स्रोत और संदर्भ
Effectiveness of homologous and heterologous booster doses for an inactivated SARS-CoV-2 vaccine: a large-scale prospective cohort study


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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