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डेंगू और चिकनगुनिया के बुखार में ये होता है सबसे बड़ा अंतर, जानें लक्षण और बचाव

Fri, 14 Sep 2018 09:05 AM IST
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया ये सभी जानलेवा बीमारियां मच्छर के काटने से फैलती हैं । बावजूद इसके इन सभी बीमारियों के लक्षण और इलाज में काफी फर्क होता है।हर साल मौसम बदलते ही ये बीमारियां अपने चरम पर रहती हैं और ज्यादातर लोग इन बीमारियों के बीच का फर्क समझ नहीं पाते।जिसकी वजह से रोगी का इलाज सही ढंग से नहीं हो पाता। आइए जानते हैं मच्छर से होने वाली इन दोनों बीमारियां के बीच आखिर क्या बड़ा फर्क है। 
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चिकनगुनिया और डेंगू  के लक्षण
-चिकनगुनिया और डेंगू में आने वाले बुखार के लक्षण लगभग एक जैसे ही होते हैं। हालांकि माना जाता है कि डेंगू का वायरस चिकनगुनिया के वायरस से ज्यादा खतरनाक होता है। डेंगू में लगातार गिरते प्लेटलेट्स की वजह से व्यक्ति को बेहद कमजोरी महसूस होती है। जबकि चिकनगुनिया से व्यक्ति 1 से 12 दिन तक पीड़ित रहता है। इसकी वजह से शरीर में कई सालों तक दर्द बना रहता है। 
- चिकनगुनिया के मरीज को जोड़ों में तेज दर्द होता है। यही दर्द डेंगू और चिकनगुनिया के मरीजों को लक्षणों में एक-दूसरे से अलग करता है। कुछ लोगों को इस दर्द से राहत पाने में 6 महीने से 1 साल तक का वक्त लग जाता है।चिकनगुनिया में हथेलियों और पावों के साथ पूरे शरीर पर रेशैज हो जाते हैं। वहीं, डेंगू में चेहरे और चमड़ी पर लाल रेशैज होते हैं। 
-बुखार के कारण आमतौर पर भी मरीज के शरीर में दर्द होता है, लेकिन चिकनगुनिया से पीड़ित व्यक्ति के पूरे शरीर में काफी दर्द रहता है। मरीज का पूरा शरीर दर्द से टूट रहा होता है। सबसे ज्यादा तकलीफ जोड़ों के दर्द के कारण होती है।डेंगू में दर्द अधिक होने की वजह से ब्लिडिंग और सांस लेने में भी दिक्कत आ सकती है।  
-चिकनगुनिया के मरीज के शरीर पर लाल रंग के रैशेज हो जाते हैं। रोगी के शरीर पर खुजली हो सकती है। उसके शरीर पर चकत्ते भी निकल सकते हैं। 
- चिकनगुनिया वायरस का सीधा असर जॉइंट्स पर होता है। जिसकी वजह से लोग दर्द से बेचैन हो जाते हैं। 
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बचाव 
- चिकनगुनिया से बचने के लिए फिलहाल कोई टीका अभी तक उपलब्ध नहीं हो पाया है। इस बीमारी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है खुद को मच्छरों से बचाए रखें। 
- अपने घर के आसपास की जगह पर सफाई रखें। 
- घर के पास पानी ना जमा होने दें। बात दें, डेंगू और चिकनगुनिया के मच्छर साफ पानी में ही पैदा होते हैं। 
- चिकनगुनिया के मच्छर ज्यादातर दिन के समय काटते हैं। इसलिए सिर्फ रात ही नहीं बल्कि दिन में भी मच्छरों से बचाव जरूरी है। इनसे बचने के लिए मच्छरदानी का इस्तमाल करें। 
- इस मौसम में कोशिश करें कि हमेशा पूरी बाजू के ही कपड़े पहनें। 
- लक्षणों के आधार पर डॉक्टर से सलाह लेकर ही दवा लें। डॉक्टर को दिखाए बिना अपनी मर्जी से ही कोई दवा लेने की भूल बिल्कुल ना करें। 

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उपचार-
औषधीय गुणों से भरी तुलसी का प्रयोग, चिकनगुनिया में अमृत के समान है। नीम की गिलोय, सोंठ, छोटी पीपल और गुड़ के साथ तुलसी का काढ़ा बनाकर चिकनगुनिया के रोगी को पीने के लिए दें। मात्र 3 खुराक में यह घरेलू दवा चिकगुनिया के रोगी को इस बीमारी से छुटकारा दिला सकती है।

आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार गिलोय एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है, डेंगू में इसके पत्तों के रस का सेवन करने से लाभ मिलता है। डेंगू का बुखार 5 से 6 दिन के अंदर अपना असर दिखाना शुरू कर देता है। जिसकी वजह से शरीर में तेजी से प्लेटलेट्स का स्तर कम होने लगता है। इससे निजात पाने के लिए गिलोय और 7 तुलसी के पत्तों का रस पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यह रक्त के प्लेटलेट्स का स्तर भी बढ़ाता है। गिलोय की कड़वाहट को कम करने के लिए इसे किसी अन्य जूस में मिलाकर पी सकते हैं।
 
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इंटरनेशनल मेडिकल एसो. के मुताबिक अगर डेंगू के मरीज का प्लेटलेट्स काउंट 10,000 से ज्यादा हो तो प्लेटलेट्स ट्रांसफ्यूजन की जरूरत नहीं होती और ना ही यह खतरे का संकेत है। लेकिन अगर डेंगू के मरीज का प्लेटलेट्स काउंट 10,000 से कम होने लगें तो खतरनाक हो सकता है।
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