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विशेषज्ञ से जानिए: क्या गर्मियों में नहीं करना चाहिए काढ़े का सेवन? किन बातों का ध्यान रखना जरूरी?

Sun, 13 Jun 2021 05:59 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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काढ़ा पीने के तमाम फायदे - फोटो : Social media
Medically reviewed by-
डॉ राजीव रंजन
(एमडी, लैब मेडिसिन)
एम्स, दिल्ली


कोरोना महामारी से सुरक्षित रहने के लिए बचाव को ही विशेषज्ञ सबसे बेहतर उपाय मानते हैं। लोगों से बार-बार मास्क लगाने, हाथों को धोते रहने और भीड़भाड़ वाली जगहों पर न जाने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा आहार में विटामिन सी और डी के साथ जिंक के सेवन और दिन में दो से तीन बार काढ़ा पीने को भी काफी फायदेमंद माना जाता है। हालांकि कई रिपोर्टस में ऐसा दावा किया जा रहा है कि काढ़े का ज्यादा सेवन करना लिवर के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
चूंकि अब गर्मियों का मौसम है, और काढ़े में इस्तेमाल की जाने वाली ज्यादातर औषधियां शरीर में गर्मी पैदा करती हैं, ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि गर्मी के मौसम में काढ़े का सेवन करते रहना चाहिए या नहीं? कई विशेषज्ञों का मानना है कि काढ़े का सेवन श्वसन तंत्र से संबंधित समस्याओं को दूर करने में काफी कारगर है, यही कारण है कि कोरोना के दौर में काढ़े के सेवन पर जोर दिया जाता रहा है।
 
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गर्मियों में काढ़े का सेवन - फोटो : iStock
कोरोना में काढ़े का सेवन
विशेषज्ञों के अनुसार, काढ़े का सेवन प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने में काफी मददगार हो सकता है। चूंकि इसमें तमाम तरह की जड़ी-बूटियों और मसालों को प्रयोग में लाया जाता है जोकि स्वाभाविक रूप से एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होती हैं, ऐसे में यह प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने में मदद कर सकती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों को कोरोना वायरस का संक्रमण होने का खतरा अधिक रहता है, ऐसे में काढ़े का सेवन प्रतिरक्षा को बढ़ाने के साथ कोरोना से सुरक्षा देने में सहायक हो सकता है। हालांकि, इसका ज़्यादा सेवन करना शरीर के लिए की तरह से नुकसानदायक भी हो सकता है।
 
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ज्यादा काढ़े का सेवन नुकसानदायक - फोटो : Social media
गर्मियों में काढ़े का सेवन
चूंकि काढ़े में उपयोग की जाने वाली ज्यादातर सामग्री गर्म प्रकृति की होती है, इसलिए लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या गर्मी के दिनों में काढ़े का सेवन करना चाहिए? स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक काढ़ा एक स्वस्थ पेय है और ठंड तथा शुष्क मौसम में इसका सेवन बहुत फायदेमंद होता है। हालांकि गर्मी के मौसम में इसका अधिक मात्रा में सेवन कई तरह की समस्याओं जैसे एसिडिटी, उच्च रक्तचाप, घबराहट, नाक से खून आने और मतली का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक चूंकि इस समय का मौसम काफी गर्म है ऐसे में काढ़ा का बहुत ज्यादा सेवन नुकसानदायक हो सकता है।

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काढ़े के सेवन के समय इन बातों का रखें ध्यान - फोटो : istock
गर्मियों में काढ़े के सेवन के दौरान यह बातें ध्यान में रखें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसा नहीं है कि गर्मियों में बिल्कुल भी काढ़े का सेवन नहीं करना चाहिए, हालांकि इसके सेवन के समय इन बातों को जरूर ध्यान में रखें।
  • जागने के एक घंटे बाद या शाम को 4 से 5 बजे के बीच काढ़े का सेवन कर सकते हैं।
  • खाली पेट काढ़े का सेवन न करें क्योंकि इसमें मौजूद तत्व एसिडिटी का कारण बन सकते हैं। इसका सेवन नाश्ते के बाद कर सकते हैं।
  • एक बार में 150 मिली से ज्यादा काढ़े का सेवन न करें। इसका बहुत अधिक सेवन मिचली और उल्टी की समस्या का कारण बन सकता है।
  • गर्मियों के दौरान काढ़े में काली मिर्च और अदरक जैसी गर्म सामग्रियों का इस्तेमाल कम करें।
  • काढ़े में शहद मिलाएं, यह एसिडिटी और छाती में जलन की समस्या को कम कर देती है।
  • अगर आप डायबिटिक हैं तो काढ़े में ज्यादा शहद या मुलेठी को शामिल न करें।
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ज्यादा काढ़े के कई नुकसान - फोटो : Pixabay
काढ़े के कारण लिवर की भी हो सकती है समस्या
काढ़े के सेवन के बारे में एम्स दिल्ली के डॉक्टर राजीव रंजन बताते हैं कि किसी भी चीज का ज्यादा सेवन करना हमारी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। एक दिन में एक कप से ज्यादा काढ़े का सेवन नहीं करना चाहिए। डॉ. राजीव रंजन ने एक मरीज के जिक्र करते हुए बताया कि उनके पास एक मरीज आया जिसकी आंखें पीली थी। मरीज से पूछताछ में पता चला कि कोरोना से बचने और इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए वह दिन में दो से तीन बार पानी में हल्दी डालकर और इतनी बार ही काढ़े का सेवन करता था। इसके चलते मरीज के शरीर में बिलीरुबीन का स्तर बढ़ गया, जिसका असर उसके लिवर पर भी देखने को मिला। 

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नोट: यह लेख डॉक्टर राजीव रंजन (एमडी, लैब मेडिसिन) एम्स, के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। डॉक्टर राजीव को कोरोना के रोगियों के इलाज का अनुभव है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
 
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