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Joint Pain: घुटनों में दर्द के कारण चलना-फिरना हो गया है मुश्किल? कैसे पाएं इससे आराम

Thu, 22 Jan 2026 08:03 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त होने से भी आपके घुटने के जोड़ों पर तनाव बढ़ जाता है, इसके कारण सामान्य गतिविधियों जैसे चलने या सीढ़ियां चढ़ने तक में भी कठिनाई होती है। इसके अलावा शारीरिक निष्क्रियता भी घुटने के दर्द की समस्या को बढ़ाने वाली हो सकती है।
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घुटने का दर्द - फोटो : Adobe Stock
घुटने और जोड़ों के दर्द की समस्या आम होती जा रही है। पहले ये अक्सर बुजुर्गों में देखी जाती थी पर जिस तरह से लोगों की लाइफस्टाइल खराब हो गई है, युवाओं में भी जोड़ों की समस्याएं काफी बढ़ गई है। ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करना, अधिक वजन और शारीरिक गतिविधियों में कमी के चलते बड़ी संख्या में लोग दर्द से परेशान देखे जा रहे हैं।

घुटना हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण जोड़ होता है, जो चलने, उठने-बैठने, सीढ़ियां चढ़ने और रोजमर्रा के कामों में मदद करता है। यही कारण है कि घुटनों में होने वाली किसी भी समस्या का असर पूरे शरीर पर पड़ सकता है। समय रहते इसके कारणों को समझना और सही इलाज करना जरूरी है। इसे अगर नजरअंदाज कर दिया जाए तो सर्जरी तक की नौबत आ सकती है।

घुटने और जोड़ों के दर्द का सबसे बड़ा कारण ऑस्टियोआर्थराइटिस है, इसमें समय के साथ जोड़ों की कार्टिलेज घिसने लगती है। इस तरह की दिक्कतों से बचे रहने के लिए कम उम्र से ही सतर्क हो जाना चाहिए।
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जोड़ों के दर्द का शरीर पर असर - फोटो : Freepik.com
पूरे शरीर पर हो सकता है असर

घुटनों का दर्द पूरे शरीर को प्रभावित कर सकता है। दर्द के कारण चलना-फिरना कम हो जाता है, जिससे मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। शारीरिक गतिविधि घटने से वजन बढ़ता है और हृदय, शुगर व ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। घुटने में होने वाला दर्द वैसे तो गंभीर नहीं होता लेकिन चोट, ऑस्टियोआर्थराइटिस, जोड़ों में तनाव आदि का अगर समय रहते इलाज न किया जाए तो इसके गंभीर रूप लेने का खतरा हो सकता है।

अब सवाल ये है कि क्या उपाय किए जाएं कि घुटनों की समस्या दूर रहे?
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गठिया से बचाव के लिए व्यायाम जरूरी - फोटो : Freepik.com
घुटनों की समस्या से बचाव के लिए व्यायाम जरूरी

नियमित व्यायाम की आदत आपके घुटने की समस्याओं को कम करने में मददगार हो सकती है। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग व्यायाम, क्वाड्रिसेप्स और हैमस्ट्रिंग की मांसपेशियों को केंद्रित करती है, जिससे दर्द को कम करने में मदद मिल सकती है। शरीर के सक्रिय रहने से वजन को नियंत्रित करने और मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है, इससे भी घुटनों को स्वस्थ रखा जा सकता है। गठिया जैसी समस्याओं से बचाने में भी व्यायाम की भूमिका महत्वपूर्ण है।


सूजन कम करने वाले आहार का करें सेवन

ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर आहार जैसे अखरोट, अलसी और मछली सूजन कम करने में मदद करते हैं। वहीं कैल्शियम और विटामिन-डी हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। इससे भरपूर चीजों को नियमित रूप से आहार का हिस्सा बनाएं। ये पोषक तत्व शरीर को स्वस्थ रखने के साथ घुटनों की दिक्कतों को भी कम करते हैं। इसके अलावा प्रोसेस्ड फूड और ज्यादा नमक-सुगर सूजन बढ़ा सकते हैं, इसलिए इनसे बचना चाहिए।
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वजन कंट्रोल में रखना जरूरी - फोटो : Freepik.com
वजन को रखें कंट्रोल

शरीर का अधिक वजन, घुटने के दर्द को बढ़ाने वाला हो सकता है। यह गठिया के भी कारणों में से एक है। वजन अधिक होने से जोड़ों पर दबाव बढ़ता है जिससे वहां की मांसपेशियां प्रभावित हो सकती हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि अगर नियमित व्यायाम किया जाए तो यह वजन को कंट्रोल में रखने और आर्थराइटिस के खतरे को कम करने में मदद कर सकती है। 


जूतों का सही चयन जरूरी

अक्सर हम सभी ध्यान नहीं देते हैं पर खराब क्वालिटी के जूते, ऊंची एड़ी वाली सैंडिल भी जोड़ों और घुटनों में समस्याओं का कारण बन सकती हैं। इसलिए अच्छे और आरामदायक जूते पहनें। विशेषतौर पर जिन लोगों को गठिया की दिक्कत है उन्हें इसपर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। सही जूते एड़ी और घुटनों की कई प्रकार की समस्याओं से आपको बचाने में मददगार हो सकते हैं।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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