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विशेषज्ञ से जानिए कि पीरियड्स के दौरान महिलाओं के लिए कोरोना का टीका सुरक्षित है या नहीं?

Wed, 28 Apr 2021 02:02 AM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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चिकित्सक के अनुसार यह एक गलत धारणा है - फोटो : Social Media

Medically Reviewed by Dr. kiran Coelho
डॉ किरण कोइलो, कंसल्टेंट गायनेकोलॉजिस्ट एंड ऑब्सटेट्रिक्स,
पी.डी हिंदूजा हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर, खार फैसिलिटी
डिग्री- एमबीबीएस, एमडी, स्पेशल ट्रेनिंग- इनफर्टिलिटी, एंडोस्कोपिक सर्जरी, हाई रिस्क ऑब्सटेट्रिक्स 
अनुभव- 30 वर्ष से अधिक 
इन दिनों एक अफवाह सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रही है कि मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को कोरोना का टीका नहीं लगवाना चाहिए क्योंकि इन दिनों महिलाओं का शरीर कमजोर हो जाता है, उनके शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है। जबकि चिकित्सक के अनुसार यह एक गलत धारणा है और इसमें किसी भी प्रकार का वैज्ञानिक या जैविक सत्य नहीं दिखाई पड़ता है। अगली स्लाइड्स से जानिए मासिक धर्म के दौरान टीका लगवाने से क्यों कोई नुकसान नहीं है।  

 

 

 

 

 

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कोई अतिरिक्त शारीरिक समस्या नहीं होगी - फोटो : Pixabay

आ सकता है बुखार 
वास्तव में, महिलाएं मासिक धर्म के दौरान कोरोना के अलावा भी कोई वैक्सीन ले सकती हैं और उन्हें उससे किसी प्रकार का नुकसान नहीं है। वैक्सीन लगने के बाद जिस तरह से एक सामान्य व्यक्ति को बुखार, शरीर-दर्द आदि लक्षण दिखाई देते हैं, एक महिला जो कि मासिक धर्म के दौरान टीका लगवाती है, उसे भी यही लक्षण दिखाई देंगे, इसके अतिरिक्त कुछ नहीं इसलिए मासिक धर्म के दौरान महिला को टीका लगाने से कोई अतिरिक्त शारीरिक समस्या नहीं होगी। 

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टीका लगवाने में कोई जोखिम नहीं है - फोटो : social media

नहीं है किसी प्रकार का जोखिम 
मासिक धर्म के दौरान या पीरियड्स के कुछ दिनों के बाद या पहले भी महिलाओं की जीवनशैली सामान्य ही होती है इसलिए टीका लगवाने में कोई जोखिम नहीं है। फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गाइनोकोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया ने भी लोगों से इन अफवाहों पर विश्वास नहीं करने और वैक्सीन लेने का मौका न गंवाने का आग्रह किया है।

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ऐसा संकेत नहीं है कि मरीज को टीका नहीं लगाया जाना चाहिए - फोटो : Pixabay

शारीरिक परिवर्तन गंभीर नहीं है
यहां तक कि एफआईजीओ ने भारत को सलाह दी है कि यदि कोई मरीज गर्भवती है या स्तनपान करा रही है, तो भी यह ऐसा संकेत नहीं है कि मरीज को टीका नहीं लगाया जाना चाहिए। मासिक धर्म के दौरान, एक महिला कुछ शारीरिक परिवर्तनों का अनुभव करती है, लेकिन ये परिवर्तन टीकाकरण से बचने के लिए इतने गंभीर नहीं हैं।

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रोगियों को अनियमित पीरियड्स की शिकायत करते देखा है - फोटो : social media

तनाव से होते हैं अनियमित पीरियड्स
चिकित्सक कहती हैं कि कोरोनाकाल के दौरान, हमने कई रोगियों को अनियमित पीरियड्स की शिकायत करते देखा है। इस दौरान बहुत सी महिलाएं तनाव में थीं, तनाव एक ऐसा कारक है जो कि आपके मासिक धर्म चक्र को प्रभावित करने में प्रमुख भूमिका निभाता है। संभव है कि जब एक महिला को कोविड -19 टीका दिया जाएगा, लोग अनियमित पीरियड्स को कोविड वैक्सीन से जोड़कर करेंगे, लेकिन वास्तव में यह तनाव का इसमें योगदान है। 

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संक्रमण का खतरा आगे चलकर और भी बढ़ सकता है - फोटो : पीटीआई

वैक्सीन न लेना कोई समाधान नहीं 
अमेरिकन कॉलेज ऑफ ओब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट (एसीओजी) और इंडियन कॉलेज ऑफ ओब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट (आईसीओजी) के बहुत सारे वैश्विक अध्ययन और वैज्ञानिक सबूत हैं, जो उन अफवाहों की निंदा करते हैं जो चारों ओर तैर रही हैं। ये अफवाहें महिलाओं को वैक्सीन लेने से रोक रही हैं जिससे कि संक्रमण का खतरा आगे चलकर और भी बढ़ सकता है।

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कुछ दिनों बाद वैक्सीन लेने का विकल्प चुन सकती हैं - फोटो : सोशल मीडिया

टीका लगवाने का निर्णय होता है व्यक्तिगत 
मासिक धर्म के दौरान, हार्मोन एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन शरीर में कम हो जाते हैं, जिसके कारण रक्तस्राव होता है। दर्द होने पर कई लोग दर्द निवारक लेने लगते हैं। यह एक महिला पर ही निर्भर करता है कि अगर वे हर महीने बेहद दर्दनाक दौर से गुजर रही है, तो वह कुछ दिनों बाद वैक्सीन लेने का विकल्प चुन सकती हैं। हालांकि, मासिक धर्म के दौरान टीके से बचना अनिवार्य नहीं है।

नोट- यह लेख पी.डी हिंदूजा हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर, खार फैसिलिटी की कंसल्टेंट गायनेकोलॉजिस्ट एंड ऑब्सटेट्रिक्स डॉक्टर किरण कोइलो से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। डॉक्टर किरण कोइलो को 30 वर्ष से अधिक का अनुभव है। उन्होंने अपनी डिग्रियां कर्नाटक मेडिकल कॉलेज एवं ग्रांट मेडिकल कॉलेज, मुंबई से ली है।

अस्वीकरण- अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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