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सावधान: सिर्फ चिंता-तनाव ही नहीं, आयरन की कमी भी बन सकती है डिप्रेशन का कारण, महिलाओं में खतरा अधिक

Sun, 01 Jan 2023 06:56 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डिप्रेशन के खतरे के बारे में जानिए - फोटो : istock
मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना मौजूदा समय की प्राथमिकता है। चिंता-तनाव जैसी स्थितियों को अनदेखा करना अवसाद जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है, यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को स्वस्थ जीवनशैली और आहार पर गंभीरता से ध्यान देने की सलाह देते हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में भी तेजी डिप्रेशन का जोखिम बढ़ रहा है, कम उम्र में ही लोग इस समस्या के शिकार देखे जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ चिंता-तनाव की स्थिति ही नहीं, आपके आहार में पौष्टिकता की कमी के कारण भी डिप्रेशन होने का खतरा हो सकता है। इसके लिए अध्ययनों में शरीर में आयरन की कमी को एक कारण के रूप में देखा गया है।

आयरन, शरीर के लिए एक आवश्यक खनिज है जो स्वाभाविक रूप से कई खाद्य पदार्थों में मौजूद होता है। आयरन हीमोग्लोबिन का एक आवश्यक घटक है, हीमोग्लोबिन वह प्रोटीन है जो पूरे शरीर में ऑक्सीजन युक्त रक्त के संचार में मदद करता है। अध्ययनों में पाया गया है कि जिन लोगों में आयरन की कमी होती है, उनमें अन्य लोगों की तुलना में मानसिक स्वास्थ्य विकार, विशेषतौर पर डिप्रेशन होने का खतरा अधिक हो सकता है। आइए इस बारे में जानते हैं।
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आयरन की कमी के कारण होने वाली समस्या - फोटो : Pixabay
आयरन की कमी और डिप्रेशन का खतरा

शोधकर्ताओं की टीम ने एक अध्ययन में पाया कि आयरन की कमी की स्थिति डिप्रेशन के जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती है। मस्तिष्क के बेसल गैन्ग्लिया नामक हिस्से में अन्य भागों की तुलना में अधिक मात्रा में आयरन होता है। शोध से पता चलता है कि यह हिस्सा, भावनात्मक उत्तेजनाओं में भी आवश्यक भूमिका निभाता है। यदि आपमें आयरन की कमी है तो इसकी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है, जो कई प्रकार की मानसिक स्वास्थ्य विकारों का कारण बनती है।

साल 2018 में 11,876 जापानी प्रतिभागियों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों में आयरन की कमी थी उनमें आगे चलकर अवसाद विकसित होने का खतरा अधिक पाया गया।
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भारतीय महिलाओं में आयरन की कमी - फोटो : Pixabay
भारतीय महिलाओं में आयरन की कमी 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, आयरन की कमी की दिक्कत भारत,  एशिया के अन्य देशों और अफ्रीका की महिलाओं में अधिक देखा जाता रहा है। यह न सिर्फ कमजोरी, थकान और कई गंभीर बीमारियों के जोखिमों को बढ़ाने वाली स्थिति हो सकती है, साथ ही इसका मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर होता है। हमारे आहार में कई ऐसे खाद्य पदार्थ मौजूद होते हैं जो आसानी से शरीर के लिए इस आवश्यक पोषक तत्व की पूर्ति कर सकते हैं।

18 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों के लिए प्रतिदिन 8.7mg और महिलाओं के लिए प्रतिदिन 14.8mg की मात्रा में इसकी आवश्यकता होती है। आइए जानते हैं कि आयरन की कमी में किन चीजों का सेवन सबसे लाभकारी माना जाता है?

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आयरन की कमी कैसे पूरी करें? - फोटो : Pixabay
आयरन की कमी में क्या खाएं?

आहार विशेषज्ञ कहते हैं, शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार के भोजन में कई ऐसी चीजें मौजूद होती हैं जो शरीर को पर्याप्त मात्रा में आयरन की पूर्ति करने में सहायक है। रेड मीट और पोल्ट्री, फलियां, गहरी हरी पत्तेदार सब्जियां-साग जैसे पालक, सूखे मेवे जैसे किशमिश और खुबानी, मटर आदि से इसकी पूर्ति आसानी से की जा सकती है। स्वस्थ और पौष्टिक आहार का सेवन करने वालों को नियमित रूप से आयरन की आवश्यक मात्रा मिलती रहती है।
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विटामिन सी से बढ़ता है आयरन का अवशोषण - फोटो : iStock
विटामिन-सी का भी सेवन जरूरी

शोधकर्ताओं ने पाया कि शरीर में भोजन के माध्यम से आयरन के अवशोषण को बढ़ाने के लिए विटामिन-सी वाले आहार का सेवन करना लाभकारी हो सकता है। आयरन के अवशोषण को बढ़ाने के लिए विटामिन-सी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

शोधकर्ताओं ने पाया कि विटामिन सी वाली चीजें न सिर्फ आयरन को अवशोषित करने में मददगार हैं साथ ही इसे प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए भी जरूरी माना जाता है। 


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स्रोत और संदर्भ

Psychiatric disorders risk in patients with iron deficiency anemia and association with iron supplementation medications

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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