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International Women's Day: 57% महिलाओं में देखी जाती है ये गंभीर समस्या, कहीं आप भी तो नहीं हैं इसका शिकार?

Sat, 08 Mar 2025 08:00 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 5 (NFHS-5) के अनुसार, भारत में 15-49 वर्ष की आयु की 57% महिलाओं में एनीमिया का खतरा रहता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में एनीमिया अधिक आम है। 
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महिलाओं की स्वास्थ्य समस्याएं - फोटो : Freepik.com
आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है। लैंगिक समानता, महिलाओं के अधिकार और महिलाओं के खिलाफ हिंसा और दुर्व्यवहार जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के उद्देश्य से ये दिन मनाया जाता है। इन सबके साथ महिलाओं की सेहत पर ध्यान देना भी बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में कई प्रकार की बीमारियों, पोषक तत्वों की कमी और स्वास्थ्य जटिलताओं का जोखिम अधिक होता है। 

महिलाएं अपनी दिनचर्या, हार्मोनल बदलाव और शरीर की संरचना के कारण कुछ बीमारियों को लेकर विशेष संवेदनशील होती हैं। लिंग आधारित इन समस्याओं के बारे में जानना और कम उम्र से ही इसको लेकर बचाव के उपाय करते रहना बहुत आवश्यक हो जाता है।

भारत में एनीमिया एक आम समस्या है, खासकर प्रजनन आयु की महिलाओं में। एनीमिया के कारण कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है। यही कारण है कि कम उम्र से ही सभी महिलाओं को इसके बारे में जानना और बचाव के लिए उपाय शुरू कर देना जरूरी है।
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महिलाओं में एनीमिया की समस्या - फोटो : Freepik.com
57% महिलाओं में एनीमिया का खतरा

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 5 (NFHS-5) के अनुसार, भारत में 15-49 वर्ष की आयु की 57% महिलाओं में एनीमिया का खतरा रहता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में एनीमिया अधिक आम है। ग्रामीण और अशिक्षित महिलाओं में ये समस्या और अधिक देखी जाती है। मासिक धर्म और गर्भावस्था के दौरान आयरन की कमी, अपर्याप्त पोषण इसका प्रमुख कारण है। 

एनीमिया तब होता है जब शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से कम हो जाता है। हीमोग्लोबिन एक प्रोटीन है जो लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाता है और यह शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने में मदद करता है।  आयरन की कमी महिलाओं में एनीमिया का सबसे बड़ा कारण है।
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गर्भावस्था की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है एनीमिया

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, फोलिक एसिड और विटामिन बी12 की कमी के कारण भी एनीमिया होने का जोखिम काफी बढ़ जाता है।

इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर को शिशु के विकास के लिए अधिक पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। यदि इस दौरान आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी12 की पूर्ति न की जाए, तो एनीमिया हो सकता है। एनीमिया की स्थिति प्रजनन क्षमता में कमी, गर्भावस्था में समय से पहले प्रसव, नवजात शिशु का वजन कम होने और मानसिक और शारीरिक विकास में बाधा जैसी दिक्कतें बढ़ा सकती है।

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पौष्टिक चीजों का करिए सेवन - फोटो : Freepik.com
एनीमिया से बचाव के लिए क्या करें?

एनीमिया से बचाव के लिए कम उम्र से ही आहार में सुधार करना जरूरी हो जाता है। इसके लिए संतुलित आहार का सेवन करें।
  • आयरन युक्त चीजें हरी पत्तेदार सब्जियां (पालक, मेथी), चुकंदर, अनार जरूर खाएं।
  • प्रोटीन युक्त आहार जैसे दालें, सोया, दूध, अंडे का सेवन करें।
  • फोलिक एसिड और विटामिन बी12 के लिए हरी सब्जियां, दालें, मांस, दूध को आहार में शामिल कर सकती हैं।
  • विटामिन-सी वाली चीजें जैसे नींबू, संतरा, आंवला को आहार में शामिल करें। विटामिन-सी आयरन के अवशोषण में मदद करता है।
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ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम - फोटो : Freepik.com
महिलाओं को इन बीमारियों का भी रहता है खतरा

स्तन कैंसर के मामले दुनियाभर में तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। महिलाओं में होने वाला ये सबसे आम कैंसर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, हर साल लगभग 20 लाख महिलाएं स्तन कैंसर का शिकार पाई जा रही हैं।

इसके अलावा महिलाओं में आर्थराइटिस की समस्या भी रजोनिवृत्ति के बाद अधिक देखी जाती है। मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने लगता है और इसकी कमी हड्डियों की सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित करने वाली हो सकती है। महिलाओं को और किन बीमारियों का खतरा होता है जानने के लिए यहां क्लिक करें



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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