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दर्द जागरूकता माह: किसी भी तरह का दर्द है तो इन खास बातों पर करें गौर, नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
दर्द को नजरअंदाज करना लगभग हर भारतीय की आदत में होता है। इस मामले में महिला-पुरुष सब बराबर होते हैं। हाथ-पैरों में दर्द है बाम लगा लिया, सिर में दर्द है, तुरंत दर्दनिवारक दवा खा ली, पेट में दर्द है एंटासिड ले लिया। सामान्यतः कोई भी व्यक्ति अपनी जिंदगी में एक न एक बार तो ऐसे किसी दर्द से गुजरता ही है और अधिकांशतः इस दर्द को बिना कारण जाने, दबाने की कोशिश की जाती है। क्या वाकई ये इतना आसान है? जी नहीं, दर्द कई तरह के हो सकते हैं और इनको टालना बड़ी मुसीबत को आमंत्रण देना साबित हो सकता है। सितंबर माह को अंतरराष्ट्रीय दर्द जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2021 के लिए इसकी थीम है-'माय पेन प्लान', जिसके अंतर्गत विभिन्न प्रकार के दर्द के लिए सटीक और सही उपचार के ऊपर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कई तरह के दर्द 
  • यूं हममें से अधिकांश लोग कभी न कभी दर्द का अनुभव करते हैं। कभी ये दर्द कुछ ही समय का होता है और साधारण उपायों से वह ठीक भी हो जाता है लेकिन कई बार दर्द अधिक समय तक बना रहता है या बार-बार होता है। ऐसे में इसे नजरअंदाज करना गलत हो सकता है। याद रखें कि दर्द बीमारी नहीं है, मात्र एक लक्षण है, जिसके पीछे के कारण का निदान एवं इलाज आवश्यक है। दर्द को मुख्यतः दो भागों में बांटा जाता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • एक्यूट: यानी तीखा या चुभने वाला तेज दर्द। यह आमतौर पर किसी चोट के कारण होता है और कम समय में ठीक भी हो जाता है। 
  • क्रॉनिक: यह दर्द माइल्ड से सीवियर यानी धीमे से तेज किसी भी तरह का हो सकता है और लंबे समय तक रहता है। यह आमतौर पर किसी बीमारी या समस्या के कारण उभरने वाला लक्षण होता है जिसके इलाज की जरूरत होती है। मतलब यह शरीर में चल रही किसी गड़बड़ का संकेत हो सकता है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अन्य लक्षण 
  • कई बार दर्द के साथ अन्य शारीरिक या मानसिक लक्षण भी उभरते हैं। इनमें नॉशिया या घबराहट, उल्टी, चक्कर आना, कमजोरी तथा चिड़चिड़ाहट, निराशा, अवसाद, मूड स्विंग्स आदि शामिल हो सकते हैं। दर्द जब लंबे समय तक बना रहता है तो बैचेनी बढ़ने लगती है और जब तक इस दर्द की जड़ में पहुंचकर उस समस्या का इलाज नहीं होता, जिसकी वजह से दर्द पनप रहा है, तब तक शरीर और दिमाग दोनों परेशान रहते हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
ये हो सकते हैं दर्द 

एक्यूट हो या क्रॉनिक, दर्द शरीर के किसी भी हिस्से में उभर सकता है। आमतौर पर जिस तरह के दर्द की शिकायत लोगों को होती है, उनमें शामिल होते हैं-
  • कमर या पीठ का दर्द
  • सिर दर्द
  • दांतों का दर्द
  • गर्दन का दर्द
  • हाथ-पैरों, जोड़ों का दर्द
  • टखने या एड़ी का दर्द
  • पेटदर्द
  • उंगलियों, कलाई का दर्द, आदि
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
हो सकती हैं ये वजहें 

चोट लगने या स्पोर्ट्स इंज्युरी के अलावा दर्द के पीछे छुपी अन्य समस्याएं हो सकती हैं-
  • किसी प्रकार की सर्जरी
  • हड्डी, लिगामेंट्स का टूटना या मसल्स का क्षतिग्रस्त होना
  • कोई ट्यूमर या अन्य प्रकार की ग्रोथ
  • गहरा घाव
  • कैंसर का दर्द
  • ट्राइजेमिनल न्यूरालजिया
  • नसों को क्षति पहुंचना
  • किसी प्रकार के छाले या फुंसी आदि
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
समय पर करें इलाज 
  • बार-बार होने वाले या लंबे समय से रहने वाले दर्द को नजरअंदाज करना गंभीर स्थिति का कारण बन सकता है। इसकी वजह से कोई अंग हमेशा के लिए खराब हो सकता है, उसके काम करने में बाधा आ सकती है या अपंगता भी हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि समय पर दर्द की ओर ध्यान दें और उसका इलाज करवाएं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
सही इलाज जल्दी आराम 
  • एक्यूट दर्द के लिए जहां डॉक्टर चोट को ठीक करने या त्वरित राहत के लिए दवाइयां देते हैं, वहीं क्रॉनिक दर्द के लिए दवाइयों के अलावा गर्म-ठंडा सेक, फिजियोथैरेपी, कुछ विशेष प्रकार के स्टॉकिंग्स या ब्रेसेस पहनने, विशेष इंजेक्शन, प्लाज्मा थैरेपी आदि का भी उपयोग किया जाता है। पहले दर्द के लक्षणों पर काबू किया जाता है इसके बाद जिस भी बीमारी या समस्या की वजह से दर्द हो रहा है उसका इलाज किया जाता है। इसमे बीमारी के प्रकार, शरीर की अवस्था आदि के हिसाब से समय लगता है। इसलिए इलाज कभी भी बीच में न छोड़ें और डॉक्टर ने जो भी सावधानियां रखने को कहा है, उन्हें जरूर ध्यान में रखें। अपने मन से दर्दनिवारक दवाएं न लें, क्योंकि इससे किडनी या लिवर पर बुरा असर पड़ सकता है। 
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