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चिंता: 2020 में भारत में 30 लाख से ज्यादा प्री-टर्म बर्थ, ये दुनियाभर में सबसे अधिक, बाल मृत्यु का खतरा बढ़ा

Mon, 09 Oct 2023 06:52 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्री टर्म बर्थ के मामले - फोटो : istock
समय से पहले बच्चों के जन्म की स्थिति उनमें कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। प्री-टर्म बर्थ का मतलब उन बच्चों से है जिनका जन्म गर्भावस्था के 37 सप्ताह से पहले हो जाता है। ये स्थिति बच्चों में शारीरिक और मानसिक वृद्धि को प्रभावित करने के साथ जन्मजात विसंगतियों, न्यूरोलॉजिकल समस्याओं सहित कई प्रकार की अन्य स्वास्थ्य जोखिमों को बढ़ाने वाली मानी जाती है। भारत में इसका खतरा समय के साथ बढ़ता जा रहा है।

हालिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि भारत में 2020 में 3.02 मिलियन (30.2 लाख) से अधिक बच्चों का जन्म समय से पहले हुआ है, ये आंकड़ा दुनियाभर में इस साल होने वाले प्री-टर्म बर्थ में सबसे अधिक है। 

द  लैंसेट जर्नल में प्रकाशित अध्ययन की रिपोर्ट में ये बात सामने आई है। इसके मुताबिक भारत में 2020 के आंकड़े, वैश्विक स्तर पर होने वाले कुल समय से पहले जन्म के आंकड़ों से 20 फीसदी अधिक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ये भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों को बढ़ाने वाली स्थिति हो सकती है जिसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है। 
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समय से पहले जन्मे बच्चे - फोटो : Pixabay
आधे से अधिक मामले सिर्फ आठ देशों से

यूनाइटेड नेशंस इंटरनेशनल चिल्ड्रन इमरजेंसी फंड (यूनिसेफ) और लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के लेखकों ने दुनिया के कई देशों के आंकड़ों का अध्ययन किया जिसमें पाया गया कि 2020 में समय से पहले जन्म सभी बच्चों में से 50 प्रतिशत से अधिक सिर्फ आठ देशों से हैं। इन देशों में भारत के साथ पाकिस्तान, नाइजीरिया, चीन, इथियोपिया, बांग्लादेश, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और अमेरिका शामिल है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इन बच्चों की सेहत का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
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समय से पहले जन्म और इसके जोखिम - फोटो : Pixabay
प्रीटर्म बर्थ और स्वास्थ्य जोखिम

रिपोर्ट्स के मुताबिक वैश्विक स्तर पर, अनुमानित 13.4 मिलियन (1.34 करोड़) बच्चे साल 2020 में पैदा हुए, जिनमें से लगभग दस लाख बच्चों की मृत्यु जटिलताओं के कारण हो गई। यह डेटा दुनियाभर में गर्भावस्था के 37 सप्ताह से पहले पैदा होने वाले 10 में से 1 बच्चे के बराबर है।

लेखकों ने कहा, चूंकि समय से पहले जन्म की स्थिति बच्चों में मृत्यु का प्रमुख कारण है, इसलिए इसपर गंभीरता से ध्यान देना और रोकथाम के प्रयासों को बढ़ावा देना बहुत आवश्यक है। विशेष रूप से मातृ स्वास्थ्य और पोषण पर ध्यान देने की तत्काल आवश्यकता है।

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समय से पहले जन्म का खतरा - फोटो : Pixabay
बच्चों में हो सकती हैं कई स्वास्थ्य समस्याएं

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, समय से पहले जन्मे बच्चों में से जो जीवित हैं, उनमें विकलांगता और विकासात्मक देरी होने के साथ वयस्कावस्था में मधुमेह और हृदय की बीमारियों के होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। विशेषज्ञ कहते हैं, पिछले कुछ वर्षों में विशेष प्रयास किए गए हैं, जिससे इस तरह के जोखिमों को कम किया जा सके, इसमें सफलता भी मिली है हालांकि अब भी कई कमियां बनी हुई हैं। 
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गर्भावती के सेहत का रखें ख्याल - फोटो : Istock
प्रीटर्म बर्थ को कम करने के लिए प्रयास जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, समय से पहले जन्म को कम करने की रणनीतियों पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। इसके लिए महिलाओं में धूम्रपान बड़ा जोखिम कारक हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा देखभाल प्रदान करना जरूरी है जिससे गर्भावस्था की जटिलताओं को रोकने में मदद मिल सकती है, साथ ही इसके खतरों को कम किया जा सकता है। 



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स्रोत और संदर्भ
National, regional, and global estimates of preterm birth in 2020, with trends from 2010: a systematic analysis

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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