कोरोना का यह समय तमाम तरह की अनिश्चितताओं से भरा हुआ है। कोरोना के कारण समाज में मचे हाहाकार, बेरोजगारी और आर्थिक संकट ने लोगों को शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से प्रभावित किया है। आलम यह है कि ज्यादातर लोग तनाव और चिंता जैसी समस्याओं के शिकार हो गए हैं। तनाव की स्थिति स्वाभाविक रूप से ब्लड प्रेशर को प्रभावित करती है। इस तरह की समस्या का लंबे समय तक बने रहने का असर लोगों को हृदय के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।
कई रिपोर्ट्स कहते हैं कि वैसे तो इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि तनाव की स्थिति किसी व्यक्ति में दीर्घकालिक उच्च रक्तचाप का कारण बनती हो, लेकिन इस तरफ ध्यान न देना और तनाव की समस्या लंबे समय तक बने रहने के कारण लोगों में हाई ब्लड-प्रेशर, दिल का दौरा पड़ने और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। डॉक्टर कहते हैं कि जब कोई व्यक्ति तनाव की स्थिति में होता है तो शरीर में ऐसे हार्मोन का उत्पादन होता है जो ब्लड प्रेशर को अस्थायी रूप से बढ़ा देते हैं। इसके कारण दिल तेजी से धड़कता है और रक्त वाहिकाएं संकरी हो जाती हैं, ऐसी स्थितियां हृदय रोगों को बढ़ावा दे सकती हैं।