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विशेषज्ञ से जानिए: कोविड-19 से ठीक होने के महीनों बाद भी नहीं जा रहे हैं लक्षण, तो क्या करें?

Sun, 25 Jul 2021 04:47 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पोस्ट कोविड के लक्षण (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : getty images
Medically Reviewed by-
डॉ विक्रमजीत सिंह
(डिपार्टमेंट ऑफ इंटरनेल मेडिसिन)
आकाश हेल्थकेयर, दिल्ली


कोरोना संक्रमण का कहर पूरी दुनिया में पिछले डेढ़ साल से अधिक समय से जारी है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान संक्रमण के मामलों में भारी उछाल के साथ लोगों में स्वास्थ्य से संबंधित कई गंभीर जटिलताएं देखने को मिलीं। दूसरी लहर का असर तो अब लगभग खत्म हो गया है, लेकिन इस लहर में संक्रमित हुए कई लोगों में लॉन्ग कोविड के लक्षण अब भी देखने को मिल रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक सामान्यतौर पर कोरोना संक्रमितों में लॉन्ग कोविड का असर एक महीने तक बना रह सकता है, हालांकि कुछ लोगों में यह लक्षण इससे भी अधिक समय कर रह सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोविड संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों में मधुमेह और हृदय रोग की समस्याएं भी देखने को मिल रही हैं। यह समस्याएं ऐसे लोगों में भी देखी जा रही हैं जो कोविड से पहले इनसे मुक्त थे। इस तरह के रोगियों को विशेष देखभाल की आवश्यकता हो सकती है। वहीं कोविड से ठीक होने के लंबे समय बाद तक भी जिन रोगियों की कमजोरी, स्वाद और गंध न आने की समस्या या सांस की दिक्कत बनी हुई है, उन्हें डॉक्टर से सलाह लेकर इसका गंभीरता से इलाज कराना चाहिए।
आइए जानते हैं कि पोस्ट कोविड के किन लक्षणों के होने पर आपको डॉक्टर से संपर्क करने की आवश्यकता जरूर होती है?
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पोस्ट कोविड के लक्षण किसी भी प्रकार के संक्रमित को हो सकते हैं - फोटो : getty images
किन लोगों में पोस्ट कोविड के लक्षण हो सकते हैं ज्यादा गंभीर
डॉक्टर कहते हैं, दूसरी लहर के दौरान देखा गया है कि संक्रमण शरीर के कई अंगों के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर रहा है। ऐसे में संक्रमण से ठीक होने के बाद भी कुछ लोगों को सामान्य स्थिति में वापस आने में समय लग सकता है। खासकर गंभीर संक्रमण के शिकार रह चुके या आईसीयू में भर्ती रहने वालों में पोस्ट कोविड की समस्याएं लंबे समय तक भी बनी रह सकती हैं। गंभीर संक्रमण के मामलों में वायरस सूजन, फेफड़ों और छाती जैसे महत्वपूर्ण अंगों को क्षति पहुंचा रहा है। जो लोग पहले से ही मधुमेह, कमजोर प्रतिरक्षा या अन्य बीमारियों के शिकार थे उन लोगों में पोस्ट कोविड के लक्षण ठीक होने में ज्यादा वक्त लग सकता है। 
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पोस्ट कोविड के लक्षण कुछ दिनों में हो सकते हैं - फोटो : iStock
कुछ लोगों में कोविड जैसी ही हो सकते हैं लक्षण
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक संक्रमण के प्रकार और गंभीरता के आधार पर लोगों में पोस्ट कोविड के लक्षण भिन्न हो सकते हैं। कई लोगों में उसी तरह के लक्षण भी देखे जा सकते हैं जो संक्रमण के दौरान थे। कोविड की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद पोस्ट कोविड के लक्षणों में सामान्यत: लोगों को थकान, अस्वस्थता, खांसी, मायलगिया, चिंता और नींद की समस्याएं बनी रह सकती हैं। डॉक्टर कहते हैं कि पोस्ट कोविड के लक्षण सामान्यतौर पर रिपोर्ट निगेटिव आने के 2-3 सप्ताह में ठीक हो जाते हैं। हालांकि, यदि यह लक्षण 3 महीने से अधिक समय तक बने रहते हैं तो ऐसा स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना बहुत आवश्यक हो जाता है। 

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गंभीर समस्या महसूस होने पर डॉक्टर से जरूर मिलें - फोटो : iStock
किसी को भी हो सकती हैं पोस्ट कोविड की दिक्कतें
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, यह आवश्यक नहीं है कि केवन जिन लोगों को कोविड का गंभीर संक्रमण रहा हो उन्हीं को पोस्ट कोविड की समस्याएं हों, हल्के या एसिम्टोमैटिक लोगों को भी यह दिक्कतें हो सकती हैं। यदि आपमें पोस्ट कोविड के गंभीर लक्षण जैसे हृदय या छाती से संबंधित समस्या अथवा गंभीर कमजोरी की दिक्कत तीन महीने तक बनी रहती है तो इस बारे में रोग संबंधी विशेष चिकित्सक से सलाह लेना आवश्यक हो जाता है। 
पोस्ट कोविड के बढ़ते खतरों को देखते हुए दुनियाभर के कई शहरों में लॉग कोविड के विशेष अस्पताल भी खोले जा रहे हैं। इसके अलावा आप रोग के विशेषज्ञ डॉक्टर से भी मिलकर समस्या के बारे में बता सकते हैं। ध्यान रहे, कोविड के बाद के दिल के दौरे के मामले अधिक बढ़े हैं, ऐसे में इससे संबंधित लक्षणों को लेकर कोई भी लापरवाही बिल्कुल न करें।
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डॉक्टर से करें संपर्क (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
कुछ प्रकार के जांच की हो सकती है आवश्यकता
पोस्ट कोविड के लक्षणों और उसकी गंभीरता को देखते हुए डॉक्टर आपसे कुछ परीक्षण कराने की सलाह भी दे सकते हैं। भविष्य की बीमारियों के जोखिम को निर्धारित करने के लिए कंप्लीट ब्लड काउंट (सीबीसी) टेस्ट, ग्लूकोज, कोलेस्ट्रॉल पैनल, न्यूरो-फ़ंक्शन के परीक्षण, चेस्ट स्कैनिंग, हार्ट इमेजिंग, कार्डियक स्क्रीनिंग और सीआरपी टेस्ट आदि के माध्यम से डॉक्टर रोग की गंभीरता का अंदाजा लगाकर उपचार प्रारंभ कर सकते हैं।


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नोट: यह लेख डॉ विक्रमजीत सिंह (डिपार्टमेंट ऑफ इंटरनेल मेडिसिन, आकाश हेल्थकेयर दिल्ली)  के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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