फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अध्ययन: इस तरह के अनाज का सेवन करने वालों में डायबिटीज का खतरा कम, यह आटा सबसे फायदेमंद

Thu, 05 Aug 2021 04:52 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
डायबिटीज को कैसे कंट्रोल करें (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
डायबिटीज दुनियाभर में तेजी से बढ़ती बीमारियों में से एक है। स्वास्थ्य संगठनों के आंकड़ों के अनुसार विशेषकर भारत में डायबिटीज के रोगियों की संख्या हाल के दशकों में काफी तेजी से बढ़ती हुई देखी गई है। खराब जीवनशैली और पौष्टिक आहार के सेवन में कमी को विशेषज्ञ इसके मुख्य कारण के रूप में देख रहे हैं। डॉक्टरों की मानें तो डायबिटीज के इलाज के साथ उचित परहेज के माध्यम से इस गंभीर रोग को नियंत्रित किया जा सकता है। इसी को लेकर हाल ही में किए गए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि भोजन में कुछ विशेष प्रकार के अनाज की मात्रा को बढ़ाकर इस गंभीर रोग को नियंत्रित करने में सफलता मिल सकती है।
'इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी-एरिड ट्रॉपिक्स' (आईसीआरआईएसएटी) द्वारा हाल ही में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि मिलेट (ज्वार-बाजरा आदि) आधारित आहार का सेवन करके मधुमेह को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। 11 देशों में किए गए इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि मिलेट आधारित भोजन करने वाले लोगों में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है। आइए इस अध्ययन के बारे में विस्तार से जानते हैं।
विज्ञापन

2 of 5
मिलेट आधारित आहार डायबिटीज में है फायदेमंद - फोटो : getty images
मिलेट आधारित आहार और डायबिटीज
फ्रंटियर्स ऑफ न्यूट्रिशन जर्नल में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन के अनुसार, मिलेट आधारित आहार का सेवन मधुमेह के विकास और रोग के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। वैज्ञानिकों ने अध्ययन के दौरान पाया कि चूंकि इस प्रकार के आहार का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, ऐसे में इसे मधुमेह के रोगियों के लिए काफी फायदेमंद माना जा सकता है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि जिन लोगों में आनुवांशिक रूप से मधुमेह का जोखिम है वह भी इस तरह के आहार का सेवन करके खतरे को कम कर सकते हैं।
विज्ञापन

3 of 5
मधुमेह रोगियों को करना चाहिए पौष्टिक आहार का सेवन - फोटो : Social media
कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले आहार का करना चाहिए सेवन
इस अध्ययन के बारे में इंडियन नेशनल टेक्निकल बोर्ड ऑफ न्यूट्रिशन के प्रतिनिधि और अध्ययन के लेखकों में से एक डॉ राज भंडारी कहते हैं, चावल, गेहूं और मक्का की तुलना में  मिलेट वाले आहारों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम पाया गया है। यही कारण है कि इसका सेवन डायबिटीज के प्रबंधन में काफी लाभदायक हो सकता है।
वहीं आईसीआरआईएसएटी में वरिष्ठ पोषण वैज्ञानिक और अध्ययन की लेखक डॉ एस अनीता कहती हैं, कई जर्नल्स में प्रकाशित अध्ययनों के साथ इस अध्ययन की समीक्षा में हमने पाया कि मिलेट वाले आहारों के सेवन से मधुमेह का खतरा कम हो जाता है। जिन लोगों को इस तरह की समस्या है, उन्हें भोजन में ऐसे आहारों को जरूर शामिल करना चाहिए।

4 of 5
बाजरा के सेवन से घट सकता है ब्लड शुगर का स्तर - फोटो : Pixabay
अन्य रोगों में भी फायदेमंद है मिलेट का सेवन
अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि मिलेट आधारित आहार डायबिटीज के प्रबंधन के साथ-साथ कई अन्य तरह से भी सेहत के लिए लाभदायक हो सकते हैं। वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन लोगों को ग्लूटेन से एलर्जी है वह भी इन आहारों का सेवन कर सकते हैं क्योंकि इन्हें ग्लूटेन मुक्त पाया गया है। इसके आलावा इसमें कोलेस्ट्रॉल कम करने वाले गुण भी होते हैं जिससे हृदय का स्वास्थ्य बेहतर बनता है। मिलेट आधारित आहारों को एंटीऑक्सिडेंट, प्रोटीन और डायट्री फाइबर का एक समृद्ध स्रोत माना जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
डायबिटीज में बेहद फायदेमंद है कटहल का आटा - फोटो : सोशल मीडिया
डायबिटीज के प्रबंधन में कटहल का आटा भी है फायदेमंद
डायबिटीज के प्रबंधन को लेकर हाल ही में हुए एक अन्य अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि भोजन में हरे कटहल के आटे इस्तेमाल करने से टाइप-2 डायबिटीज के रोगियों को काफी लाभ मिल सकता है। वैज्ञानिकों का दावा है कि हरे कटहल का आटा मधुमेह के रोगियों में प्लाज्मा शर्करा के स्तर को कम करने में सहायक हो सकता है। अध्ययन में कटहल के आटे का सेवन करने वाले लोगों का ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन (HbA1c) काफी कम पाया गया। ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन का बढ़ना, मधुमेह का संकेत माना जाता है। इस अध्ययन को नेचर जर्नल में प्रकाशित किया गया है।


------------
स्रोत और संदर्भ: 
A Systematic Review and Meta-Analysis of the Potential of Millets for Managing and Reducing the Risk of Developing Diabetes Mellitus

अस्वीकरण नोट: यह लेख फ्रंटियर्स ऑफ न्यूट्रिशन जर्नल में प्रकाशितअध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। संबंधित विषय के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए अपने चिकित्सक से सलाह लें। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें