पूरी दुनिया में पिछले डेढ़ साल से कोरोना का कहर जारी है। अब तक दुनियाभर के 17 करोड़ से ज्यादा लोग इस वायरस की चपेट में आ चुके हैं, अकेले भारत में यह आंकड़ा 2.85 करोड़ से अधिक हो गया है। इतने दिनों में लोगों को स्पष्ट रूप से समझ आ गया है कि अगर भविष्य में कोरोना और इस तरह के अन्य गंभीर संक्रमणों से बचे रहना है तो अपनी इम्यूनिटी को मजबूत करना सबसे आवश्यक है। हम में से ज्यादातर लोगों ने इम्यूनिटी बढ़ाने वाले तमाम उपायों को प्रयोग में लाना भी शुरू कर दिया है। कोई काढ़े का सेवन कर रहा है, तो कोई विटामिन की गोलियां ले रहा है, पर क्या कोई ऐसा तरीका भी है जिससे बिना दवाइयों और ज्यादा मेहनत के अपनी इम्यूनिटी को बेहतर बनाया जा सकता है? जवाब है-बिल्कुल।
इस लेख में हम ऐसे ही पांच तरीकों के बारे में आपको बताने जा रहे हैं जिसमें बिना काढ़े और विटामिन की गोलियां के भी आप आसानी से अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को ठीक कर सकते हैं।आइए जानते हैं।
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तनाव से कमजोर होती है इम्यूनिटी
- फोटो : Social media
टिप्स 1: तनाव मुक्त रहें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक मानसिक तनाव और इम्यूनिटी का गहरा संबंध है। भले ही आपका खान-पान अच्छा है, नियमित दिनचर्या का पालन कर रहे हैं, लेकिन यदि आप तनाव के शिकार हैं तो यह आपके शरीर की संक्रमणों को मात देने की क्षमता को कम कर देता है। जब हम तनाव में होते हैं, तो इस समस्या को ठीक करने के शरीर कोर्टिसोल हार्मोन को रिलीज करना शुरू कर देता है। शरीर में कोर्टिसोल का उच्च स्तर समग्र प्रणाली को बाधित कर सकता है। तनाव, हमारी प्रतिरक्षा को कमजोर करने के साथ स्वास्थ्य संबंधी कई अन्य समस्याओं को जन्म दे सकता है। इसलिए तनाव मुक्त रहने के उपायों को प्रयोग में लाते रहें।
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शराब से करें परहेज
- फोटो : PTI
टिप्स 2: शराब को कहें न।
शराब का सेवन शरीर के लिए कई तरह से नुकसानदायक हो सकता है। लिवर की कार्यप्रणाली को कमजोर करने के साथ यह संक्रमण से लड़ने की शरीर की क्षमता को भी कम कर देता है। इसलिए शरीर की इम्यूनिटी को बेहतर बनाए रखने के लिए शराब का सेवन बिल्कुल बंद कर दें। शराब छोड़ने के कुछ दिनों बाद आपको स्वत: शरीर में अच्छे परिवर्तन नजर आने लगेंगे।
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पूरी नींद लेना सभी के लिए जरूरी
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टिप्स 3: पर्याप्त नींद लेना सबसे जरूरी
स्वस्थ जीवन के लिए पर्याप्त नींद लेना बहुत जरूरी है। नींद पूरी न होने से आपकी इम्युनिटी भी प्रभावित हो सकती है। जर्नल ऑफ एक्सपेरिमेंटल मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार रात की नींद अच्छी लेने वालों में टी-कोशिकाएं को काफी सक्रिय पाया गया। टी कोशिकाएं शरीर में संक्रमण को कम करने और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को बेहतर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इसके अलावा सोते समय शरीर में एड्रेनालाईन और प्रोस्टाग्लैंडीन हार्मोन का स्तर कम हो जाता है, ये हार्मोन टी-कोशिकाओं को अपना काम करने से रोकते हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि जो लोग बेहतर नींद लेते हैं उनकी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया, नींद पूरी न कर पाने वाले लोगों की तुलना में बेहतर होती है।
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धूम्रपान सेहत के लिए हानिकारक है
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टिप्स 4: धूम्रपान छोड़ दें
कोविड-19, सांस की बीमारी है और धूम्रपान हमारे फेफड़ों को प्रभावित करता है, इसलिए धूम्रपान करने वालों में कोरोना संक्रमण का खतरा अधिक माना जाता है। धूम्रपान, फेफड़ों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। इस प्रकार फेफड़ों को स्वस्थ रखने और प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाए रखने के लिए इससे बचना चाहिए। धूम्रपान प्रतिरक्षा प्रणाली के संतुलन को बाधित करने के साथ संक्रमण से लड़ने की शरीर की क्षमता को कम कर देता है।
टिप्स 5: नियमित रूप से व्यायाम करें
अध्ययनों के अनुसार जो लोग व्यायाम करते हैं उनके शरीर में टी-कोशिकाओं का उत्पादन, व्यायाम न करने वालों की तुलना में अधिक होता है। जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स एंड हेल्थ साइंस में प्रकाशित 2019 के एक अध्ययन के अनुसार, व्यायाम करने से कई ऐसे हार्मोन का स्राव बढ़ जाता है जो प्राकृतिक रूप से प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को नियमित व्यायाम करने की सलाह देते हैं।
------ नोट: यह लेख उजाला सिग्नस हॉस्पिटल कानपुर में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ राजन गांधी से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। डॉ. राजन गांधी अत्यधिक योग्य और अनुभवी जनरल फिजिशियन हैं। इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से अपना एमबीबीएस पूरा किया है। इसके बाद इन्होंने सीएच में डिप्लोमा पूरा किया। फिलहाल यह उजाला सिग्नस कुलवंती अस्पताल, कानपुर में मेडिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन के तौर पर काम कर रहे हैं। यह आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉ. राजन गांधी को इस क्षेत्र में 25 साल का अनुभव है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।