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विशेषज्ञ से जानें: कोविड संक्रमितों के लिए कैसे मददगार है प्लाज्मा थेरेपी? क्या इससे बच सकती है जान?

Fri, 30 Apr 2021 09:52 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला
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प्लाज्मा थेरैपी - फोटो : social media
डॉ तुलिक चंद्रा
ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विशेषज्ञ


कोरोनोवायरस के मामलों में रोजाना हो रहे उछाल ने विभिन्न चिकित्सा संसाधनों की मांग को बढ़ा दिया है। ऑक्सीजन सिलेंडर और कॉसंट्रेटर से लेकर एंटीवायरल दवाइयों तक की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसके अतिरिक्त, गंभीर स्थितियों में रोगियों के इलाज के लिए प्लाज्मा को भी प्रभावी माना जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि आप हाल-फिलहाल में कोरोना संक्रमण से ठीक हुए हैं तो आप प्लाजमा दान करके दूसरे लोगों की जान बचा सकते हैं। पर यह प्लाजमा थेरपी है क्या और यह कोविड संक्रमितों के लिए कैसे फायदेमंद हो सकती है, इस लेख में हम इसी बारे में चर्चा करेंगे।
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प्लाजमा डोनेशन से बचाई जा सकती है जान - फोटो : PTI
क्या है प्लाजमा थेरपी?
इस बारे में जानने के लिए हमने लखनऊ स्थित केजीएमयू हॉस्पिटल में ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन की डॉ तुलिक चंद्रा से बातचीत की। डॉ तुलिका बताती हैं कि प्लाज्मा थेरेपी एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें संक्रमण से उबरने वाले व्यक्ति के रक्त से प्लाजमा को लेकर रोगी में इंजेक्ट किया जाता है। संक्रमण से उबरने वाले व्यक्ति के रक्त में मौजूद प्लाज्मा में एंटीबॉडी होते हैं जो रोगी को उस वायरस से मुकाबले में मदद करते हैं। इस प्रक्रिया से रोगी तेजी से संक्रमण से ठीक हो सकता है। इसके अलावा प्लाजमा डोनर को इस डोनेशन से कोई दिक्कत भी नहीं होती है। 
 
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कोरोना से ठीक हो चुके लोग कर सकते हैं प्लाजमा डोनेशन - फोटो : iStock
कौन कर सकता है प्लाजमा डोनेट?
डॉ तुलिक कहती हैं कि लोगों के मन में इससे संबंधित तरह-तरह के भ्रम हैं। इसका जवाब यह है कि जो मरीज कोविड संक्रमण से स्वस्थ होकर घर लौट आए हैं उनके अंदर एक ऐसी प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है जो कोरोना वायरस के लिए ढाल के रूप में काम करती है। ऐसे व्यक्ति दूसरे लोगों की जान बचा सकते हैं। ठीक होने के 14 दिन बाद और अधिकतम 4 महीने तक कई बार आप प्लाजमा दान कर सकते हैं। 
 

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प्लाजमा डोनेशन से घबराएं नहीं - फोटो : Pixabay
किन बातों का रखना होता है ध्यान?
डॉ तुलिका के मुताबिक प्लाजमा डोनेशन के लिए खाली पेट न जाए। ध्यान रहे, डोनेशन के 48 घंटे पहले तक  शराब का सेवन नहीं किया होना चाहिए। इसके अलावा उस व्यक्ति की कोई एंटीबायोटिक दवाएं नहीं चल रही होनी चाहिए। प्लाजमा डोनेट करने के दो हफ्ते बाद फिर से आप डोनेट कर सकते हैं लेकिन इसके लिए दोबारा से पूरी जांच की जाती है।
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प्लाजमा डोनेशन से डोनर को नहीं होती है कोई दिक्कत - फोटो : Pixabay
क्या डोनेशन के बाद डोनर को कोई दिक्कत होती है?
डॉ तुलिका बताती हैं कि डोनेशन के बाद कोई कमजोरी नहीं आती है। डोनेशन के बाद डोनर को, ब्लड बैंक कुछ समय के लिए अपनी निगरानी में रखता है। इसके अलावा व्यक्ति को शुरुआती 3 से 4 घंटे तक कोई भारी सामान न उठाने और अधिक से अधिक मात्रा में तरल पदार्थों के सेवन की सलाह दी जाती है। डायबिटिक रोगी, जो इंसुलिन ले रहे हैं वह प्लाजमा डोनेट नहीं कर सकते हैं। इसके अलवा जिन लोगों को पहले से कोई क्रोनिक बीमारी है वो लोग भी प्लाजमा डोनेट नहीं कर सकते हैं।
 
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डोनेशन के लिए डोनर को कोविड निगेटिव होना आवश्यक - फोटो : Pixabay
प्लाजमा डोनेशन से पहले इन बातों काे जान लें
अगर आप प्लाज्मा डोनेट करने जा रहे हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।
  • डोनेशन के लिए आपके पास 3 महीने के भीतर की कोविड निगेटिव रिपोर्ट (RT PCR परीक्षण) होना आवश्यक है।
  • यदि आप एसिम्टोमैटिक थे, तो कोविड पॉजिटिव रिपोर्ट आने के 14 दिनों के बाद ही डोनेशन करें।
  • वहीं यदि आपमें कोरोना के लक्षण थे तो इसके ठीक हो जाने के 14 दिनों के बाद आप डोनेशन कर सकते हैं।
  • जिन लोगों का टीकाकरण हो चुका है वह टीकाकरण की तारीख से 28 दिनों के दिनों के बाद ही डोनेशन कर सकते हैं। 
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नोट: यह लेख लखनऊ में ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विशेषज्ञ, डॉ तुलिक चंद्रा से एक बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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