कोरोना वायरस महामारी लोगों को शारीरिक और मानिसक दोनों रूपों से प्रभावित कर रही है। कोरोना की पहली लहर के बाद से लोगों का ज्यादा समय घरों में ही बीत रहा है। इस दौरान दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलना भी कम हो गया है। इस एकांत का असर लोगों को मानसिक स्वास्थ्य पर भी देखने को मिल रहा है। लोगों को घबराहट, चिड़चिडापन, अधिक गुस्सा आने जैसी समस्याओं का अनुभव हो रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो इस महामारी ने उम्रदराज लोगों के साथ-साथ बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डाला है, अगर माहौल लंबे समय तक ऐसा ही बना रहता है तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
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कोरोना वायरस में मानसिक विकार के हो रहे हैं शिकार
- फोटो : social media
पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, आईएमए डॉ विनय अग्रवाल ने अमर उजाला से एक बातचीत के दौरान बताया कि महामारी के कारण पड़े सामाजिक व्यवधान ने बच्चों को शारीरिक और भावनात्मक रूप से बहुत प्रभावित किया है। ऑनलाइन क्लासेज, आसपास के लोगों से दूर रहना, घरों में आइसोलेशन, बाहर खेल न पाना और माता-पिता के गुस्से ने बच्चों में भय, अवसाद और ऊब की भावना पैदा कर दी है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
इस महामारी के दौरान हम किसी अनिश्चितता से निपटने और परिवार को सुरक्षित रखने के लिए सभी प्रयास तो जरूर कर रहे हैं लेकिन इस दौरान जाने-अनजाने बच्चों की भावनात्मक जरूरतों को नजरअंदाज कर दिया गया है, इसका असर बच्चों के व्यवहार में देखा जा रहा है। अगर माहौल जल्द सामान्य नहीं हुआ तो भविष्य में इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं।
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बच्चों की भावनात्मक जरूरतों को समझें
- फोटो : Pixels
कैसे रखें बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल
विशेषज्ञों की मानें तो महामारी के इस समय में आपको बच्चों के साथ ज्यादा समय बिताने का मौका मिल रहा है, इसका पूरा इस्तेमाल करना चाहिए। उनकी भावनात्मक जरूरतों को समझें। इसके साथ ही बच्चों को सुखद माहौल देने की जरूरत है।
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अवसाद के शिकार हो रहे हैं बच्चे
- फोटो : iStock
समस्याओं को समझें
विशेषज्ञों के मुताबिक इस समय माता-पिता को बच्चों की आशंकाओं और समस्याओं के बारे में जानना बहुत जरूरी है। उनसे बात करें और सभी सवालों के जवाब दें। बच्चों के मन में इन दिनों बन रहे डर को दूर करने का प्रयास करें, ऐसे करके बच्चों में उत्पन्न हो रही चिंता और भावनात्मक अवसाद से कुछ हद तक निपटा जा सकता है।
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बच्चों केसाथ बताए ज्यादा समय
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दादा-दादी के साथ समय बिताना: जिन बच्चों के दादा-दादी हैं, सुनिश्चित करें कि बच्चे उनके साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं। यह दोनों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहतर उपाय हो सकता है।
नियमित दिनचर्या बनाएं: भले ही इन दिनों आप घर पर हैं, माता-पिता को चाहिए कि वह बच्चों की एक दिनचर्या बनाएं। बच्चों को विभिन्न घरेलू गतिविधियों में शामिल करें, उन्हें स्वच्छता की आदतों और सामाजिक दूरी का पालन करने से होने वाले फायदों के बारे में शिक्षित करें।
इस विपरीत स्थिति में माता-पिता को बच्चों के शारीरिक और मानसिक, दोनों ही स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बच्चों को कोविड-19 के उपायों जैसे कि मास्क पहनना, सामाजिक दूरी बनाए रखने और बार-बार हाथ धोने के बारे में बताते रहें। इसके अलावा माता-पिता की देखरेख में डिजिटल मंचों के माध्यम से बच्चों को अपने दोस्तों और सहपाठियों के साथ मेलजोल बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
बच्चों के साथ सरलता से पेश आएं, डांटने और मारने की जगह उन्हें प्यार से समझाने की कोशिश करें। इन सभी आदतों और व्यवहार से आप अपने बच्चे को किसी भी मानसिक परेशानी का शिकार होने से बचा सकते हैं।
------------------- नोट: यह लेख बाल रोग विशेषज्ञ डॉ विपिन जैन और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, आईएमए डॉ विनय अग्रवाल से एक बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।