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कोरोना से बच्चे और किशोर मामूली रूप से हो रहे बीमार, मौत के मामले भी बेहद कम: अध्ययन

Sun, 12 Jul 2020 02:47 AM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना से किशोरों की मौत होने के मामले दुर्लभ हैं(File Photo) - फोटो : पेक्सेल्स
कोरोना वायरस का बढ़ता संक्रमण देश और दुनिया के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। उम्र, लिंग, क्षेत्र आदि के अनुसार लोगों पर वायरस के असर संबंधित कई शोध और अध्ययन सामने आ चुके हैं। अब एक और नए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि 18 वर्ष से कम उम्र के ज्यादातर मरीज कोरोना वायरस के कारण मामूली रूप से बीमार पड़ते हैं। कई देशों के 582 बच्चों और किशोरों पर किए गए इस अध्ययन में यह जानकारी भी सामने आई है कि कोरोना वायरस से बच्चों और किशोरों की मौत होने के मामले भी बहुत ही दुर्लभ होते हैं।
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घर की सीढ़ियों पर बैठकर मोबाइल फोन पर गेम खेलते बच्चे(File photo) - फोटो : PTI
10 में से एक मरीज को भी आईसीयू की जरूरत नहीं
  • इस अध्ययन में पाया गया कि भले ही ज्यादातर को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है लेकिन 10 में एक से भी कम मरीज को आईसीयू यानी गहन चिकित्सा कक्ष में इलाज कराने की जरूरत पड़ती है। 
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सैंपल लेते स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
  • यह अध्ययन यूरोप में कोविड-19 महामारी के शुरुआत में चरम पर रहने के दौरान एक अप्रैल से 24 अप्रैल तक किया गया है और प्रतिष्ठित रिसर्च जर्नल द लांसेट चाइल्ड एंड एडोलेसेंट हेल्थ में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन में तीन दिन से लेकर 18 साल के बच्चों और किशोरों को शामिल किया गया।

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भारत में कोरोना (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : PTI
  • बहरहाल, शोधकर्ताओं का कहना है कि उनके अध्ययन के परिणामों पर उस वक्त विचार किया जाना चाहिए जब वैश्विक महामारी का प्रकोप बढ़ने के बाद गहन देखभाल सेवाओं की मांग के लिए योजना बनाई जा रही हो।
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कोरोना संक्रमण काल - फोटो : PTI
  • ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) के प्रमुख लेखक मार्क टेब्रूगे ने कहा कि हमारा अध्ययन बच्चों और किशोरों में कोविड-19 का अबतक का सबसे व्यापक अवलोकन उपलब्ध कराता है।
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कोरोना संक्रमण काल - फोटो : PTI
  • उन्होंने कहा, “कुल मिलाकर ज्यादातर बच्चे एवं किशोर मामूली रूप से बीमार पड़ते हैं। इसके बावजूद, खासी संख्या में बच्चे गंभीर रूप से बीमार हो जाते हैं और उन्हें आईसीयू में रखने की जरूरत होती है। और इस बात को उस वक्त ध्यान में रखना चाहिए जब वैश्विक महामारी का प्रकोप बढ़ने से स्वास्थ्य सेवा संसाधनों की योजना बनाई जा रही हो और उन्हें प्राथमिकता दी जा रही है।”
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कोरोना संक्रमण काल - फोटो : अमर उजाला
  • हालांकि शोधकर्ता इस अध्ययन में शामिल किए गए बच्चों की संख्या को बड़ी आबादी के परिपेक्ष्य में देखे जाने के खिलाफ आगाह करते हैं। यानी इसे अंतिम परिणाम नहीं माना जा सकता है। इस बारे में और ज्यादा सैंपल यानी ज्यादा संख्या में बच्चों और किशोरों को शामिल कर अध्ययन की जरूरत बताई जाती है। 

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तापमान जांचता स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
  • हालांकि इससे पहले अमेरिका और चीन में भी बच्चों पर कोरोना वायरस के प्रभाव को लेकर अध्ययन हो चुके हैं। अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के वैज्ञानिकों के मुताबिक, वयस्कों के मुकाबले 18 से कम उम्र के किशोरों और बच्चों में कोरोना के संक्रमण के बावजूद लक्षण भी नहीं देखे गए। संक्रमण के बाद इन्हें अस्पताल में एडमिट कराने की भी जरूरत बेहद कम पड़ रही है। केवल ऐसे ही बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ रही है, जिन्हें पहले से कोई बीमारी हो। 
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कोरोना संक्रमण काल - फोटो : अमर उजाला।
  • बीते अप्रैल में सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ने कुल 2500 बच्चों को लेकर आंकड़ा जमा कर अध्ययन किया था। इससे पहले चीन की स्टडी में भी 2100 बच्चों को शामिल किया गया था, जिस स्टडी के मुताबिक, महज 10 फीसदी बच्चों में ही कोरोना के गंभीर लक्षण दिखाई दिए थे। यानी 90 फीसदी बच्चों में बेहद हल्के लक्षण पाए गए थे। 
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