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सावधान: हृदय और किडनी ही नहीं, मांसपेशियों के लिए भी खतरनाक है डायबिटीज, रोगियों को हो सकती हैं ऐसी दिक्कतें

Sun, 30 Jan 2022 05:52 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मधुमेह के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : iStock
डायबिटीज, शरीर के सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है। इसके कारण होने वाली ब्लड शुगर असंतुलन पूरे शरीर के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। आमतौर पर डायबिटीज को दिल और किडनी जैसे अंगों के लिए नुकसानदायक माना जाता है, पर क्या आप जानते हैं कि यह मांसपेशियों और उनसे जुड़े छोटे-छोटे टेंडन्स के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है? शुगर का असंतुलित स्तर इन टेंडन्स पर बुरा असर डाल सकता है जिसके कारण कई तरह की गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। इतना ही नहीं शरीर को हिलने-डुलने तक में यह दर्द और तकलीफ का कारण बन सकते हैं। 

टेंडन्स छोटे-छोटे धागे नुमा आकार होते हैं जो मांसपेशियों को हड्डियों से जोड़े रखते हैं। ये जितने मजबूत होंगे मांसपेशियां उतनी ही अच्छी तरह से हड्डियों से जुडी रहेंगी और हड्डियां उतनी ही अच्छी तरह से अपनी जगह पर काम कर सकेंगी। टेंडन्स शरीर में हर जगह मौजूद होते हैं। डायबिटीज के अनियंत्रित होने पर टेंडन्स मोटे और कड़क हो जाते हैं और इनके टूटने की आशंका बढ़ जाती है। टेंडन्स के टूटने की यह आशंका टाइप-1 और टाइप-2 दोनों प्रकार की डायबिटीज में हो सकती है। 
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डायबिटीज के कारण मांसपेशियों की समस्या - फोटो : Pixabay
टेंडन्स का क्षति के कारण हो सकती हैं ऐसी समस्याएं: 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक टेंडन्स के क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में कई तरह की समस्याएं उभर सकती हैं।
  • फ्रोजन शोल्डर: कन्धों के जोड़ों में सूजन, अकड़न और दर्द 
  • रोटेटर कफ टियर्स: यह स्थिति भी कंधों के जोड़ों की मांसपेशियों और टेंडन्स के क्षतिग्रस्त होने से बनती है। 
  • ट्रिगर फिंगर या ट्रिगर थम्ब: हाथों की अँगुलियों और अंगूठे में दर्द, सूजन और अकड़न के साथ ही हर बार जोड़ों के मुड़ने पर सीधा करने पर क्लिक की आवाज आना। 
  • कार्पल टनल सिंड्रोम: कम्प्यूटर व अन्य गैजेट्स पर लगातार काम करने के कारण यह समस्या आजकल वैसे भी आम है। उसपर अगर डायबिटीज हो तो इसकी गंभीरता और बढ़ सकती है। इससे कलाइयों में सुन्नपन, कमजोरी और झनझनाहट महसूस होने जैसे लक्षण उभरते हैं। 
  • डिपविट्रेन्स कंट्रक्चर: हाथ में त्वचा के नीचे स्थित ऊतकों (टिशूज़) का मोटा हो जाना या फूल जाना इस समस्या का संकेत है। इसकी वजह से अंगुलियां हथेली की ओर मुड़ने लगती हैं और समय पर इलाज न किया जाए तो अंगुलियां हमेशा के लिए खराब भी हो सकती हैं। 
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बढ़ सकती है कई तरह की दिक्कतें - फोटो : iStock
सावधानी बरतना बहुत जरूरी

टेंडन्स का टूटना या क्षतिग्रस्त होना एक गंभीर समस्या है क्योंकि एक बार ऐसा होने के बाद यदि ठीक से ध्यान न रखा जाए तो यह फिर से टूट सकते हैं, इसलिए जरूरी है कि इन्हें टूटने से बचाया जाए और यदि टूट गए हैं तो सही इलाज और सावधानियों का पूरा ध्यान रखा जाए। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक टेंडन्स को स्वस्थ रखने के लिए एक्सरसाइज बेहतर उपाय हो सकता है। व्यायाम वैसे तो पूरे शरीर के लिए ही फायदेमंद है लेकिन डायबिटीज के कंट्रोल में यह बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पैरों की एड़ी में भी डायबिटिक लोगों को कई बार तकलीफ होती है और इससे भी नियमित व्यायाम बाधित होता है। इसलिए जरूरी है कि समस्या होते ही तुरंत इलाज लिया जाए और एक्सरसाइज को जारी रखा जाए। तकलीफ के हिसाब से डॉक्टर आपको व्यायाम के तरीकों में बदलाव करने को कह सकते हैं।
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मधुमेह को नियंत्रित करने के करें उपाय - फोटो : iStock
इन उपायों से मिल सकता है लाभ

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए शुगर लेवल को नियंत्रित रखना सबसे पहला काम है और इसके लिए आपको डाइट,व्यायाम, दिनचर्या और दवाई चारों को ध्यान में रखना होगा। इससे आप बहुत हद तक टेंडन्स को क्षतिग्रस्त होने से बचा सकते हैं। अगर इसके बावजूद समस्या होती है तो डॉक्टर से यह राय लें कि कहां अतिरिक्त काम करने की जरूरत है। डॉक्टर जांचों के बाद आपको सही कारण और सही इलाज दोनों के बारे में बता सकते हैं। कई बार वजन कम करने से भी टेंडन्स पर से दबाव हटने लगता है और तकलीफ कम होती है।गर्म सेकाई, विशेष एक्सरसाइज या फिजियोथैरेपी आदि से भी लाभ मिल सकता है। डायबिटीज के कारण शरीर के तमाम अंगों को नुकसान का खतरा रहता है इसलिए जरूरी है कि इसे नियंत्रित में रखने के प्रयास लगातर किए जाते रहें।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। अमर उजाला इस दावे की पुष्टि नहीं करता है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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