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विशेषज्ञों ने किया अलर्ट: ज्यादा तनाव लेना हो सकता है घातक, इन जानलेवा बीमारियों का बढ़ जाता है खतरा, ऐसे करें कंट्रोल

Thu, 07 Apr 2022 05:05 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बढ़ती मानसिक समस्याएं हो सकती हैं घातक - फोटो : Pixabay
काम का दबाव, पारिवारिक-सामाजिक, कई कारणों के चलते लोगों में तनाव की समस्या बढ़ सकती है। कुछ स्थितियों में इसे सामान्य माना जाता है, हालांकि अगर आप अक्सर तनाव से घिरे रहते हैं, तो ऐसी स्थिति गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकती है। तनाव के लक्षण आपके स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं, भले ही आपको इसका एहसास न हो। इतना ही नहीं अधिक तनाव लेने वाले लोगों में कुछ ऐसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है जो जानलेवा तक हो सकती हैं। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को तनाव प्रबंधन के उपाय करने की सलाह देते हैं। 

तनाव की स्थिति में सिरदर्द, नींद न आने या काम में मन न लगने जैसे लक्षण सामान्य हैं। पर लंबे समय तक बने रहने वाली तनाव की स्थिति आपमें हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ा देती है, जिसके कारण हृदय रोग और गंभीर स्थितियों में हार्ट अटैक-स्ट्रोक हो सकता है। हृदय रोगों को दुनियाभर में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है। अपने तनाव की स्थिति को पहचानें और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से सुरक्षित रहने के लिए इसे प्रतिबंधित करने के उपाय कीजिए। आइए आगे की स्लाइडों में जानते हैं कि अधिक तनाव लेने से किन बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है?
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हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा - फोटो : Pixabay
दिल की बीमारियां- हार्ट अटैक और स्ट्रोक
अधिक तनाव के कारण हृदय रोगों के मामले काफी सामान्य हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि लंबे समय तक तनावग्रस्त रहने वाले लोगों में उच्च रक्तचाप और हृदय की बीमारियों का खतरा अधिक होता है। तनाव, रक्तचाप के स्तर को बढ़ा देती है जिसे हृदय रोगों का प्रमुख कारण माना जाता है। यदि लंबे समय तक तनाव को प्रतिबंधित न किया जाए तो गंभीर स्थितियों में यह हार्ट अटैक जैसी जानलेवा समस्याओं का भी कारण बन सकता है। तनाव की स्थिति में रक्त प्रवाह में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर भी बढ़ जाता है जिसे हृदय रोगों का कारण माना जाता है।
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बढ़ रही है मोटापे की समस्या - फोटो : iStock
मोटापे का खतरा
अधिक तनाव के साथ मोटापे का खतरा भी बढ़ जाता है। यह स्थिति पेट, पैरों या कूल्हों पर अतिरिक्त फैट को बढ़ावा दे सकती है। मोटापे को अध्ययनों में हृदय रोग, डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों के रूप में जाना जाता है। शोध से पता चलता है कि तनाव की स्थिति में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ने लगता है, जो मोटापा के साथ शरीर के लिए कई प्रकार की और स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ावा दे सकती है। तनाव-मोटापा दोनों को नियंत्रित रखना बहुत आवश्यक माना जाता है। 

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डिप्रेशन हो सकता है बड़ी समस्याओं का कारण - फोटो : Pixabay
अवसाद और चिंता
लंबे समय तक बने रहने वाले तनाव की स्थिति गंभीर स्थितियों में डिप्रेशन के खतरे को बढ़ावा दे सकती है। हाल के अध्ययनों में पाया गया कि जिन लोगों को अपनी नौकरी से संबंधित तनाव रहता था उनमें अगले कुछ वर्षों के भीतर अवसाद विकसित होने का 80 फीसदी अधिक जोखिम हो सकता है। अवसाद की स्थिति गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या मानी जाती है। तनाव को नियंत्रित करना बहुत आवश्यक है।
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तनाव कम करने की कोशिश जरूरी - फोटो : Pixabay
तनाव को कैसे प्रतिबंधित किया जाए?
तनाव से संबंधित  कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। अध्ययनों से पता चलता है कि तनाव प्रबंधन तकनीक न केवल आपको बेहतर महसूस कराएगी, बल्कि उसके कई प्रकार के अन्य स्वास्थ्य लाभ भी हो सकते हैं। इन उपायों को प्रयोग में लाकर तनाव की समस्या को कम किया जा सकता है।
  • नियमित रूप से शारीरिक व्यायाम करें।
  • मेडिटेशन और शरीर को आराम देने वाले अभ्यास करें। इसके लिए गहरी सांस लेना, ध्यान, योग या मसाज थेरपी कारगर मानी जाती है।
  • परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं।
  • अपनी मनपसंद किताब पढ़ने या संगीत सुनें।
  • अच्छा और पौष्टिक आहार का सेवन करें।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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