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कामकाज, मनोरंजन से लेकर खानपान और खरीदारी तक, लॉकडाउन के बाद ये बदलाव आम बातें होंगी

Thu, 04 Jun 2020 11:29 AM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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संक्रमण काल में हमारी जीवनशैली काफी प्रभावित हुई है - फोटो : Amar Ujala/PTI/Pixabay
कोरोना संक्रमण काल में हमारी जीवनशैली काफी प्रभावित हुई है। हमारे खाने-पीने, सोने-जागने से लेकर कामकाज और दिनभर की गतिविधियों में बहुत सारे बदलाव हुए हैं। भारत में चार चरणों में लगाए गए लॉकडाउन के बाद अब अनलॉक 1.0 की शुरुआत हुई है और बहुत सारी ढील दी गई हैं। इसके बावजूद लोगों को मास्क पहनने, सोशल डिस्टेंसिंग रखने और साफ-सफाई संबंधी अन्य सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है। लॉकडाउन ने बहुत सारी गतिविधियों का ट्रेंड ही बदल कर रख दिया है। लॉकडाउन के पहले तक जो चीजें चलन में थी, जो आदतें हमारे व्यवहार में शामिल थीं, वह अब बदल चुकी है। हाथ न मिलाने, गले न मिलने जैसी कई सारे व्यवहारिक बदलाव तो अब आम हो गए हैं। 
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दफ्तर और कामकाज - फोटो : Pexels
कामकाज और दफ्तरों का स्वरूप
  • लॉकडाउन के दौरान लाखों-करोड़ों लोगों ने वर्क फ्रॉम होम यानी घर से काम किया। उनमें से बहुत सारे लोग अभी भी घर से ही काम कर रहे हैं। इस दौरान मीटिंग, प्लानिंग से लेकर अपने सहकर्मियों के साथ बातचीत, चर्चा वगैरह भी वीडियो कॉल के जरिए या अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों के जरिए हो रहा है। आर्किटेक्ट विशेषज्ञों की मानें तो आने वाले दिनों में दफ्तरों का स्वरूप भी बदलना होगा। 
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भारत में बड़ी संख्या में स्कूल ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करा रहे हैं - फोटो : Pexels
ऑनलाइन कक्षाओं से उच्चतर शिक्षा तक 
  • दुनिया के कुछ जगहों पर जहां स्कूलों और नर्सरी खोली गई हैं, वहां सोशल डिस्टेंसिंग बरकरार रखी जा रही है। यह शिक्षक और छात्रों दोनों के लिए परीक्षा की घड़ी है, सब्र का पाठ है। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इटली के इवरिया में दो किंडरगार्डन स्कूलों के गार्डन पायलट टेस्ट के तहत खोले गए हैं ताकि ये देखा जा सके कि लॉकडाउन के बाद स्कूल दोबारा कैसे खोले जा सकते हैं। भारत में फिलहाल बड़ी संख्या में स्कूल ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करा रहे हैं। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में भी यही पैटर्न अपनाया जा रहा है। 

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Morning Exercise - फोटो : PTI
पार्कों में टहलना, पास होकर भी दूरी
  • लॉकडाउन से पहले लोग सोसाइटी के पार्क में आराम से बैठा करते थे। किस्से, कहानी, बतकही होती थीं, हंसी-ठहाके सुनाए पड़ते थे, लेकिन इस कोरोना ने तो लोगों की हंसी ही छीन ली। पार्क में परिवार के साथ बैठे महीनों हो गए  हैं। लॉकडाउन खत्म हुआ तो थोड़ी चहलकदमी बढ़ी है, लेकिन वह उल्लास अभी गायब सा है। बच्चों के खेलकूद पर बड़ा प्रभाव पड़ा है। यह आम बात है कि पहले की अपेक्षा लोग अब पार्क जाने से परहेज करेंगे। 
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Online Shopping - फोटो : The Petronics
खरीदारी का तरीका
  • लॉकडाउन ने दुकानों से खरीदारी के तरीके भी बदलाव लाया है। सरकार की ढील के बाद ऑनलाइन शॉपिंग फिर से रफ्तार पकड़ रही है। बाजारों में लाइन में खड़े होना, सब्र बनाए रखना हमारे व्यवहार में काफी हद तक शामिल हुआ है। समझदार लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं। आने वाले दिनों में जब शॉपिंग मॉल्स खुलेंगे तो देखना दिलचस्प होगा कि लोग कितना आत्मसंयम बरत रहे हैं। कोरोना का खतरा टला नहीं है, इसलिए लोगों को एहतियात तो बरतने ही होंगे।
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रेस्तरां में खानपान - फोटो : Pixabay
रेस्तरां में खानपान, चौराहे के चाट-पकौड़े
  • आप पिछली बार रेस्तरां कब गए थे? या फिर कब आपने अंतिम बार फूटपाथ पर या किसी चौराहे पर पानीपुरी/फुचके या मुल्तानी मोठ कचौड़ी के चटखारे लिया था? महीनों हो गए न? अब जब धीरे-धीरे सबकुछ खुल रहा है तो क्या आप अपने उसी पुराने विश्वास के साथ परिवार के संग रेस्तरां में बैठेंगे? क्या फुटपाथ के फुचके वाले पर पहले जितना भरोसा कर पाएंगे? जाहिर है, यह सब बहुत मुश्किल होगा। लेकिन दिल और जुबां का क्या करेंगे जनाब? दिल तो बच्चा है जी और जुबां है कि मानेगी नहीं। पर डॉक्टरों की सलाह है कि सबकुछ ठीक होने तक एहतियात बरतें। 
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आपने लास्ट मूवी कौन सी देखी थी? - फोटो : Amar Ujala
मूवी-मस्ती, लाइव कॉन्सर्ट वगैरह
  • जिंदगी पिछले कुछ दिनों से अजीब हो गई है। मनोरंजन के लिए बाहर निकलना दुभर हो गया है। आपने लास्ट मूवी कौन सी देखी थी? छपाक, इंग्लिश मीडियम, थप्पड़, हॉलीवुड की जोकर या फिर कोई और? लाइव कॉन्सर्ट देखे-सुने भी कितने दिन हो गए न! आने वाले दिनों जब थिएटर खुलेंगे तो सीटिंग एरेंजमेंट यानी बैठने की व्यवस्था कैसी होगी? लाइव कॉन्सर्ट वगैरह कैसे होंगे?
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लॉकडाउन में शादी(File Photo) - फोटो : अमर उजाला
शादी-समारोहों का उल्लास
  • लॉकडाउन से पहले बहुतों की शादियां तय हुई होंगी, जो लॉकडाउन के कारण स्थगित हो गई होंगी। कुछ फीसदी शादियां हुई भी तो बिल्कुल सादे समारोह में 10-15 लोगों के बीच। सरकार ने अब ढील तो दी है, लेकिन दोनों पक्षों को मिलाकर मेहमानों और मेजबानों की संख्या सीमित रखने को कहा है। ऐसे में पहले की तरह उल्लास दिखना बहुत मुश्किल है। लोगों को मन मसोस कर रहना होगा। कोरोना के संशय में लोग शामिल होने से भी बचेंगे। आने वाले कुछ महीनों के लिए तो यह आम बात होगी। 
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