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सेहत की बात: प्रोटीन के चक्कर में कहीं हार्ट और किडनी पर अतिरिक्त बोझ तो नहीं बढ़ा रहे आप? जान लीजिए खतरे

Tue, 06 Oct 2026 07:47 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

High Protein Diet: अच्छी सेहत के लिए रोजाना प्रोटीन वाली चीजें खाना जरूरी माना जाता है, हालांकि बहुत ज्यादा प्रोटीन से फायदे की जगह नुकसान हो सकता है। जरूरत से ज्यादा प्रोटीन किडनी पर अतिरिक्त दबाव बढ़ाने वाली हो सकती है।
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ज्यादा प्रोटीन भी नुकसानदायक - फोटो : Amarujala.com/AI
प्रोटीन को शरीर का बिल्डिंग ब्लॉक कहा जाता है। ये मांसपेशियों, हड्डियों, त्वचा और हार्मोन समेत कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के लिए जरूरी है। फिटनेस और वजन घटाने के बढ़ते ट्रेंड के बीच हाई-प्रोटीन डाइट और प्रोटीन सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल भी तेजी से लोकप्रिय हुआ है। लेकिन क्या ज्यादा प्रोटीन लेना हमेशा ज्यादा फायदे वाला होता है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, शरीर को एक नियत मात्रा में ही प्रोटीन चाहिए होता है, जरूरत से बहुत ज्यादा सेवन लंबे समय में आपके लिए फायदे की जगह नुकसान बढ़ाने वाला हो सकता है। इससे पाचन में गड़बड़ी से लेकर किडनी और हार्ट हेल्थ तक को खतरा हो सकता है। जिन लोगों को पहले से किडनी की बीमारी है, उन्हें प्रोटीन वाली चीजों के सेवन को लेकर और सावधानी बरतनी चाहिए।

आइए जानते हैं कि प्रोटीन की अधिकता के क्या नुकसान हो सकते हैं और इसका किडनी की सेहत पर क्या असर होता है?
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प्रोटीन की अधिकता से पाचन की दिक्कतें - फोटो : Adobe Stock
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा प्रोटीन वाली चीजें लेने से शरीर पर कई तरह के हानिकारक प्रभाव पड़ सकते हैं। स्वस्थ शरीर आमतौर पर प्रोटीन की थोड़ी बढ़ोतरी को संभाल सकता है, लेकिन इसका जरूरत से ज्यादा सेवन कई आम समस्याओं का कारण बन सकता है। अगर आप पशु आधारित डाइट या सप्लीमेंट्स के जरिए ज्यादा प्रोटीन ले रहे हैं तो ये गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।

पाचन की समस्याएं
 
  • हाई-प्रोटीन डाइट में अगर मांस, अंडे या प्रोटीन सप्लीमेंट बढ़ाने के साथ फाइबर वाले खाद्य पदार्थ कम कर दिए जाएं, तो इससे पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
  • फाइबर की कमी कब्ज का एक प्रमुख कारण है। कुछ लोगों में ज्यादा प्रोटीन पाउडर या डेयरी सप्लीमेंट लेने से गैस, पेट फूलने या दस्त जैसी परेशानी भी हो सकती है।
  • इसलिए प्रोटीन बढ़ाते समय डाइट में पर्याप्त फाइबर और तरल पदार्थों का लेवल ठीक रखना भी जरूरी है।
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किडनी की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
किडनी की समस्याओं का खतरा

हमारी किडनी प्रोटीन वाली चीजों के पाचन और मेटाबॉलिज्म के बाद बनने वाले अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालती रहती है। ऐसे में हाई-प्रोटीन डाइट किडनी के काम का बोझ बढ़ा सकती है। 
 
  • वैसे तो स्वस्थ लोगों में सामान्य से कुछ ज्यादा प्रोटीन लेने से किडनी की समस्याओं के प्रमाण नहीं है।  
  • लेकिन जिन लोगों को पहले से क्रॉनिक किडनी डिजीज है, उनमें ज्यादा प्रोटीन नुकसानदायक हो सकता है। 
  • किडनी की बीमारी वाले लोगों को हाई-प्रोटीन डाइट या सप्लीमेंट शुरू करने से पहले डॉक्टर या डाइटीशियन से सलाह जरूर लेनी चाहिए।
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हृदय रोगों की समस्या - फोटो : Adobe Stock Images
हार्ट के लिए दिक्कतें

वैसे तो प्रोटीन दिल के लिए नुकसानदायक नहीं है, हालांकि अगर प्रोटीन के स्रोत और पूरी डाइट की गुणवत्ता में गड़बड़ी है तो इससे हार्ट हेल्थ पर असर हो सकता है। 
 
  • अगर हाई-प्रोटीन डाइट में प्रोसेस्ड मीट या ज्यादा संतृप्त वसा वाले खाद्य पदार्थ ज्यादा हैं, तो लंबे समय में इससे हृदय रोग के जोखिम से जुड़े कारक बढ़ सकते हैं। 
  • प्रोटीन के लिए दालें, बीन्स, नट्स, मछली और अन्य पौध-आधारित स्रोत अच्छे विकल्प हो सकते हैं। इसलिए ज्यादा प्रोटीन के बजाय सही स्रोत से पर्याप्त प्रोटीन पर ध्यान देना चाहिए।


कितना प्रोटीन जरूरी है? 

स्वस्थ वयस्कों के लिए शरीर के वजन के प्रति किलोग्राम पर लगभग 0.8 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है। यानी 60 किलो वजन वाले व्यक्ति के लिए करीब 48 ग्राम प्रोटीन की प्रतिदिन जरूरत होती है। हालांकि आपकी उम्र, शारीरिक गतिविधि, गर्भावस्था जैसी स्थितियों में प्रोटीन की जरूरत कम या ज्यादा हो सकती है। नियमित एक्सरसाइज या मांसपेशियां बढ़ाने वाले लोगों की जरूरत अधिक होती है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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