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बड़ा कदम: इंसान में जानवर का हृदय लगाकर बचाई जान, इस तकनीक से हर साल एक लाख मौतों का कम हो सकता है खतरा

Sat, 23 Sep 2023 12:20 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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गलत जगह पर था शख्स का दिल - फोटो : iStock
हृदय रोगों का खतरा वैश्विक स्तर पर बढ़ा है, यह दुनियाभर में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से भी एक है। हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट जैसी गंभीर स्थितियों में अगर रोगी को समय पर इलाज न मिल पाए तो इससे जान जाने का भी जोखिम रहता है। हृदय रोगों की गंभीर स्थिति में हार्ट ट्रांसप्लांट कराने की भी आवश्यकता हो सकती है। ऐसे ही एक मामले में डॉक्टरों की टीम ने इंसान में जानवर के दिल का सफल प्रत्यारोपण किया है।

58 वर्षीय रोगी लॉरेंस फॉसेट में किए गए इस हार्ट ट्रांसप्लांटेशन को लेकर डॉक्टर्स की टीम काफी आशान्वित है, उन्हें उम्मीद है कि जानवर का दिल इंसानों में भी बेहतर तरीके से काम करेगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यूनाइटेड स्टेट्स की यूनिवर्सिटी ऑफ मेरीलैंड स्कूल ऑफ मेडिसिन के विशेषज्ञों ने रोगी में आनुवंशिक रूप से संशोधित सुअर का हृदय प्रत्यारोपित किया है, सर्जरी के बाद रोगी की स्थिति स्थिर बनी हुई है, फिलहाल उसमें किसी प्रकार की जटिलता नहीं है। डॉक्टर्स को उम्मीद है कि सुअर का मोडिफाइड हृदय इंसानों में भी बेहतर तरीके से काम करेगा। आइए जानते हैं कि जानवरों का हृदय इंसानों में किस प्रकार से काम करता है? 
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हार्ट ट्रांसप्लांट कर बचाई रोगी की जान - फोटो : istock
सुअर का हार्ट प्रत्यारोपित करने का ये दूसरा मामला

यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड मेडिकल सेंटर ने शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में बताया, सर्जनों ने आनुवंशिक रूप से परिवर्तित सुअर के दिल को हृदय रोग से पीड़ित एक व्यक्ति में प्रत्यारोपित किया है, जिसके इलाज की कोई अन्य उम्मीद नहीं थी।

यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि जानवरों के हार्ट को इंसानों में लगाने का ये दूसरा मामला है। इससे पहले 57 वर्षीय व्यक्ति को भी सुअर का हार्ट लगाया गया था, हालांकि दो महीने बाद ही उसकी मौत हो गई थी। इस दूसरे मामले में डॉक्टरों का कहना है कि इस बार हमें बेहतर उम्मीद है, अब तक की स्थिति काफी आशाजनक बनी हुई है। 
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हार्ट ट्रांसप्लांटेशन के बारे में जानिए - फोटो : istock
क्या कहते हैं डॉक्टर?

हालिया मामले में रोगी लॉरेंस फॉसेट में भी सुअर का हार्ट ट्रांसप्लांट मैरीलैंड स्कूल ऑफ मेडिसिन के डॉ. बार्टली ग्रिफ़िथ ने ही किया है, जिन्होंने पहले रोगी में ट्रांसप्लांटेशन किया था। पहले मामले में प्रत्यारोपण के बाद कई जटिलताओं, सुअरों को संक्रमित करने वाले वायरस के संक्रमण के कारण रोगी की मौत हो गई थी।

डॉ. बार्टली कहते हैं, दूसरी बार इस मामले में सभी आवश्यक सावधानियां बरती गई हैं, हमें उम्मीद है कि इस बार संक्रमण या फिर किसी तरह की जटिलता नहीं आएगी। सर्जरी के बाद लॉरेंस की स्थिति काफी अच्छी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लॉरेंस, लाइलाज हृदय रोग के शिकार थे, इसके अलावा उनमें कई अन्य जटिल चिकित्सा स्थितियां भी थीं, जिसके इलाज के लिए हार्ट ट्रांसप्लांटेशन ही एक मात्र तरीका था। 
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हर साल बढ़ रही है अंगों के प्रत्यारोपण की माग - फोटो : Pixabay
जेनोट्रांसप्लांटेशन विज्ञान से लाखों जान बचने की उम्मीद

यहां गौर करने वाली बात ये है कि हाल के वर्षों में, जेनोट्रांसप्लांटेशन विज्ञान ने जीन एडिटिंग और क्लोनिंग तकनीकों के साथ बड़ी प्रगति की है, जिसके माध्य्यम से जानवरों के अंगों को इस तरह से मोडिफाइड किया जा रहा है जिससे मानव प्रतिरक्षा प्रणाली उसे बिना किसी अतिरिक्त प्रतिक्रिया के स्वीकार कर ले। हालांकि ये प्रयास अभी शुरुआती चरणों में है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस तकनीक में सफलता के बाद एक लाख से अधिक अमेरिकियों को जीने के लिए नई उम्मीद मिलेगी जिन्हें ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है।  

अधिकांश मामलों में रोगियों को किडनी की आवश्यकता होती है, लेकिन हर साल 25,000 से भी कम किडनी प्रत्यारोपण किए जाते हैं और हजारों लोग प्रतीक्षा सूची में ही जान गंवाने को मजबूर हैं। 



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स्रोत और संदर्भ
Genetically Modified Pig’s Heart Is Transplanted Into a Second Patient

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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