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Budget 2022 विशेष: कितनी आशा-कितनी निराशा? स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के नजरिए से समझिए कैसा रहा यह बजट?

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हेल्थकेयर बजट 2022 - फोटो : ANI
भारत सरकार ने मंगलवार को साल 2022-23 के लिए देश का बजट पेश किया। केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट में, निवेश चक्र को आगे बढ़ाने और महामारी से जूझते इस दौर में भारत की आर्थिक सुधार को गति देने पर जोर दिया। कोरोना के कारण पिछले दो साल से अधिक समय से पूरी दुनिया परेशान है। भारत के स्वास्थ्य ढांचे पर भी इसका गंभीर असर देखने को मिला है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए बजट 2022-23 में हेल्थ केयर सेक्टर के लिए 'बूस्टर डोज' की उम्मीद की जा रही थी।

बजट में हेल्थकेयर सिस्टम को लेकर जिन दो बातों पर खास जोर रहा वह है- नेशनल डिजिटल हेल्थ इको सिस्टम और नेशनल टेली मेंटल हेल्थ प्रोग्राम। स्वास्थ्य क्षेत्र में बूस्ट की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य बजट में 135 फीसदी का इजाफा करने का ऐलान किया गया है। इसे 94 हजार करोड़ से बढ़ाकर 2.38 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। योजनाओं के अनुसार केंद्र सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में अगले 6 वर्षों में करीब 61 हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी। हेल्थकेयर सिस्टम को लेकर बजट 2022-23 कितनी आशा-निराशा वाला रहा है, आइए स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के नजर से इसे समझते हैं। 
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हेल्थकेयर पर ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता - फोटो : डॉ शुचिन बजाज
डॉ शुचिन बजाज
(निदेशक औऱ संस्थापक)
उजाला सिग्नस हॉस्पिटल्स


उजाला सिग्नस हॉस्पिटल्स के संस्थापक और निदेशक डॉ शुचिन बजाज इस बजट से बहुत संतुष्ट नहीं हैं। डॉ शुचिन कहते हैं, जिस तरह से देश पिछले दो सालों से कोरोना महामारी के दौर से गुजर रहा है, ऐसे में उम्मीद की जा रही थी कि इस बार के बजट में हेल्थकेयर सेक्टर पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। ऐसी उम्मीद की जा रही थी कि देश के जीडीपी के 3 फीसदी हिस्से को स्वास्थ्य क्षेत्र पर खर्च किया जाएगा, इस लिहाज से इस बजट में कुछ बहुत खास देखने को नहीं मिला है।



नेशनल डिजिटल हेल्थ इको सिस्टम और नेशनल टेली मेंटल हेल्थ प्रोग्राम ही इस बजट में दो खास चीजें देखने को मिली हैं। डिजिटल हेल्थ इको सिस्टम के माध्यम से सभी को यूनिक हेल्थ आईडी मिलेगी, स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजीटलाइजेशन को बढ़ाना अच्छा कदम है, भविष्य में इसके लाभ देखने को मिलेंगे। इसके अलावा मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जो कदम सरकार ने उठाने के लिए ऐलान किया है वह भी सराहनीय है। पर स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बढ़ी चुनौतियों को देखते हुए हमें इससे ज्यादा की उम्मीद थी। प्राइमरी और प्रीवेंटिव हेल्थ को लेकर  ज्यादा चर्चा न होना थोड़ा निराश करता है। फिलहाल उम्मीद की जा रही है कि यह बजट देश के समग्र विकास को बढ़ावा देने वाला होगा।
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मानसिक स्वास्थ्य के नजरिए से बेहतर बजट - फोटो : डॉ सत्यकांत त्रिवेदी
डॉ सत्यकांत त्रिवेदी
मनोरोग विशेषज्ञ
भोपाल, मध्य प्रदेश


मानसिक स्वास्थ्य देखभाल को लेकर बजट 2022 में उठाए गए कदम को वरिष्ठ मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ सत्यकांत त्रिवेदी सराहनीय बताते हैं। डॉ सत्यकांत कहते हैं, कोरोना के इस दौर ने मानसिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौतियां पैदा की हैं। टेलीमेंटल सेंटरों के शुरुआत की घोषणा करना  निश्चित ही स्वागतयोग्य कदम है। इससे दूर-दराज के गांवों में रहने वाले लोगों को भी समय पर मानसिक स्वास्थ्य का उपचार और काउंसिलिंग आसानी से उपलब्ध हो सकेगा। देश में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की काफी कमी है, ऐसे में लोगों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता था, यह कदम इस दिशा में बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा। 

डॉ सत्यकांत कहते हैं, मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सरकार ने जो कदम उठाए हैं वह बेहतर पहल है, लेकिन योजनाओं का क्रियान्वयन कई बार इसमें मुश्किल बन जाता है। आगे केंद्र और राज्य सरकारें इसे कितने प्रभावी ढंग से लागू करती हैं, यह महत्वपूर्ण होगा। अगर राज्य सरकारें भी इसे सकारात्मक रूप से अपनाएंगी तो इसके अच्छे परिणाम देखने को मिल सकते हैं। इन सबके साथ मानसिक स्वास्थ्य को लेकर देश में व्यापक रूप से जागरूकता अभियान की शुरुआत करने आवश्यकता है, क्योंकि अक्सर लोगों को पता ही नहीं होता है कि वह किसी मानसिक स्वास्थ्य के शिकार हैं। मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में फैले स्टिग्मा पर भी सरकार को ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि मानसिक स्वास्थ्य का सीधा संबंध हमारी उत्पादकता से है। फिलहाल सरकार ने मानसिक स्वास्थ्य को गंभीरता से लिया है, यह पहल स्वागतोग्य है।
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समग्र विकास वाला बजट - फोटो : आरुषि जैन
आरुषि जैन
(एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर)
स्टेहैपी फार्मेसी


दवा उद्योग से संबंधित कंपनी स्टेहैपी फार्मेसी की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर आरुषि जैन ने स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर बजट 2022 को स्वागतयोग्य बताया है। आरुषि कहती हैं, प्रीवेंटिव एंड क्यूरेटिव हेल्थ के साथ-साथ नागरिकों के समग्र कल्याण को लेकर सरकार ने बेहतर प्रयास किया है। नेशनल डिजिटल हेल्थ इको सिस्टम जैसी पहल काफी आशावादी है, जिसमें स्वास्थ्य प्रदाताओं और स्वास्थ्य सुविधाओं की डिजिटल रजिस्ट्रियां, लोगों को विशिष्ट स्वास्थ्य पहचान और आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त होंगी। हेल्थ केयर सिस्टम को बढ़ावा देने की दिशा में इस बजट को काफी सकारात्मक माना जा सकता है। 

बजट 2022-23 में इंटरनेट जाल को बढ़ावा देने पर जोर देने से भी सकारात्मक उम्मीद बढ़ती है। लोगों को आसानी से डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हो सकेंगी जिससे दूर-दराज के क्षेत्रों में हर व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य पहुंचाने का सपना पूरा होगा। हेल्थ केयर सिस्टम पिछले दो साल से बड़ी चुनौतियों से जूझ रहा है, ऐसे में यह बजट उम्मीदों से भरा हुआ है। 


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नोट: यह लेख स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का बजट पर राय के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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