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काफी खतरनाक है रूमेटाइड अर्थराइटिस की बीमारी, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज, जानें कैसे होता है इलाज

Mon, 31 May 2021 12:27 PM IST
प्रकाश चंद जोशी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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rheumatoid arthritis - फोटो : istock
डॉक्टर आईएन वाजपई
न्यूरो सर्जन
अनुभव- 45 वर्ष

Medically Reviewed by Dr. I. N. Vajpayee

आज की दौड़ती-भागती जिंदगी में कई तरह की ऐसी बीमारियां हैं, जो इंसान के आसपास रहती हैं और कब किसे अपना शिकार बना लें कुछ कहा नहीं जा सकता। वहीं, कोरोना काल ने तो हर किसी को अपने स्वास्थ्य के प्रति पहले से काफी ज्यादा चिंतित कर दिया है। इसी कड़ी में एक बीमारी है रूमेटाइड अर्थराइटिस। जितना अजीब इसका नाम है, उससे कहीं ज्यादा या दिक्कतें व्यक्ति को देती है। तो चलिए जानते हैं इस बीमारी के बारे में और इसके लक्षण से लेकर इलाज तक के बारे में।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
दरअसल, रूमेटाइड अर्थराइटिस यानी गठिया के मरीजों को घुटनों, पीठ, कलाई, एड़ियों और गर्दन के जोड़ों में दर्द होता है। वहीं, इस बीमारी की चपेट में खासकर बुजुर्ग आते हैं। हालांकि, अपनी खराब लाइफस्टाइल के कारण अब इस बीमारी का शिकार युवा भी हो रहे हैं। वहीं, अगर इस बीमारी को हल्के में लिया जाए और इसका समय रहते इलाज न कराया जाए तो ये जोड़ों और हड्डियों के अलावा आंखों, त्वचा और हमारे फेफड़ों जैसे कई अंगों को प्रभावित कर सकती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
इसे आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि रूमेटाइड अर्थराइटिस एक ऑटोइम्यून बीमारी है। जहां एक तरफ हमारा इम्यून सिस्टम हमारे शरीर को किसी भी वायरस और बैक्टीरिया के इंफेक्शन से बचाता है, तो वहीं दूसरी तरफ एक ऑटोइम्यून बीमारी में इम्यून सिस्टम शरीर के स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगता है। ऐसे में शरीर के अंगों में काफी ज्यादा जोड़ों में दर्द और सूजन पैदा होने लगती है। लंबे समय तक सूजन रहने की वजह से जोड़ों को नुकसान पहुंच सकता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ये हैं लक्षण:-

-कमजोरी होना
-हल्का बुखार आना
-भूख न लगना
-मुंह और आंखों का सूखना
-शरीर में गांठ बनना
-सुबह-सुबह शरीर के किसी अंग में लंबे समय तक अकड़न महसूस करना। हालांकि, ये अकड़न शरीर की मूवमेंट के अनुसार ठीक हो जाती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
किन्हें ज्यादा खतरा?
  • कई अध्ययन बताते हैं कि रूमेटाइड अर्थराइटिस से सबसे ज्यादा खतरा पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को है। 30 से 50 साल की उम्र में लगभग 75 फीसदी महिलाएं इससे ग्रसित पाई गई हैं। हालांकि, रूमेटाइड अर्थराइटिस किसी भी उम्र में किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है।
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x-ray - फोटो : social media
ऐसे पता लगाया जाता है इस बीमारी के बारे में
  • रूमेटाइड अर्थराइटिस का पता लगाने के लिए व्यक्ति का ब्लड टेस्ट, जोड़ों और अंगों की जांच और एक्स-रे या फिर अल्ट्रासाउंड से पता लगाया जा सकता है। वहीं, आपको अगर इस बीमारी के कोई भी लक्षण नजर आए तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, ताकि समय रहते इसका इलाज किया जा सके।
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प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : पिक्साबे
ऐसे होता है इलाज
  • रूमेटाइड अर्थराइटिस के उपचार के लिए आमतौर पर एक डिजीज मॉडिफाइड एंटी रूमेटिक ड्रग डीएमएआरडी दी जाती है। इसके अलावा नॉन स्टेरायडल एंटी इंफ्लेमेटरी ड्रग एनएसएआईडी या लो डोज कॉर्टिकोस्टेरॉइड का उपयोग डीएमएआरडी के साथ किया जा सकता है। अगर डीएमएआरडी आरए सूजन को नियंत्रित नहीं करते हैं तो रूमेटोलॉजिस्ट (इलाज करने वाला डॉक्टर) इससे संबंधित दवाई दे सकता है।

नोट: डॉ. आईएन वाजपई अत्यधिक योग्य और अनुभवी न्यूरो सर्जन है। इन्होंने लखनऊ के केजीएमसी से अपना एमबीबीएस किया है। इसके बाद इन्होंने अपनी जनरल सर्जरी में एमएस किया और न्यूरी सर्जरी में एमसीएच की पढ़ाई की है। इन्होंने 1996 में कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में काम किया और 2012 में प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष के रूप में रिटायर हुए। डॉक्टर आईएन वाजपाई आईएमए एंड न्यूरोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉक्टर वाजपई को 45 वर्षों का अनुभव है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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