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Health Tips: ये छोटी गलतियां बढ़ाती हैं मानसिक तनाव, सिनीयर डॉक्टर ने बताए छह बड़े कारण

Sun, 04 Jan 2026 07:36 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Ways To Lower Cortisol Hormone :आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक तनाव होना बहुत आम बात है। बहुत से लोग इस समस्या से परेशान रहते हैं। आइए इस लेख में डॉक्टर से जानते हैं कि इस समस्या के पीछे का मूल कारण क्या है?
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स्ट्रेस - फोटो : Adobe Stock
Science Of Blue Light And Sleep: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक तनाव एक आम समस्या बन चुका है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे शरीर का मुख्य 'स्ट्रेस हार्मोन' यानी कोर्टिसोल इसमें सबसे बड़ी भूमिका निभाता है? कोर्टिसोल हमें तनावपूर्ण स्थितियों से निपटने में मदद करता है, लेकिन हमारी कुछ दैनिक गलतियां इस हार्मोन के प्राकृतिक चक्र को बिगाड़ देती हैं। 

जब शरीर में कोर्टिसोल का स्तर लगातार ऊंचा बना रहता है, तो इसका सीधा असर हमारी नींद, मेटाबॉलिज्म, मूड और शारीरिक रिकवरी पर पड़ता है। अक्सर हम अपनी थकान या चिड़चिड़ापन के लिए काम के दबाव को जिम्मेदार ठहराते हैं, जबकि असली कारण हमारे सोने का गलत तरीका, खान-पान की लापरवाही या स्क्रीन का अत्यधिक मोह हो सकता है। 

इसी विषय पर गहराई से जानकारी साझा करते हुए डॉक्टर कुनाल सूद (MD) ने एक वीडियो के माध्यम से उन छह प्रमुख कारणों का खुलासा किया है जो अनजाने में हमारे मानसिक तनाव को बढ़ा रहे हैं। इन आदतों को सुधारकर ही हम अपने कोर्टिसोल लेवल को नियंत्रित कर सकते हैं और एक मानसिक रूप से स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।



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नींद नहीं आना - फोटो : Adobe Stock
नींद की कमी
डॉक्टर कुनाल सूद के अनुसार, नींद की कमी कोर्टिसोल के स्तर को सीधे प्रभावित करती है। आमतौर पर रात के समय कोर्टिसोल का लेवल गिरना चाहिए ताकि शरीर को आराम मिले, लेकिन एक रात की खराब नींद भी शाम के समय कोर्टिसोल को बढ़ा सकती है। लंबे समय तक कम सोने से अगले दिन तनाव की प्रतिक्रिया और भी तीव्र हो जाती है, जिससे मानसिक थकावट बनी रहती है।

ओवरट्रेनिंग
व्यायाम करना सेहत के लिए अच्छा है, लेकिन जरूरत से ज्यादा कसरत यानी 'ओवरट्रेनिंग' तनाव का कारण बन सकती है। डॉक्टर सूद बताते हैं कि एक्सरसाइज के दौरान कोर्टिसोल कुछ समय के लिए बढ़ता है और फिर सामान्य हो जाता है। लेकिन जब वर्कआउट शरीर की रिकवरी क्षमता से अधिक हो जाता है, तो कोर्टिसोल का लेवल असामान्य हो जाता है, जिससे मानसिक तनाव का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
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कॉफी पीने के फायदे - फोटो : Freepik.comAl
कैफीन की अधिकता
अगर आप दिनभर में कई कप चाय या कॉफी पीते हैं, तो सावधान हो जाएं। कैफीन एडेनोसिन को ब्लॉक कर देता है, जिससे शरीर में ACTH और कोर्टिसोल का स्राव बढ़ जाता है। डॉक्टर के मुताबिक अधिक मात्रा में कैफीन लेने से कोर्टिसोल का स्तर घंटों तक बढ़ा रहता है, जिससे आपका मस्तिष्क शांत नहीं हो पाता और आप हर समय तनाव महसूस करते हैं।

मील स्किपिंग
अक्सर लोग काम की व्यस्तता में नाश्ता या खाना छोड़ देते हैं, जिसे डॉक्टर सूद एक मेटाबॉलिक स्ट्रेसर मानते हैं। जब आप लंबे समय तक भूखे रहते हैं, तो रक्त शर्करा के लेवल को बनाए रखने के लिए शरीर कोर्टिसोल बढ़ा देता है। नियमित रूप से भोजन छोड़ने की आदत कोर्टिसोल के सामान्य चक्र को पूरी तरह बिगाड़ देती है और चिड़चिड़ापन बढ़ाती है।

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स्क्रीन ओवरलोड - फोटो : Freepik.com
स्क्रीन ओवरलोड
सोने से पहले घंटों मोबाइल या लैपटॉप का उपयोग करना कोर्टिसोल को बढ़ाता है। स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट हमारी जैविक घड़ी को बाधित करती है और मेलाटोनिन हार्मोन को दबा देती है। इससे न केवल नींद की गुणवत्ता खराब होती है, बल्कि शाम के समय कोर्टिसोल का लेवल अधिक बना रहता है, जो क्रोनिक स्ट्रेस का कारण बनता है।

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मानसिक तनाव को कम करने के उपाय - फोटो : Adobe Stock
भावनात्मक तनाव
भावनात्मक तनाव सीधे तौर पर हमारे HPA (हाइपोथैलेमिक-पिट्यूटरी-एड्रेनल) एक्सिस को सक्रिय करता है, जिससे कोर्टिसोल का संतुलन बिगड़ जाता है। डॉ. कुनाल सूद की सलाह है कि इन छह गलतियों को पहचानें और अपनी जीवनशैली में बदलाव लाएं। पर्याप्त नींद, समय पर भोजन और डिजिटल डिटॉक्स के जरिए आप अपने तनाव हार्मोन को नियंत्रित कर सकते हैं।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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