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Health Tips: बेहद साधारण होते हैं अवसाद के शुरुआती लक्षण, नजरअंदाज करने पर बन सकते हैं मेंटल हेल्थ के मरीज

Sun, 04 Jan 2026 03:20 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Early Symptoms Of Depression And Remedies: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बहुत से लोग अवसाद से जूझ रहे हैं, लेकिन उनमें से कम लोगों को ही इसके बारे में मालूम है और वो इसका इलाज कराते हैं। इसलिए आइए इस लेख में डॉक्टर से डिप्रेशन के शुरुआती लक्षणों के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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अवसाद की समस्या - फोटो : Amar Ujala
Doctor Advice Mental Health: मानसिक स्वास्थ्य आज के समय की एक बड़ी चुनौती बन गया है, लेकिन अक्सर लोग अवसाद या डिप्रेशन को केवल 'दुख' समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। वास्तव में डिप्रेशन सिर्फ मन की उदासी नहीं है, बल्कि यह शरीर में होने वाले रासायनिक परिवर्तनों का परिणाम है।

जब हमारे मस्तिष्क में खुशी और उत्साह महसूस कराने वाले न्यूरोट्रांसमीटर, जैसे डोपामीन और सेरोटोनिन, का स्तर धीरे-धीरे गिरने लगता है, तो शरीर और व्यवहार दोनों में बदलाव आने लगते हैं। डिप्रेशन के शुरुआती लक्षण इतने साधारण होते हैं कि व्यक्ति इन्हें आलस या सामान्य थकान समझ लेता है। समय रहते अगर इन संकेतों को पहचान लिया जाए, तो इस बीमारी को गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता है।

मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता ही आपको एक मरीज बनने से बचा सकती है। इसी विषय की गंभीरता को समझाते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉक्टर शालिनी सिंह सोलंकी ने सोशल मीडिया पर डिप्रेशन के पांच प्रमुख चेतावनी संकेतों के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की है, जिसके बारे में आपको भी जानना चाहिए।
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स्ट्रेस - फोटो : Adobe Stock
रूचि का अभाव और नकारात्मक विचार
डॉ. सोलंकी के अनुसार पहला लक्षण है अपनी पसंदीदा चीजों जैसे संगीत, पेंटिंग या हॉबीज में रुचि खो देना। यह आलस नहीं बल्कि 'इमोशनल शटडाउन' का संकेत है। इसके साथ ही व्यक्ति 'निगेटिव सेल्फ टॉक' करने लगता है, जहां वह खुद को हर गलती के लिए जिम्मेदार मानता है और गिल्टी महसूस करता है। खुद को बेकार समझना और लोगों से दूरी बनाना इस मानसिक स्थिति को और गंभीर कर देता है।

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नींद नहीं आना - फोटो : Adobe Stock
ऊर्जा की कमी और बिगड़ा हुआ स्लीप पैटर्न
बिना किसी शारीरिक श्रम के भी लगातार थकान और कम ऊर्जा महसूस होना अवसाद का एक बड़ा शारीरिक लक्षण है। इसके अलावा, नींद का पैटर्न पूरी तरह बिगड़ जाता है, व्यक्ति या तो दिनभर सोता रहता है या उसे रात भर नींद नहीं आती। जब मस्तिष्क को शांति नहीं मिलती, तो शरीर भी रिकवर नहीं हो पाता, जिससे चिड़चिड़ापन और मानसिक भारीपन बढ़ता चला जाता है।

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रस्सी कूदना - फोटो : Adobe Stock
बचाव का पहला कदम
अवसाद के चक्र को तोड़ने के लिए डॉ. शालिनी सिंह सोलंकी व्यायाम करने की सलाह देती हैं। शारीरिक गतिविधि से शरीर में 'एंडोर्फिन' और अन्य खुश रहने वाले हार्मोन्स का स्राव बढ़ता है, जो मूड को नेचुरल रूप से सुधारते हैं। नियमित वर्कआउट न केवल शरीर को सक्रिय रखता है, बल्कि मस्तिष्क को नकारात्मक विचारों के जाल से बाहर निकालने में भी मदद करता है।


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सोशल कनेक्टिविटी है जरूरी - फोटो : Adobe Stock
सोशल कनेक्टिविटी और हॉबीज को समय दें
अकेलेपन से बचने के लिए सामाजिक मेलजोल बढ़ाना और अपनी पसंदीदा हॉबीज को समय देना अनिवार्य है। दोस्तों और परिवार के साथ बात करने से मन का बोझ हल्का होता है और सकारात्मकता बढ़ती है। डॉक्टर का कहना है कि खुद को सुरक्षित महसूस कराने के लिए लोगों से दूर भागने के बजाय, उनसे जुड़ना ही इस बीमारी का सबसे बड़ा उपचार है। अगर लक्षण बने रहें तो विशेषज्ञ से सलाह लेने में संकोच न करें।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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