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CoronaVirus Vaccine: दूसरी कोरोना वैक्सीन पर रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने दी खुशखबरी, जानें कब उपलब्ध होगा टीका

Sun, 30 Aug 2020 12:46 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Coronavirus Vaccine - फोटो : Amar Ujala
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच दुनिया की पहली वैक्सीन बनाने का श्रेय रूस ने ले लिया। इस पर तमाम विवाद हुए और आपत्तियां जताई गई, लेकिन रूस ने आरोपों से किनारा करते हुए स्पुतनिक-वी(Sputnik V) नाम की इस वैक्सीन के उत्पादन और वितरण की योजना भी तैयार कर ली। इस बीच चीन ने भी तीसरे चरण के ट्रायल से पहले ही एक वैक्सीन को मान्यता दे दी और रूस से पहले ऐसा करने का दावा किया। इधर, रूस में कोरोना की एक और वैक्सीन EpiVacCorona तैयार कर ली गई है, जिसे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बहुत बढ़िया बताया है। पुतिन ने कहा है कि रूस की इस दूसरी वैक्सीन EpiVacCorona और पहली वैक्सीन Sputnik V के बीच प्रतिस्पर्धा होगी। 



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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई
  • रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने कहा है कि कोरोना की वैक्सीन बाजार में लाने के लिए रूस दुनिया को रास्ता दिखा रहा है। उन्होंने कहा है कि वेक्टर इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों ने एक बढ़िया वैक्सीन तैयार की है जो लोगों की काफी मदद करेगी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • रूस की यह दूसरी वैक्सीन EpiVacCorona अगले महीने लॉन्च की जा सकती है। राष्ट्रपति पुतिन ने कहा है कि एक और वैक्सीन सितंबर में आ रही है, जिसे फेमस वेक्टर स्टेट रिसर्च सेंटर ऑफ वायरोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी ने तैयार किया है। इधर, कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि रूस की दूसरी कोरोना वैक्सीन से भी मांसपेशियों में दर्द की शिकायत हो सकती है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • मालूम हो कि रूस की पहली वैक्सीन को गमलेया नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर एपिडेमिलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी ने तैयार किया था। इसमें रूस के रक्षा मंत्रालय का भी सहयोग था। वहीं, दूसरी वैक्सीन EpiVacCorona को वेक्टर स्टेट रिसर्च सेंटर ऑफ वायरोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी ने तैयार किया है, जिसकी गिनती दुनिया के शीर्ष शोध संस्थानों में होती है। पुतिन ने कहा है कि उन्हें वेक्टर इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों पर पूरा भरोसा है। संस्थान ने बढ़िया वैक्सीन तैयार की है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • वेक्टर स्टेट रिसर्च सेंटर ऑफ वायरोलॉजी एंड बायोटेक्नोलॉजी दुनिया के उन दो प्रमुख संस्थानों में से एक है, जिसके पास चेचक की वैक्सीन का सबसे बड़ा स्टॉक है। वैक्सीन की ड्रग साइबेरिया के सोवियत बायोलॉजिकल वेपंस रिसर्च प्लांट से मंगाई गई है। वैज्ञानिकों का दावा है कि जिन वॉलंटियर्स पर वैक्सीन का ट्रायल किया गया, उन्हें 23 दिन के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया था। ट्रायल के दौरान उनकी जांच की गई। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay
  • वैज्ञानिकों का लक्ष्य वैक्सीन की डोज से पैदा हुए इम्यून रेस्पॉन्स को देखना था। इसके लिए 14 से 21 दिन में वॉलंटियर्स को वैक्सीन की दो डोज दी गईं। रूस के राष्ट्रपति ने इस वैक्सीन के सितंबर में आने की संभावना के बारे में बताया है। लेकिन इससे पहले आ रही रिपोर्टों में कहा जा रहा था कि सितंबर में ट्रायल ही पूरा होगा और उसके बाद ही वैक्सीन आ पाएगी। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
  • मालूम हो कि सोवियत बायोलॉजिकल वेपंस रिसर्च प्लांट और वेक्टर रिसर्च सेंटर ने मिलकर अब तक 13 वैक्सीन पर साथ काम किया है, जिनका जानवरों पर ट्रायल हुआ था। वेक्टर रिसर्च सेंटर के साथ मिलकर औद्योगिक स्तर पर स्मॉल पॉक्स की भी वैक्सीन बनाई गई थी। वहीं, पिछले कुछ सालों में रूस ने इसी संस्थान के साथ मिलकर ब्यूबोनिक प्लेग, एचआईवी, इबोला, हेपेटाइटिस-बी, सार्स और कैंसर का एंटीडोज भी तैयार किया था।
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Coronavirus Vaccine - फोटो : Twitter@NewsAtIllinois
  • इस वैक्सीन से पहले बीते 11 अगस्त को रूस ने दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन 'स्पुतनिक-वी' का पंजीकरण कर दुनिया को चौंका दिया था। रूस के रक्षा मंत्रालय और गामालेया रिसर्च सेंटर द्वारा तैयार यह वैक्सीन पंजीकृत होने के साथ ही विवादों में घिर गई। हालांकि रूस ने आरोपों का खंडन किया है और कई देशों के साथ मिलकर इसके उत्पादन और विपणन की तैयारी में है।

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