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HIV Aids: सिर्फ दवाओं के जरिए ठीक हुआ एड्स पीड़ित, ड्रग्स के इस कॉम्बिनेशन से मिली एचआईवी से मुक्ति

Thu, 09 Jul 2020 05:14 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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एचआईवी जागरूकता (तस्वीर सांकेतिक तौर पर प्रयोग की गई है) - फोटो : Amar Ujala
कोरोना महामारी के इस संक्रमण काल में दुनियाभर के वैज्ञानिक कम से कम समय में इसकी वैक्सीन बनाने में लगे हैं। इस महामारी काल में उन बीमारियों की भी चर्चा हो रही है, जिनकी वैक्सीन अबतक नहीं बन पाई है। एचआईवी एड्स उन्हीं बीमारियों में से एक है। इस बीच ब्राजील से एक अच्छी खबर आ रही है। ब्राजील में एक व्यक्ति एड्स के वायरस से मुक्त हो गया है। ब्राजील के साओ पाउलो स्थित फेडरल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह दावा किया है। आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से: 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • फेडरल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मरीज का नाम नहीं बताया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, एचआईवी(HIV) पीड़ित इस मरीज को कई तरह की एंटी-रेट्रोवायरल दवाओं और निकोटिनामाइड ड्रग का कॉम्बिनेशन दिया गया। इलाज के बाद दावा है कि मरीज एड्स के वायरस से मुक्त हो गया है। हाल ही में हुई ऑनलाइन एड्स 2020 कॉन्फ्रेंस में शोधकर्ताओं न इस बात का खुलासा किया है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
हर दो महीने पर दी गई दवा 
  • इस अध्ययन में शामिल शोधकर्ता डॉ. रिकार्डों डियाज के मुताबिक, ब्राजील के शख्स को साल 2012 के अक्तूबर में एचआईवी का पता लगा था। इस ट्रायल के दौरान मरीज ने एड्स के इलाज के दौरान ली जाने वाली दवाएं बंद कर दी और उसे लंबे समय तक हर दो महीने पर एंटी-रेट्रोवायरल दवाओं और निकोटिनामाइड ड्रग का कॉम्बिनेशन दिया गया।

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एचआईवी टेस्ट - फोटो : Pixabay
एक साल बाद मिला रिजल्ट
  • मरीज का एक साल बाद जब ब्लड टेस्ट किया गया तो उसकी एचआईवी रिपोर्ट निगेटिव आई। हालांकि यह पता नहीं चल पाया कि मरीज के शरीर में वायरस को खत्म करने के लिए एंटीबॉडी लेवल क्या रहा। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इन दवाओं के कॉम्बिनेशन ने बेहतर असर किया।
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ब्लड टेस्ट - फोटो : Pixabay
मरीज ने बांटा अनुभव
  • एचआईवी से ठीक होने के बाद मरीज का कहना है कि उसे यह दूसरा जीवन मिला है। उसने कहा कि लाखों एचआईवी संक्रमित मरीज ऐसा चाहते हैं कि वे इस वायरस से मुक्त हो जाएं। मैं वायरस से मुक्त हो चुका हूं, अब यह जीवन मेरे लिए अनमोल तोहफे की तरह है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • कुछ विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर केवल दवाओं के जरिए एचआईवी मुक्त होने के इस मामले की पुष्टि होती है तो यह एड्स का पहला मामला होगा, जिसमें बिना स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के एचआईवी को शरीर से बाहर निकाला गया। मालूम हो कि इससे पहले स्टेम सेल ट्रांसप्लांट से लंदन के एक इंसान को वायरसमुक्त किया गया था। 
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एचआईवी (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
  • शोधकर्ता एडम कास्टिलेजा का कहना है कि एचआईवी का उक्त मरीज जिंदा है और अब वायरस मुक्त है। एडम के मुताबिक, यह केस साबित करता है कि एड्स का इलाज किया जा सकता है। हालांकि फिलहाल विशेषज्ञ इस मामले पर लगातार नजर रख रहे हैं कि ब्राजील के इस शख्स में दोबारा वायरस का खतरा है या नहीं। यह आगे होने वाली जांचों में पता चल पाएगा। 
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एचआईवी (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
  • एक बार इंसान इस वायरस संक्रमित हो गया तो इसे बाहर निकालना या मारना मुश्किल हो जाता है क्योंकि ये वायरस मानव शरीर के ब्लड सेल्स में घर बना लेते हैं। वे लंबे समय तक सेल्स में रहते हैं और अपनी जगह नहीं छोड़ते। दवाओं से सिर्फ वायरस संक्रमण को नियंत्रित किया जा सकता है। मरीज ने एक बार दवा बंद की तो वायरस फिर से असर करने लगता है। हालांकि निश्चित दवाओं के जरिए एक सामान्य जीवन जिया जा सकता है। 
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