हर साल 15 अक्तूबर को ग्लोबल हैंडवाशिंग डे के रूप में मनाया जाता है। ग्लोबल हैंडवाशिंग डे का उद्देश्य लोगों में हाथ धोने के प्रति जागरूकता फैलाना है।हर साल हाथ न धोने के कारण किसी न किसी गंभीर बीमारी की चपेट में आ जाते हैं। हाथ धोना एक अच्छी आदत है और यह आदत कई बीमारियों का निवारण भी है। आज हम आपको ग्लोबल हैंडवाशिंग डे से जुड़ी कुछ बातें बताएंगे। आइए जानते हैं कौन-सी हैं ये बातें।
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ग्लोबल हैंडवाशिंग डे कार्यक्रम ग्लोबल हैंडवॉशिंग पार्टनरशिप (GHP) द्वारा साल 2008 में वर्ल्ड वॉटर वीक में सबसे पहले स्वीडन में आयोजित किया गया था। ग्लोबल हैंडवाशिंग डे का उद्देश्य लोगों में साबुन से हाथ धोने के लिए जागरूकता फैलाना है।
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ग्लोबल हैंडवाशिंग डे की पार्टनरशिप में कोलगेट-पामोलिव, FHI 360, प्रॉक्टर & गैंबल, UNICEF, Unilever और वर्ल्ड बैंक कंपनिया शामिल है।
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ग्लोबल हैंडवाशिंग पर कई रिसर्च की गई थी। साल 2011 में ग्लोबल हैंडवाशिंग के सदस्यों ने अमेरिका और कनाडाई पर रिसर्च की और इस रिसर्च में यह बात सामने आई की यहां के लोग साबुन से हाथ नहीं धोते हैं।
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ग्लोबल हैंडवाशिंग डे के अंतर्गत हर साल कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। साल 2014 में मध्य प्रदेश ने वृहद् स्तर पर हैंडवॉशिंक कार्यक्रम चलाया था। जिसकी वजह से यह गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया था।
हर साल ग्लोबल हैंडवाशिंग डे की नई थीम होती है।इस साल ग्लोबल हैंडवाशिंग डे की थीम है- 'Clean hands – a recipe for health.'इसका मतलब है स्वच्छ हाथों से ही सेहत बनाई जा सकती है। इसका मतलब है कि खाना बनाते समय सफाई रखना बेहद जरूरी है। अगर खाना अच्छे से हाथ धोकर बनाया जाए तो इससे कई गंभीर बीमरियों से बचा जा सकता है।