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पोलैंड में बिहार के बेटे ने इंजीनियरिंग छात्रों से तैयार करवाया थ्रीडी प्रिंटर से बना ये स्पेशल मास्क

Tue, 09 Jun 2020 11:38 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कुछ इसी तरह का होगा मास्क (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Social Media
कोरोना वायरस से इस समय दुनिया की एक बड़ी आबादी लड़ रही है। कोरोना के खिलाफ इस जंग में फेस मास्क बड़ा हथियार है। फिलहाल जो मास्क उपलब्ध हैं, उससे नाक और मुंह की तो सुरक्षा हो जाती है, लेकिन आंखों की सुरक्षा नहीं हो पाती। जबकि पिछले दिनों हुए शोधों में प्रमाणित हो चुका है कि आंखों के जरिए भी संक्रमण फैल सकता है। पोलैंड में रहनेवाले बिहार के एक बेटे ने थ्रीडी प्रिंटर के जरिए उच्च गुणवत्ता वाला मास्क तैयार करवाया है, जिससे मुंह और नाक के साथ आंख और कानों की भी सुरक्षा हो सकेगी। 
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3D Mask - फोटो : Pixabay
स्थानीय खबरों के मुताबिक, बिहार के मधुबनी जिला के निवासी डॉ. प्रदीप पोलैंड के यूनिवर्सिटी ऑफ अप्लाइड साइंसेस, वारसा में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। इसी विवि के इंजीनियरिंग छात्रों ने कोरोना से बचाव के लिए थ्रीडी प्रिंटर से तैयार मास्क बनाया है, जिसे पोलैंड के स्वास्थ्य मंत्रालय से मान्यता मिल चुकी है।
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कोरोना वायरस - फोटो : Pixabay
डॉ. प्रदीप चाहते हैं कि पोलैंड की इंडो-यूरोपियन एजुकेशन फाउंडेशन की तरफ से बिहार में कोरोना वॉरियर्स के रूप में काम कर रहे डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मियों को यह मास्क उपलब्ध कराया जाए। फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के माध्यम से पत्र भेज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इसकी अनुमति मांगी है। यह मास्क नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। 

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3D Mask - फोटो : Social Media Collage
कैसा है यह मास्क
  • थ्रीडी प्रिंटर से तैयार यह ग्लास का पारदर्शी मास्क है। यह मास्क सिर, नाक, मुंह व कान को कवर रखता है और वायरस को रोकता है। इसकी खास बात यह है कि इसे सैनिटाइज कर लंबे समय तक प्रयोग किया जा सकता है। पोलैंड में इसकी कीमत दो से पांच डॉलर तक है। जबकि बिहार में इसे नि:शुल्क उपलब्ध कराए जाने का प्रस्ताव भेजा गया है।
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बंगलूरू में रेलवे स्टेशन पर मास्क पहने बच्ची(File Photo) - फोटो : PTI
बिहार सरकार ने किया था प्रोत्साहित
  • डॉ. प्रदीप के मुूताबिक, पोलैंड के काटोविस में साल 2018 में इंडो-पोलैंड इकोनॉमी फोरम का आयोजन हुआ था। इस दौरान उन्हें बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी का सहयोग मिला था। उनका कहना है कि इन प्रयासों से उन्हें प्रोत्साहन मिलता रहा। बिहार में शिक्षा और आर्थिक विकास के क्षेत्र में भी वह सहभागिता करना चाहते हैं। 
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