फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इन आयुर्वेद उपचारों को अपनाकर शरीर को करें डिटॉक्स और बढ़ाएं प्रजनन शक्ति

Tue, 22 Oct 2019 07:54 AM IST
ललित फुलारा लाइफस्टाइल डेस्क,अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 6
गर्भावस्था एक ऐसा समय होता है, जब मां को अपनी देखभाल अच्छे ढंग से करनी चाहिए, क्योंकि उनके अच्छे लालन-पोषण से मां और बच्चा दोनों स्वस्थ रहते हैं। खुद को स्वस्थ और तंदरुस्त रखने के लिए गर्भवती महिला आयुर्वेद का सहारा लें सकती है। आयुर्वेद में ऐसे कई उपचार हैं, जिन्हे करने से गर्भावस्था में कोई दिक्कत नहीं आती है। आइए जानते हैं कौन-से हैं ये उपचार। 
 
विज्ञापन

2 of 6
पूर्वाकर्मा (प्री-डिटॉक्स उपचार)
प्री-डिटॉक्स प्रक्रिया के दौरान शरीर के अंदरूनी और बाहरी गंदगी को पसीने के रूप में निकाला जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को ऑलिटियन कहा जाता है। इसमें गर्भवती महिला को तीन से पांच दिन तक खाली पेट घी खिलाया जाता है, जिससे शरीर की आतंरिक गंदगी साफ हो जाती है। इसके बाद गर्भवती महिला के शरीर को तीन दिनों तक भाप से मालिश की जाती है। (इस उपचार के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से जानकारी लें। यह केवल आपकी जानकारी बढ़ाने के लिए है।) 
विज्ञापन

3 of 6
- फोटो : pexels.com
मुख्य कर्म (विरेचन)
मुख्य कर्म विरेचन में जड़ी बूटियों को खाना पड़ता है ,जिसके कुछ घंटो बाद आपको बार-बार शौच जाना पड़ेगा। इस प्रक्रिया को चार से छह बार दोहराया जाता है। ऐसा करने से गर्भाशय की सफाई हो जाती है। 

4 of 6
- फोटो : food
सात्विक भोजन को अपनाएं 
गर्भवती महिला के लिए यह आवश्यक है कि वह सात्विक भोजन ही खाए। सात्विक भोजन शुद्ध और ताजा होने के कारण गर्भवती महिला के लिए काफी लाभदायक माना गया है। गर्भवती महिला को अपने आहार में आसानी से पचने वाले पदार्थों का ही सेवन करना चाहिए। यह आहार मां और बच्चे दोनों के लिए लाभदायक होता है। सात्विक आहार का सेवन करने से मन में पवित्रता और स्पष्ट गुण आने लगते हैं। 
विज्ञापन

5 of 6
प्रेग्नेंसी
तेल मालिश करें 
गर्भावस्था के दौरान खुद का पोषण करना बेहद जरूरी है। तेल मालिश करके शरीर को आराम मिलता है और शरीर में गर्मी पैदा होती है। इसके अतिरिक्त तेल की मालिश करने से शरीर थकान और तनाव मुक्त होने लगता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
आहार में वसा की पर्याप्त मात्रा लें 
शरीर को स्वस्थ वसा की जरूरत होती है। खासतौर पर गर्भावस्था के दौरान महिला को अपने आहार में स्वस्थ वसा का सेवन करना चाहिए। यह आवश्यक है कि गर्भावस्था के दौरान महिला पर्याप्त मात्रा में वसा का सेवन करें।

वसा को अपने आहार में शामिल करने से गर्भावस्था के दौरान वजन बढ़ने में मदद मिलती है और बच्चे का मस्तिष्क भी विकसित होता है। वसा के मुख्य स्त्रोत दूध, नारियल तेल, जैतून का तेल, नट (बादाम, अखरोट, काजू, हेज़लनट्स), बीज (सूरजमुखी, कद्दू) और एवोकैडो हैं। इन सब का सेवन करके गर्भवती महिला के शरीर को आवश्यक पोषक तत्वों की प्राप्ति होगी। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें