फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अलर्ट: दुनिया की पांच सबसे खतरनाक बीमारियों के बारे में जानें, जीते जी मार डालती हैं

Tue, 08 Jun 2021 08:31 AM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik

डॉ. परवेश मलिक 
फिजिशियन, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एमडी (जनरल मेडिसिन)  


कोरोना वायरस को दुनिया में आए डेढ़ साल का समय बीत चुका है और इतने ही दिनों में इस बीमारी ने लाखों लोगों की जान ले ली और करोड़ों लोगों को संक्रमित किया। कोरोना के कारण लोगों को कई अन्य जानलेवा बीमारियां भी हो रही हैं, जिनमें म्यूकरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस) प्रमुख है। हालांकि यह बीमारी सभी के लिए नहीं बल्कि एक विशेष वर्ग के लिए जानलेवा साबित हो रही है, जिसमें डायबिटीज के मरीज, कम प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग शामिल हैं। वैसे इस बीमारी को इलाज के द्वारा ठीक किया जा रहा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनके अलावा भी दुनिया में कई ऐसी बीमारियां हैं, जो बेहद ही गंभीर और जानलेवा हैं और वो लाइलाज हैं, यानी उनका कोई इलाज उपलब्ध नहीं है। मोटर न्यूरॉन भी ऐसी ही एक लाइलाज बीमारी है, जिसका अभी तक सटीक इलाज नहीं मिल पाया है। मशहूर वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग को भी यही बीमारी थी। आइए जानते हैं इस बीमारी के बारे में और साथ ही कुछ अन्य लाइलाज गंभीर बीमारियों के बारे में भी... 
विज्ञापन

2 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
क्या है मोटर न्यूरॉन? 
  • यह एक घातक बीमारी है, जिसके कारण मरीज की मांसपेशिया बर्बाद हो जाती हैं, उनके शरीर के कई अंग काम करना बंद कर देते हैं। इस बीमारी से पीड़ित मरीज को खाना निगलने से लेकर सांस लेने तक में परेशानी होती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि इस बीमारी की चपेट में आने के बाद सिर्फ पांच फीसदी लोग ही जिंदा बच पाते हैं। 
विज्ञापन

3 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
स्टोनमैन सिंड्रोम 
  • फाइब्रोडिस्प्लासिया ऑसिफिकन्स प्रोग्रेसिवा (एफओपी), जिसे स्टोनमैन सिंड्रोम या मुंचमेयर रोग भी कहा जाता है, एक अत्यंत ही दुर्लभ, लेकिन गंभीर बीमारी है, जिसका कोई मौजूदा इलाज या उपचार नहीं है। इस बीमारी में मरीज की जब हड्डी टूटती है तो वह सही जगह जुड़ नहीं पाती, कभी-कभी तो वह हड्डी दूसरी जगह जुड़ जाती है, इससे काफी दर्द का सामना करना पड़ता है। इस बीमारी के इलाज ढूंढने को लेकर अभी शोध चल रहे हैं। 

4 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
एक्सरोडरमा पिग्मेंटोसम 
  • यह भी एक घातक और दुर्लभ बीमारी है। यह त्वचा संबंधी बीमारी है, जिसमें मरीज को सूरज की रोशनी से एलर्जी होती है। इस बीमारी से पीड़ित मरीज की त्वचा पर धूप पड़ जाए तो उसकी त्वचा में खुजली, जलन होने लगती है और छाले पड़ जाते हैं। इस बीमारी का भी फिलहाल कोई इलाज उपलब्ध नहीं है। 
विज्ञापन

5 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
चगास रोग 
  • चगास रोग, जिसे अमेरिकन ट्रिपैनोसोमियासिस भी कहा जाता है, एक परजीवी रोग है जो ट्रिपैनोसोमा क्रूजी के कारण होता है। इसमें व्यक्ति सोते समय 'किसिंग बग' का शिकार हो जाता है, जिससे मुंह के पास घाव हो जाता है। यह बीमारी व्यक्ति की तंत्रिका तंत्र को भी प्रभावित करती है। इसकी वजह से शरीर में खून का संचार सही तरीके से नहीं हो पाता है, जिससे कई तरह की समस्याएं पैदा हो जाती हैं। कुछ समय पहले तक यह बीमारी लाइलाज थी, लेकिन अब इसकी कुछ दवाएं उपलब्ध हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि अगर संक्रमण का पता शुरुआत में ही चल जाता है तो दवाओं के माध्यम से मरीज की जान बचाई जा सकती है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Facebook/Thulashini Gunawardene
एपीडर्मोडीस्प्लासिया वेरूसीफॉर्मिस  
  • इस बीमारी को ट्री मैन सिंड्रोम भी कहा जाता है। यह एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें इंसानों में पेड़ों की छाल जैसी संरचना उभरने लगती है, खासकर हाथ और पैर में। हालांकि पूरी दुनिया में इस बीमारी से कुछ ही लोग पीड़ित हैं। इस बीमारी का भी कोई इलाज नहीं है, लेकिन सर्जरी के जरिये पेड़ों की छाल जैसी संरचना को हटा दिया जाता है और हाथ-पैरों को फिर से इस्तेमाल करने लायक बनाया जा सकता है। 
नोट: डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में काम करने से पहले डॉ. परवेश ने एम.एम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया है।  

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें