वैश्विक स्तर पर डेटा देखें तो पता चलता है कि कम उम्र (6-18 साल) में ही आंखों की समस्याएं जैसे कम-धुंधला दिखाई देना, सिरदर्द, ध्यान से किसी चीज को देखने में कठिनाई या दूर की चीजों को साफ न देख पाने की समस्या बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कई पर्यावरणीय और दिनचर्या में गड़बड़ी की समस्याएं हैं जो इन विकारों को बढ़ावा दे रही हैं। आमतौर पर माना जाता रहा है कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, आंखों की दिक्कतें भी बढ़ने लग जाती हैं, पर कम उम्र में ही ये समस्याएं जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाली हो सकती है।
डॉक्टर कहते हैं, आंखों की कई अलग-अलग स्थितियां और बीमारियां हैं जो बच्चे की दृष्टि को प्रभावित कर सकती हैं। डॉक्टर कहते हैं, मौजूदा समय में बच्चों में इन समस्याओं के लिए पोषण में कमी और स्क्रीन टाइम का बढ़ना दो प्रमुख कारण हो सकते हैं।
आंखें चूंकि आपकी क्वालिटी ऑफ लाइफ से संबंधित हैं, इसलिए जरूरी है कि सभी उम्र के लोगों को इनका विशेष ध्यान रखना चाहिए।