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सावधान: लाइट ऑन करके सोने की आदत है नुकसानदायक, हृदय रोगों और डायबिटीज की बढ़ सकती है समस्या, विशेषज्ञों ने किया अलर्ट

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रात में लाइट ऑन करने के नुकसान - फोटो : Pixabay
बेहतर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए रात में अच्छी नींद लेना बहुत आवश्यक माना जाता है। कई अध्ययनों में इस बात की पुष्टि की गई है कि जो लोग रात के समय नींद पूरी नहीं कर पाते हैं, उनमें कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक नींद पूरी करने के साथ, हम किस तरीके और किस वातावरण में सोते हैं, इसका भी सेहत पर असर देखा गया है। अगर आपके बेडरूम का वातावरण सही नहीं है तो इससे न सिर्फ आपकी नींद व्याधित हो सकती है, साथ ही शरीर पर इसका नकारात्मक असर भी हो सकता है।

नींद की आवश्यकता और गुणवत्ता के सेहत पर प्रभाव को लेकर शोध कर रही वैज्ञानिकों की एक टीम ने इससे संबंधित बड़ा दावा किया है। जर्नल पीएनएएस में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया है कि अगर आपको रात के समय लाइट ऑन करके सोने की आदत है, तो इससे स्वास्थ्य को नुकसान हो सकता है। नींद के दौरान मध्यम स्तर का प्रकाश भी आपको बीमार कर सकता है, इतना ही नहीं इससे हृदय रोगों का भी जोखिम बढ़ जाता है। यहां तक कि नाइट लाइट की रोशनी भी आपके लिए हानिकारक हो सकती है। आइए जानते हैं कि सोते समय रोशनी का सेहत पर किस प्रकार से नकारात्मक असर हो सकता है?
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सही ढ़ंग से सोना बहुत जरूरी - फोटो : Pixabay
रात में रोशनी का सेहत पर असर
अमेरिका स्थित नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक, सोते समय कमरे में अंधेरा रखना, आपकी सेहत के लिए अच्छा विकल्प माना जाता है। कम रोशनी भी नींद के दौरान कार्डियोवैस्कुलर फंक्शन को नुकसान पहुंचा सकती है और अगली सुबह इंसुलिन प्रतिरोध को बढ़ा सकती है। ऐसे में यह हृदय और डायबिटीज, दोनों ही तरह के रोगों को बढ़ावा दे सकती है। अच्छी नींद लेने के साथ बेडरूम का वातावरण भी आपकी शारीरिक-मानसिक सेहत पर असर डालता है। 
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हृदय गति बढ़ने की समस्या - फोटो : istock
कार्डियोवैस्कुलर फंक्शन पर प्रतिकूल प्रभाव
अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि रात के समय मध्यम प्रकाश के संपर्क में आने से भी शरीर की सक्रियता बढ़ जाती है। यह स्थिति हृदय गति, हृदय के सिकुड़ने की गति और रक्त वाहिकाओं में ऑक्सीजन युक्त रक्त के प्रवाहित होने की दर भी काफी बढ़ा देती है। शरीर चूंकि नींद में अचेतन अवस्था में होता है ऐसे में इन बढ़ी हुई गति के कारण कार्डियोवैस्कुलर फंक्शन पर प्रतिकूल प्रभाव हो सकता है। रात में बेडरूम की मध्यम रोशनी भी आपमें हृदय रोगों के खतरे को बढ़ावा दे सकती है।

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डायबिटीज रोगियों को विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता - फोटो : iStock
ब्लड शुगर बढ़ने की समस्या
हृदय के साथ-साथ सोते समय रोशनी का इंसुलिन पर भी असर देखा गया। जांचकर्ताओं ने पाया कि जो लोग हल्की रोशनी में भी सोते हैं उनमें सुबह इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ा हुआ रहता है। 
इंसुलिन प्रतिरोध, उस स्थिति को कहा जाता है जब मांसपेशियों और लिवर की कोशिकाएं  इंसुलिन के प्रति अच्छी तरह से प्रतिक्रिया नहीं करती हैं। इस स्थिति में ऊर्जा के लिए रक्त से ग्लूकोज का सही तरीके से उपयोग नहीं हो पाता है, जिसके कारण ब्लड शुगर का लेवल बढ़ जाता है। यानि कि रात में सोते समय हल्की रोशनी भी आपमें हृदय रोग और डायबिटीज के खतरे को बढ़ा सकती है।
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बेडरूम का माहौल रखें अनुकूल - फोटो : pixa
सोते समय रखें अनुकूल वातावरण
नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी में न्यूरोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ डेनिएला ग्रिमाल्डी कहती हैं, भले ही आप सो रहे हों, पर ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम सक्रिय रहता है। आमतौर पर दिन के समय हृदय गति सामान्य और रात के समय कम रहना स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है, पर सोते समय इसका बढ़ जाना आपके लिए समस्याओं का कारण बन सकता है। सभी लोगों को रात में सोते समय कमरे के वातावरण को सोने के अनुकूल बनाकर रखना चाहिए।
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अच्छी नींद सेहत के लिए बहुत जरूरी - फोटो : iStock
क्या है अध्ययन का निष्कर्ष?
अध्ययन के निष्कर्ष में शोधकर्ताओं ने बताया कि संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए अच्छी और निर्बाध नींद लेना बहुत आवश्यक है, इसमें किसी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए। 
नींद के साथ पोषण और व्यायाम तथा दिन में सूर्य के प्रकाश का संपर्क स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। रात में सोते समय कमरे में ऐसा माहौल रखें जिससे किसी भी तरह से नींद में बाधा न आने पाए, विशेषतौर से प्रकाश को लेकर इस अध्ययन के परिणाम पर जरूर गौर करें। 

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स्रोत और संदर्भ
Light exposure during sleep impairs cardiometabolic function

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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