फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विशेषज्ञों की सलाह: प्रदूषित वातावरण में व्यायाम करना हो सकता है नुकसानदायक, इन बातों का रखें खास ख्याल

Thu, 11 Nov 2021 07:41 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 4
वायु प्रदूषण और व्यायाम - फोटो : Pixabay
कोरोना काल में बीमारी से अलग हट कर देखें तो सुखद अनुभव देने वाली सिर्फ एक ही बात सामने आई वह थी- वातावरण की शुद्धता और प्रकृति। पंछियों को तादाद बढ़ी, नदियां साफ होने लगीं, हवा में हानिकारक तत्वों का प्रतिशत घटने लगा, पेड़-पौधे खुलकर सांस लेने लगे। सड़कों पर धुआं छोड़ने वाली गाड़ियों का अंबार नहीं था, फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं नहीं था और लोग घरों में बंद थे। लॉकडाउन खुलने के बाद फिर से जब चीजें पुरानी ट्रैक पर लौटीं
तो साथ में प्रदूषण का संकट भी बढ़ने लगा। जाहिर है कि कामकाज को रोका नहीं जा सकता लेकिन प्रदूषण को रोकने के लिए जागरूकता और सतर्कता बहुत जरूरी है। 

बहरहाल, बढ़ता प्रदूषण चिंता का विषय है। देश में प्रदूषण भले ही दिल्ली को सबसे ज्यादा परेशान कर रहा हो, लेकिन यह हर किसी के लिए खतरनाक है। असल में प्रदूषण उन चीजों पर भी प्रभाव डालता है जिन्हें हमने अपनी सेहत बनाने के लिए अपनाया है। खासकर कोरोना के हमले के बाद से लोग फिटनेस को लेकर बहुत गंभीर हो रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्रदूषण आपके इस कदम पर भी बुरा प्रभाव डाल सकता है?
विज्ञापन

2 of 4
yoga - फोटो : Istock
प्रदूषित वातारण में व्यायाम 

रेग्युलर फिजिकल एक्टिविटी केवल वजन कम करने के लिए ही जरूरी नहीं है, इससे शरीर के सारे फंक्शन्स सुचारू बनाए रखने में भी बहुत मदद मिलती है। एक्सरसाइज या फिजिकल एक्टिविटी इम्युनिटी बूस्ट करने के साथ डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, थायरॉइड जैसी लाइफस्टाइल सम्बन्धी बीमारियों को नियंत्रित करने में भी मददगार साबित होती हैं। ब्रिस्क वॉक यानी तेज चलने को आउटडोर एक्सरसाइज का सबसे अच्छा तरीका माना जाता है। इससे फेफड़ों सहित पूरे शरीर को भरपूर ऑक्सीजन मिलती है। लेकिन अगर हवा में हानिकारक तत्व मिले हुए हों तो फायदे की जगह यही ब्रिस्क वॉक परेशानी खड़ी कर सकती है। भले ही आप इसे घर की छत पर ही क्यों न कर रहे हों।

दूषित वातावरण विशेषकर उन लोगों को ज्यादा नुकसान पहुंचाता है जो पहले से किसी विशेष शारीरिक परिस्थिति से गुजर रहे हैं, जैसे कि अस्थमा, डायबिटीज,  हृदय सम्बन्धी दिक्कतें या फेफड़ों की समस्या आदि। इन लोगों पर प्रदूषण से भरी हवा केवल एक्सरसाइज के दौरान ही नहीं बल्कि रोजमर्रा के दौरान घर से निकलने पर भी बुरा असर डाल सकती है। 
विज्ञापन

3 of 4
Yoga - फोटो : Istock
सेहत को हो सकते हैं गंभीर नुकसान

इस जहर भरी हवा के कारण लोगों को कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। जैसे सिर में दर्द, आंख, नाक या गले में जलन और खरखराहट, सांस लेने में दिक्कत, सर्दी-खांसी या बुखार आदि। लगातार प्रदूषण भरी हवा फेफड़ों को खतरे में डाल सकती है, अस्थमा को और बिगाड़ सकती है, हार्ट अटैक या स्ट्रोक की आशंका बढ़ा सकती है। गंभीर स्थितियों में यह लंग्स कैंसर जैसी समस्या का भी कारण बन सकती है।
विज्ञापन

4 of 4
Virabhadrasana Yoga - फोटो : सोशल मीडिया
व्यायाम से संबंधित इन बातों का रखें खास ध्यान
 
अब जाहिर है कि समस्या अपनी जगह है लेकिन इनका समाधान निकालना भी जरूरी है। हवा में बढ़े प्रदूषण के इस दौर में व्यायाम भी जरूरी है और सुरक्षा भी। ऐसे में इन बातों को जरूर ध्यान में रखें।
  • ब्रिस्क वॉक, रनिंग, योग या आउटडोर किसी भी एक्सरसाइज के लिए घर से निकलने से पहले अपनी स्मार्ट वॉच या फोन पर प्रदूषण का लेवल चेक कर लें। अगर आप शाम को या डिनर के बाद टहलने निकल रहे हैं या सुबह 8 के पहले घर से निकल रहे हों तो यह और भी जरूरी हो जाता है। 
  • सर्दी का मौसम शुरू हो चुका है। इस समय सुबह कोहरे के कम होने के बाद ही बाहर व्यायाम करने को प्रथमिकता दें। 
  • प्रदूषण की सघनता किसी जगह पर कम तो किसी जगह पर ज्यादा हो सकती है। उन जगहों को व्यायाम के लिए न चुनें जहां ज्यादा प्रदूषण है। खासतौर पर भारी ट्रैफिक वाली जगह पर न जाएं। 
  • आप आउटडोर एक्सरसाइज के लिए किसी विशेषज्ञ से भी सलाह ले सकते हैं। वे आपको इसके विकल्प सुझा सकते हैं। साथ ही यह भी बताते हैं कि क्या मास्क या अन्य ऐसे साधनों का प्रयोग मददगार हो सकता है?
  • डीप ब्रीदिंग तकनीक आपको बहुत फायदा देगी और इसके लिए जरूरी नहीं है कि आप घर से बाहर ही निकलें। आप घर के किसी खुले कमरे में बैठकर भी डीप ब्रीद या प्राणायाम का अभ्यास कर सकते हैं।
  • एक सुरक्षित जिम, जुम्बा क्लास या योग क्लास को अपनाना भी अच्छा विकल्प होगा। इसके अलावा स्वीमिंग और एक्सरसाइज साइकिल का प्रयोग भी फायदेमंद हो सकता है। बस ऐसी किसी भी जगह कोरोना प्रोटोकॉल और हाइजीन का ध्यान जरूर रखें।
     

----------------
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें