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Covid-19: कुत्ते भी सूंघकर बता सकते हैं, आपको कोरोना है या नहीं? RT-PCR जितना सटीक परिणाम, अध्ययन में बड़ा दावा

Fri, 20 May 2022 01:40 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कुत्ते लगा सकते हैं कोरोना का पता - फोटो : Pixabay
कोविड-19 के वैश्विक स्तर पर बढ़ते खतरे को देखते हुए सभी लोगों से लगातार विशेष सावधानी बरतते रहने की अपील की जा रही है। हालिया अध्ययनों से पता चलता है कि इस समय दुनियाभर में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट और उसके सब-वैरिएंट्स के कारण संक्रमण के मामलों में तेज उछाल देखा जा रहा है। कोरोना के इन वैरिएंट्स को अपेक्षाकृत अधिक संक्रामकता दर वाला बताया जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने और गंभीर बीमारी के खतरे से बचाव के लिए कोविड-19 का समय रहते सटीक परीक्षण किया जाना महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

कोरोना संक्रमण का पता लगाने के लिए फिलहार आरटी-पीसीआर परीक्षण को सबसे ज्यादा प्रयोग में लाया जा रहा है। इस टेस्ट के माध्यम से संक्रमण की सटीक जांच करने में मदद मिलती है। इस बीच वैज्ञानिकों की एक टीम ने कुत्तों को ट्रेनिंग देनी शुरू की है जो अपनी सूंघने की क्षमता के आधार पर सटीकता से कोविड-19 का पता लगाने में मदद कर सकते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि कुत्तों में इस क्षमता को विकसित करके अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर, बाहर से आने वाले लोगों का आसानी से परीक्षण किया जा सकेगा, इससे कोविड-19 के प्रसार को रोकने में मदद मिल सकती है।
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कोरोना संक्रमण का परीक्षण - फोटो : Istock
कोविड-19 का पता लगाने के लिए कुत्तों की ट्रेनिंग

अब तक  हवाई अड्डों और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर ड्रग्स और संदिग्ध वस्तुओं का पता लगाने के लिए ट्रेन्ड कुत्तों की मदद ली जाती रही है। कुत्तों में इसी क्षमता को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों की टीम ने सूंघकर कोविड-19 का पता लगाने के लिए कुत्तों को ट्रनिंग देने की शुरुआत की है। यह कोई पहला मामला नहीं है जब बीमारी की पता लगाने में कुत्तों की मदद लेने की पहल की जा रही है, इससे पहले मिर्गी के दौरे, कैंसर और पार्किंसंस जैसे समस्याओं का पता लगाने के लिए भी कुत्तों के सूंघने की क्षमता को प्रयोग में लाया जाता रहा है। 
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कुत्तों में सूंघने की क्षमता - फोटो : iStock
अध्ययन में क्या पता चला?

कुत्तों में सूंघने की क्षमता विकसित कर कोरोना का पता लगाने के लिए फिनलैंड स्थित हेलसिंकी विश्वविद्यालय ने कुत्तों को ट्रेन्ड करने की शुरुआत की। शोधकर्ताओं ने बताया कि कुत्तों की दो प्रजातियां- लैब्राडोर रिट्रीवर्स और व्हाइट सेफर्ड आसानी से सूंघकर  97 प्रतिशत सकारात्मकता के साथ संक्रमण की पुष्टि कर सकते हैं।

इस अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों ने सितंबर 2020 से अप्रैल 2021 के बीच  हेलसिंकी-वंता अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आने वाले 303 रैंडम यात्रियों को कुत्तों ने सुंघाकर टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव या निगेटेवि होने के संकेत प्राप्त किए। इन सभी का पहले से पीसीआर परीक्षण भी हो चुका था।

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कोविड-19 का आसानी से लग सकेगा पता - फोटो : Pixabay
सटीकता से संक्रमण का पता लगा सकते हैं कुत्ते

बीएमजे ग्लोबल हेल्थ में प्रकाशित अध्ययन के परिणाम में वैज्ञानिकों ने बताया कि कुत्तों ने जिन 303 यात्रियों को सूंघा था उनमें से  296 का आरटीपीसीआर निगेटिव था, जिसका कु्त्तों नें सूंघकर पता लगा लिया। केवल तीन यात्रियों को खोजने में कुत्ते विफल रहे। शोधकर्ताओं का कहना है कि आरटीपीसीआर टेस्ट और कुत्तों के संकेत 98 फीसदी तक मैच करते हैं। कुत्तों को कोरोना के नए वैरिएंट्स की पहचान करने के लिए भी ट्रेन्ड किया जा रहा है। 
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आरटी-पीसीआर की तरह सटीकता से पहचान - फोटो : PTI
क्या कहते हैं शोधकर्ता?

शोध के परिणाम के बारे में हेलसिंकी यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के प्रोफेसर अनु कांटेले कहती हैं, हवाई अड्डों पर ही अगर बाहर से आने वाले लोगों की जांच कर ली जाए तो कई प्रकार के संक्रामक रोगों को एक देश से दूसरे देश में प्रसारित होने से रोका जा सकता है। कोरोना संक्रमण के मामले में कुत्तों को प्रशिक्षित करके इस दिशा में सरलता से काम किया जा सकता है। हमारे अब तक के परिणाम काफी उत्साहवर्धक हैं। यह निश्चित ही आने वाले समय में रोग के प्रसार को नियंत्रित करने में मदद करने वाला तरीका साबित होगा।


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स्रोत और संदर्भ
Scent dogs in detection of COVID-19: triple-blinded randomised trial and operational real-life screening in airport setting 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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