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अध्ययन: क्या आपको भी है माइग्रेन की समस्या? जानिए ऐसे रोगियों को क्यों दी जाती है मछली खाने की सलाह?

Thu, 12 Aug 2021 07:32 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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माइग्रेन की समस्या को कैसे ठीक करें (सांकेतिक) - फोटो : Pixa
लोगों में सिरदर्द की समस्या होना सामान्य है, पर हर सिरदर्द को सामान्य मान लेना सही नहीं है, कुछ प्रकार के सिरदर्द माइग्रेन का कारण भी हो सकते हैं। माइग्रेन एक विशेष प्रकार की समस्या है जिसमें लोगों को गंभीर सिरदर्द के साथ कुछ अन्य लक्षणों जैसे मतली-उल्टी, प्रकाश और ध्वनि के प्रति संवेदनशीलता जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। साल 2018 में हुए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि संयुक्त राज्य अमेरिका में 15 फीसदी से ज्यादा वयस्क माइग्रेन की समस्या के शिकार हैं। वहीं 2015 के आंकड़ों में पाया गया कि 19 फीसदी महिलाओं जबकि 9 फीसदी पुरुषों में इस समस्या के होने का खतरा रहता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक जिन लोगों को अक्सर माइग्रेन की समस्या रहती है उन्हें दवा के साथ अपने आहार में परिवर्तन करके भी लाभ मिल सकता है। बीएमजे मेडिकल जर्नल में प्रकाशित इसी से संबंधित अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि किसी भी प्रकार की क्रोनिक यानी कि लंबे समय से हो रही दर्द की समस्या को कम करने में आहार का बड़ा योगदान हो सकता है। चूंकि माइग्रेन भी ऐसी ही क्रोनिक समस्या है ऐसे में इस रोग से ग्रसित लोगों को मछलियों का सेवन अधिक करना चाहिए, इससे लाभ मिल सकता है। आइए आगे की स्लाइडों में जानते हैं कि आखिर मछली खाने से माइग्रेन में किस तरह से लाभ मिल सकता है?
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माइग्रेन रोगियों के लिए फायदेमंद है मछली खाना (सांकेतिक) - फोटो : Pixabay
माइग्रेन में मछली खाने के फायदे
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन एजिंग इंट्रामुरल में रिसर्च प्रोग्राम के क्लीनिकल एन्वेस्टिगेटर प्रोफेसर क्रिस्टोफर ई राम्सडेन कहते हैं, शरीर में  पोषक तत्वों की कमी क्रोनिक समस्याओं का कारण बन सकती है। मछलियों से कई प्रकार के आवश्यक पोषक तत्व आसानी से प्राप्त किए जा सकते हैं, जो इस तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का काफी हद तक कम करने में सहायक हो सकते हैं। इसी विषय के बारे में जानने के लिए माइग्रेन की समस्या से ग्रसित लोगों पर अध्ययन किया गया, जिसमें मछली खाने से इस रोग में अच्छे परिणाम देखने को मिले।
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माइग्रेन को कम कर सकते हैं ओमेगा-3 वाले आहार - फोटो : iStock
तीन समूह के लोगों पर किया गया अध्ययन
16 हफ्तों तक किए गए इस अध्ययन में लोगों को तीन समूहों में बांटते हुए अलग-अलग पोषक तत्वों से यु्कत भोजन दिए गए। प्रतिभागियों को औसतन एक महीने में 16 दिनों तक सिर में दर्द या माइग्रेन की समस्या रहती थी। प्रतिभागियों के एक समूह को ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थ दिए गए साथ ही इन लोगों के आहार में ओमेगा-6 की मात्रा को कम कर दिया गया। दूसरे समूह के लोगों के आहार में मछलियों सहित ओमेगा-3 की मात्रा बढ़ाने के साथ ओमेगा-6 की मात्रा का भी सामान्य रखा गया। वहीं तीसरे समूह के लोगों के आहार में दोनों प्रकार के फैटी एसिड की मात्रा को सामान्य रखा गया। 

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माइग्रेन में आहार का बड़ा महत्व (सांकेतिक) - फोटो : Amar ujala
क्या कहता है अध्ययन का निष्कर्ष?
अध्ययन के निष्कर्ष में शोधकर्ताओं ने पाया कि जिस समूह ने आहार में मछली का सेवन बढ़ाकर ओमेगा-6 की मात्रा को कम रखा था उनको महीने में सिरदर्द की समस्या कम हुई। वहीं जिस समूह ने ओमेगा-3 और ओमेगा-6 दोनों की मात्रा का सामान्य रखा उनमें भी थोड़ा सुधार देखा गया। इस आधार पर वैज्ञानिकों का कहना है कि आहार में ओमेगा-3 की मात्रा को बढ़ाकर माइग्रेन जैसी क्रोनिक दर्द की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। मछलियों को ओमेगा-3 का अच्छा स्रोत माना जाता है, ऐसे में इस तरह की समस्याओं से ग्रसित लोगों को मछलियों का सेवन अधिक करना चाहिए। 
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माइग्रेन के कारकों को पहचानिए (सांकेतिक) - फोटो : Pixabay
माइग्रेन से बचाव के लिए और क्या उपाय किए जा सकते हैं?
डॉक्टरों के मुताबिक जिन लोगों को माइग्रेन का समस्या होती रहती है उन्हें इसके ट्रिगर करने वाले कारकों की पहचान कर उनसे दूर रहने की कोशिश करनी चाहिए। पर्याप्त नींद लेने, तनाव को कम करने, ढेर सारा पानी पीने जैसी आदतों को प्रयोग में लाकर माइग्रेन के लक्षणों को कम किया जा सकता है। नियमित रूप से व्यायाम करके भी आप इस समस्या से काफी हद तक सुरक्षित रह सकते हैं। यदि आपको माइग्रेन के समय में कुछ भी आसामान्य सी समस्या का अनुभव हो तो इस बारे में डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें।



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स्रोत और संदर्भ: 
Dietary alteration of n-3 and n-6 fatty acids for headache reduction in adults with migraine: randomized controlled trial

अस्वीकरण नोट: यह लेख बीएमजे मेडिकल जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। ज्यादा जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं।
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