फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Diwali 2025: पटाखों की आवाज से सुन्न हो गया है कान? ये एक गलती आपको बहरा बना सकती है

Tue, 21 Oct 2025 11:51 AM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिवाली में पटाखों से बहुत से लोगों का कान सुन्न हो जाता है या सीटी की आवाज बजने लगती है। ये आमतौर पर अस्थायी समस्या होती है, लेकिन अगर कुछ सावधानियां न बरती गई हैं तो बहरेपन का जोखिम बढ़ जाता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में डॉक्टर से जानते हैं।
विज्ञापन
1 of 5
कम सुनाई देने की समस्या - फोटो : Freepik.com
Firecracker Noise Effect: दिवाली एक ऐसा त्योहार है, जिसमें अक्सर लोग उत्साह में खूब पटाखे जलाते हैं। इन पटाखों से निकलने वाला धुआं तो हमारे लिए नुकसानदायक होता ही है, साथ ही इसकी अत्यधिक तेज आवाज भी हमारे कानों के लिए हानिकारक होती हैं। यह तेज आवाज कभी-कभी हमारे कानों के लिए गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। अगर तेज आवाज वाले पटाखों के तुरंत बाद आपके कान सुन्न हो गए हैं, या आपको कानों में सीटी बजने या सनसनाहट की आवाज आ रही है, तो इसे नजरअंदाज न करें।

यह अस्थायी रूप से नॉइस इंड्यूस्ड हियरिंग लॉस का संकेत हो सकता है। यह स्थिति तब बनती है जब ध्वनि की अत्यधिक तेज ऊर्जा कान के संवेदनशील कोशिकाओं को अस्थाई रूप से थका देती है। इसी विषय पर अमर उजाला से खास बातचीत में ओड़ीसा के निजी अस्पताल के डॉक्टर रवि कुशवाहा ने कुछ बातें बताई, जिसके बारे में आपको भी जानना चाहिए।

डॉक्टर कुशवाह के अनुसार, इस नाजुक स्थिति में मरीज अक्सर गलती कर बैठते हैं और वे बिना डॉक्टर की सलाह के तुरंत कानों में तेल, कोई घरेलू नुस्खा या कोई हर्बल दवा डाल लेते हैं। डॉक्टर के अनुसार यह गलती आपके कानों को स्थायी बहरेपन की ओर धकेल सकती है।

पटाखों का शोर पहले ही अंदरूनी कान की नाजुक कोशिकाओं को थका चुका होता है, और ऐसे में कान में कुछ भी डालना, संक्रमण या जटिलताओं को बढ़ाकर स्थायी क्षति का कारण बन जाता है, जिसे ठीक नहीं किया जा सकता। इसलिए कान सुन्न होने पर घबराहट में कोई भी गलती न करें और खुद से कुछ भी इलाज न करने से बचें। आइए डॉक्टर से जानते हैं कि ऐसी स्थिति में आपको क्या करना चाहिए?
विज्ञापन

2 of 5
इयर केयर - फोटो : Adobe Stock
कान में तेल डालना क्यों है खतरनाक?
डॉक्टर कुशवाह के मुताबिक कान के अंदरूनी हिस्से में मौजूद संवेदनशील कोशिकाएं और कान का पर्दा बहुत नाजुक होते हैं। पटाखे की आवाज से अक्सर कान के परदे में मामूली सूजन या क्षति हो सकती है। ऐसे में, यदि आप बिना डॉक्टर की जांच के कान में तेल या कोई तरल पदार्थ डालते हैं, तो यह सीधे कान के मध्य भाग तक पहुंच सकता है।

इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। अगर कान का पर्दा थोड़ा फट गया हो, तो तेल या पानी जैसी कोई भी चीज अंदर जाकर गंभीर जटिलता पैदा कर सकती है और सुनने की क्षमता हमेशा के लिए प्रभावित हो सकती है।

ये भी पढ़ें- Diwali 2025: पटाखों का धुआं कहीं बन न जाए आफत, अस्थमा और सांस के मरीज जरूर जान लें ये बातें
विज्ञापन

3 of 5
कान - फोटो : Adobe Stock Images
कान को दें पूर्ण आराम
डॉक्टर कुशवाह ने बताया है कि अगर आपका सुन्न हुआ है या सीटी की आवाज आ रही है तो तो ज्यादा चांस है कि वो 1-2 दिनों में सामान्य हो जाएगा। इसके लिए आप पटाखों के शोर के संपर्क में आने से बचें और कानों को तुरंत पूर्ण आराम दें। शोरगुल वाली जगह से हटकर किसी शांत कमरे में चले जाएं।

अगले 12 से 24 घंटों तक हेडफोन, ईयरफोन या तेज म्यूजिक सुनने से बचें। इस दौरान कान के अंदरूनी हिस्से को खुद को सामान्य करने का समय मिलता है। कानों को जितना अधिक आराम मिलेगा, अंदरूनी कोशिकाओं के अस्थायी रूप से ठीक होने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी।

ये भी पढ़ें- Diwali 2025: त्योहारों के उत्साह में दिल की सेहत को न करें अनदेखा, डॉक्टर ने दिए हृदय रोगियों के लिए जरूरी टिप्स

4 of 5
कम सुनाई देने की समस्या - फोटो : Freepik.com
बहरेपन के शुरुआती लक्षण पहचानें
डॉक्टर कुशवाह बताते हैं कि अगर कान सुन्न होने या घंटियां बजने (टिनिटस) की समस्या 24 से 48 घंटों के भीतर ठीक नहीं होती है, तो यह स्थायी क्षति का संकेत हो सकता है। इसके अलावा कुछ और भी लक्षण भी दिख सकते हैं जैसे सामान्य बातचीत सुनने में कठिनाई होना, या लोगों को अपनी बात बार-बार दोहराने के लिए कहना। इन संकेतों को नजरअंदाज न करें।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
डॉक्टर (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Freepik
बचाव और डॉक्टर से संपर्क
घर पर कान के आसपास हल्की ठंडी सिकाई करें ताकि बाहरी सूजन कम हो। घबराहट को कम करने के लिए तनाव जैसी स्थिति से बचें। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कान में कोई भी तरल पदार्थ, दवा या तेल बिल्कुल न डालें। अगर कान में सुन्नपन या घंटियां बजने की समस्या 48 घंटों के बाद भी बनी रहे, तो बिना देर किए किसी ईएनटी विशेषज्ञ से संपर्क करें। जल्दी इलाज शुरू करने से स्थायी बहरेपन को रोका या कम किया जा सकता है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें