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अलर्ट: कोरोना से कैसे अलग है निपाह वायरस? जानिए दोनों में से कौन आपके लिए ज्यादा घातक

Tue, 07 Sep 2021 10:05 AM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना और निपाह वायरस में अंतर - फोटो : iStock
Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik

डॉ. परवेश मलिक 
फिजिशियन, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एमडी (जनरल मेडिसिन)


केरल देश का एक ऐसा राज्य है, जो दो अलग-अलग संक्रमणों से जूझ रहा है। एक तो यहां पहले से ही कोरोना संक्रमण के मामलों में वृद्धि हो रही है और दूसरा अब राज्य में निपाह वायरस का भी प्रकोप देखने को मिल रहा है। हालांकि, भले ही ये दोनों वायरस प्रकृति में एक जैसे दिखें, लेकिन दोनों अपने-अपने तरीके से काफी अलग हैं। निपाह वायरस को एक जूनोटिक संक्रमण माना जाता है, यानी एक ऐसा संक्रामक रोग जो प्रजातियों के बीच, जानवरों से इंसानों में या इंसानों से जानवरों में फैलता है। साल 1999 में इस वायरस की पहचान की गई थी और इसका नाम मलेशिया के एक गांव सुंगई निपाह के नाम पर रखा गया था। इसका संक्रमण सुअर, फ्रूट बैट (फल खाने वाले चमगादड़), कुत्ते, बकरी, बिल्ली, घोड़े और संभवतः भेड़ से भी हो सकता है। माना जाता है कि चमगादड़ों में यह वायरस प्राकृतिक रूप से पाया जाता है, लेकिन उनमें संक्रमण का कोई भी लक्षण नहीं दिखता है। 
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कोरोना वायरस - फोटो : Pixabay
वहीं दूसरी ओर, चीन के वुहान में पहले मामले का पता चलने के 20 महीने बाद भी कोरोना वायरस (कोविड-19) की उत्पत्ति का पता नहीं चल पाया है। पहले ऐसा माना गया था कि वुहान के एक मछली बाजार से इसकी उत्पत्ति हुई है, लेकिन यह सिद्धांत अभी तक स्थापित नहीं हुआ है। यह चीन के लैब में बनाया गया वायरस है या नहीं, इस पर भी बहस अभी जारी है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
निपाह का कोई इलाज नहीं है, न ही कोविड का 
  • निपाह और कोरोना, दोनों संक्रमणों का कोई इलाज नहीं है। इनके खिलाफ अभी तक कोई भी एंटीवायरल दवा नहीं बनी है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल का कहना है कि वर्तमान में, निपाह वायरस (एनआईवी) संक्रमण के लिए कोई लाइसेंस प्राप्त उपचार उपलब्ध नहीं है। उपचार सहायक देखभाल तक सीमित है, जिसमें ज्यादा से ज्यादा आराम करना, खुद को हाइड्रेट रखना और लक्षणों के आधार पर उपचार शामिल हैं। सीडीसी ने कहा कि 'इम्यूनोथेराप्यूटिक उपचार (मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थेरेपी) है, जो वर्तमान में एनआईवी संक्रमण के उपचार के लिए की जाती है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने केरल राज्य को जो पत्र भेजा है, उसके अनुसार भारत उपचार उद्देश्यों के लिए मोनोक्लोनल एंटीबॉडी के उपयोग की खोज कर रहा है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
वहीं, कोरोना वायरस के मामले में, अक्तूबर 2020 में खाद्य एवं औषधि प्रशासन यानी एफडीए ने कोविड-19 के इलाज के लिए एंटीवायरल दवा रेमेडिसविर को मंजूरी दी थी। इसके अलावा टोसिलिजुमैब दवा को भी कोविड-19 के इलाज के लिए मंजूरी मिली है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि वह कोविड-19 की रोकथाम या इलाज के रूप में एंटीबायोटिक दवाओं सहित सेल्फ मेडिकेशन की सिफारिश नहीं करता है। 
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निपाह वायरस - फोटो : iStock
निपाह अधिक घातक, कम संक्रामक, कोविड बिल्कुल विपरीत 
  • विशेषज्ञों के मुताबिक, निपाह वायरस कम संक्रामक जरूर है, लेकिन यह अधिक घातक है, जबकि कोरोना वायरस अधिक संक्रामक, लेकिन कम घातक है। निपाह वायरस से संक्रमित होने वाले लोगों में जहां 40 से 75 फीसदी तक की मौत हो जाती है, वही कोरोना वायरस की मृत्यु दर इसके मुकाबले बहुत ही कम है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
निपाह और कोरोना वायरस के लक्षण क्या हैं? 
  • निपाह और कोरोना वायरस के कुछ लक्षण मिलते-जुलते हैं, जिसमें बुखार, गले में खराश, सिर दर्द, खांसी, थकान, सांस लेने में तकलीफ आदि शामिल हैं। लेकिन निपाह में मांसपेशियों में दर्द और एनसीफिलाइटिस जैसे लक्षण भी दिखते हैं, जबकि सूखी खांसी, स्वाद और गंध का चले जाना, कोरोना के सबसे आम लक्षण हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
आरटी-पीसीआर से पता चलता है 
  • कोरोना और निपाह वायरस, दोनों के संक्रमण का पता लगाने के लिए आरटी-पीसीआर टेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है। अगर कोई व्यक्ति संक्रमित है और उसमें लक्षण दिख रहे हैं, तो उसे यह टेस्ट जरूर कराना चाहिए। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
क्या दोनों वायरस के खिलाफ वैक्सीन उपलब्ध है? 
  • कोरोना वायरस के खिलाफ तो वैक्सीन बन गई है, जिसका इस्तेमाल दुनियाभर में किया जा रहा है, लेकिन निपाह वायरस की वैक्सीन अब तक नहीं बनी है। इसलिए इस बीमारी से अधिक सावधान रहने की जरूरत है। 
नोट: डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में काम करने से पहले डॉ. परवेश ने एम.एम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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