देश पिछले डेढ़ साल से कोरोना संक्रमण की चपेट में है। इस दौरान कोरोना की दो लहरें आ चुकी हैं, पहली के मुकाबले दूसरी लहर को अपेक्षाकृत काफी असरदार और नुकसानकारक माना जा रहा है। सरकार ने संक्रमण पर नियंत्रण पाने के उद्देश्य से देश में टीकाकरण अभियान को तेज कर दिया है। वायरस की प्रकृति को लेकर अब तक चर्चा रही है कि जिन लोगों को संक्रमण हो जाता है, उनके शरीर में वायरस के खिलाफ सुरक्षात्मक एंटीबॉडीज स्वत: निर्मित हो जाती हैं। ऐसे में लोगों के मन में सवाल आ रहे हैं कि क्या सभी संक्रमितों के शरीर में एंटीबॉडी का निर्माण हो चुका है? अगर हां तो वह कितनी प्रभावी हैं? इसके अलावा टीकों और वैक्सीन से प्राप्त एंटीबॉडीज में क्या अंतर होता है? आइए विशेषज्ञों से जानते हैं?
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प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा उत्पादित प्रोटीन हैं एंटीबॉडीज
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क्या होती हैं एंटीबॉडीज?
सबसे पहले हमारे लिए यह जानना आवश्यक है कि एंटीबॉडीज क्या होती हैं और यह किस तरह से हमारी रक्षा करती हैं? स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक एंटीबॉडी पिछले संक्रमण या टीकाकरण के जवाब में प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा उत्पादित प्रोटीन होते हैं। यह वास्तव में मेमेरी सेल्स के रूप में काम करती हैं जो भविष्य में उसी वायरस के संपर्क में आने पर शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करती हैं। शरीर में मौजूद एंटीबॉडीज की संख्या, रक्त परीक्षण की मदद से निर्धारित की जाती है जिसे एंटीबॉडी टेस्ट कहा जाता है।
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संक्रमण के बाद शरीर में स्वत: बनती हैं एंटीबॉडीज
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संक्रमण से बनीं एंटीबॉडीज
अमर उजाला से बातचीत में उजाला सिग्नस के डायरेक्टर डॉ शुचिन बजाज बताते हैं कि संक्रमण के बाद किसी व्यक्ति के शरीर में ह्यूमोरल एंटीबॉडीज बनती हैं। शरीर में मौजूद बी कोशिकाएं वायरस के विभिन्न हिस्सों के लिए एंटीबॉडी बनाती हैं। कोरोना जैसे संक्रमण के मामलों में शरीर में बनी एंटीबॉडीज कुछ महीनों बाद नष्ट हो जाती हैं। डॉ शुचिन बताते हैं कि चिकनपॉक्स जैसे संक्रमण से बनी एंटीबॉडीज लंबे समय तक शरीर में बनी रहती हैं और अगले संक्रमण से सुरक्षा देती हैं, जबकि कोरोना के मामले में अब तक पता चला है कि एंटीबॉडीज कुछ महीनों में नष्ट हो जाती हैं।
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टीकाकरण से बनी एंटीबॉडीज लंबे समय तक करती हैं शरीर की रक्षा
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वैक्सीन से बनीं एंटीबॉडीज
वैक्सीन के माध्यम से प्रतिरक्षा प्रणाली को वायरस के एक या एक से अधिक प्रोटीन के संपर्क में लाया जाता है। इस आधार पर प्रतिरक्षा प्रणाली बी कोशिकाओं को ऐसी एंटीबॉडीज बनाने को प्रेरित करता है जो उस विशिष्ट वायरस को बेअसर कर सकती हों। वैक्सीन लगने के बाद अगर आप संक्रमित हो जाते हैं तो मेमरी सेल्स उस वायरस को मारने के लिए एंटीबॉडीज रिलीज करती हैं। वे शरीर में संक्रमण पैदा करने से पहले ही वायरस को खत्म कर देती हैं। यदि आपमें संक्रमण का असर ज्यादा है तो आप बीमार हो सकते हैं, लेकिन उसके लक्षण हल्के होंगे।
टीकाकरण से बनीं एंटीबॉडीज को माना जाता है प्रभावी
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संक्रमण और वैक्सीन से बनीं एंटीबॉडीज में क्या अंतर है?
डॉ शुचिन बजाज बताते हैं कि दोनों ही मामलों में एंटीबॉडी समान रूप से निर्मित होते हैं और वायरस पर समान प्रभाव डालते हैं। हालांकि, टीकाकरण और संक्रमण से बनने वाली एंटीबॉडी की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में कुछ अंतर हो सकता है। जब बेहतर एंटीबॉडी का उत्पादन की बात आती है, तो दोनों स्थितियों की तुलना नहीं की जा सकती है। सामान्य तौर पर टीकाकरण के बाद बनने वाली एंटीबॉडीज को लॉंन्ग लास्टिंग माना जाता है। इसलिए कोरोना के समय में सभी लोगों को टीकाकरण जरूर से कराना चाहिए।
---------------- नोट: यह लेख उजाला सिग्नस के डायरेक्टर डॉ शुचिन बजाज से एक बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।
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