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ब्लैक फंगस के बाद अब डॉक्टर्स के लिए हैप्पी हाइपोक्सिया बना चुनौती, जानें क्या है ये और कैसे कर सकते हैं पहचान

Tue, 18 May 2021 05:44 PM IST
प्रकाश चंद जोशी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Happy Hypoxia - फोटो : istock
डॉ राजीव रंजन 
एम्स, दिल्ली (एमडी, लैब मेडिसिन)

कोरोना की दूसरी लहर चारों तरफ से भारत के लोगों पर कहर बनकर टूटी है। ऐसा इसलिए क्योंकि जहां एक तरफ कोरोना से काफी संख्या में लोग संक्रमित हो रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ ब्लैक फंगस डॉक्टरों के लिए चुनौती बना हुआ है। लेकिन इन सबके बीच अब हैप्पी हाइपोक्सिया ने हर किसी के लिए नई मुसीबत खड़ी कर दी है, क्योंकि ये कोरोना से संक्रमित हुए लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। इसमेंं एकाएक ऑक्सीजन का लेवल घटते चला जाता है और फिर इससे कई मरीजों की मौत हो रही है। तो चलिए जानते हैं कि आखिर ये हैप्पी हाइपोक्सिया क्या है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
हैप्पी हाइपोक्सिया क्या है?
  • दरअसल, डॉक्टर्स कहते हैं कि हैप्पी हाइपोक्सिया कोरोना का एक नया लक्षण है। इसमें संक्रमित हुए व्यक्ति को खांसी, बुखार और सांस फूलने की समस्या नहीं होती है, लेकिन अचानक ऑक्सीजन लेवल गिरने लगता है और इस वजह से मरीज की जान खतरे में पड़ सकती है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
ऐसे पहचान सकते हैं इस बीमारी को
  • अगर आप में हैप्पी हाइपोक्सिया का कोई लक्षण नहीं है, और आप इसे पहचानना चाहते हैं तो आप ऐसा कर सकते हैं कि एक सांस में एक से 30 तक गिनती करें। अगर इस दौरान आपको सांस लेने में दिक्कत आ रही है, तो आपको अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।

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oximeter - फोटो : istock
चेक करते रहें ऑक्सीजन लेवल
  • हैप्पी हाइपोक्सिया के कारण फेफड़ों में खून की नसों में थक्के जम जाते हैं, जिसकी वजह से फेफड़ों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन सप्लाई नहीं होती और खून में ऑक्सीजन सैचुरेशन कम होने लगता है। मरीज ठीक होता है, लेकिन अचानक उसका ऑक्सीजन लेवल 70 से 80 प्रतिशत हो जाता है और सांसें उखड़ने लगती हैं। ऐसे में मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए। वहीं, कोरोना से संक्रमित हुए लोगों को दिन में दो-तीन बार ऑक्सीजन सैचुरेशन चेक करना चाहिए।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इन अंग को ज्यादा प्रभावित करती है ये
  • यहां आपको बता दें कि हाइपोक्सिया दिमाग, दिल, किडनी समेत कई अन्य प्रमुख अंगों के काम को प्रभावित करता है। वहीं, डॉक्टर्स मानते हैं कि युवाओं की इम्यूनिटी मजबूत होती है, जिसकी वजह से उनमें लक्षण काफी हल्के नजर आते हैं और युवा इनको नजरअंदाज करते हैं। ऐसे में अगर आपके शरीर का ऑक्सीजन सैचुरेशन 94 प्रतिशत से कम है और आपको कोई दिक्कत नहीं हो रही है तो ये हाइपोक्सिया है। ऐसे में युवा लोग इसे नजरअंदाज न करें।

नोट: यह लेख दिल्ली एम्स में एमडी लैब मेडिसिन, डॉ राजीव रंजन के कोरोना संक्रमण के उनके अनुभवों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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